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संपादकीय: ईशान्य का हाहाकार

देश में एक तरफ मानसून में हो रही देरी चिंता बढ़ा रही है तो दूसरी तरफ आसाम सहित ईशान्य में स्थित राज्यों में भयंकर बाढ़ जैसे हालात निर्माण हो गए हैं। उसमें भी आसाम की अवस्था बेहद भीषण है। वहां ३२ जिलों में लगभग ३७ लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कल यही संख्या ३१ लाख थी। दो दिन पहले २८ जिलों में १९ लाख लोग बाढ़ में फंसे थे। आसाम और अन्य राज्यों पर कितना गंभीर संकट टूटा है, इसका अनुमान इन तीन दिनों में बिगड़ी स्थिति से लगाया जा सकता है। उस पर बाढ़ एवं भूस्खलन की दुर्घटनाओं का दोहरा संकट देखने को मिल रहा है। राज्य का कोई एकाध हिस्सा नहीं, बल्कि पूरा राज्य ही प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। आसाम के गुवाहाटी, होजई, नलबारी, बजाली, धुवरी, कामरूप, कोकराझार, सोनीपुर एवं अन्य कई जिले पानी में डूब गए हैं। करीब ३ साढ़े ३ हजार गांव पानी में डूबे हैं। इसके अलावा लगभग ४५ हजार हेक्टेयर कृषि भूमि बर्बाद हो गई है। आसाम में लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। करीब डेढ़ लाख लोगों पर राहत शिविरों में आश्रय लेने की नौबत आ गई है। वहां मेघालय और त्रिपुरा में भी ऐसे ही भयंकर हालात हैं। मेघालय के मौसीनराम और चेरापूंजी में रिकॉर्ड बारिश दर्ज हुई है। चेरापूंजी वैसे भी देश में सर्वाधिक बारिश होनेवाली जगह के रूप में जाना जाता है। सिर्फ दो दिन पहले वहां १९४० के बाद पहली बार रिकॉर्ड बारिश हुई है। मौसीनराम में तो २४ घंटों में १००३.६ मिलीमीटर बरसात हुई है। १९९५ के बाद पहली बार वहां इतनी रिकॉर्ड बारिश हुई। त्रिपुरा में भी बाढ़ का कहर जारी है। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में ६ घंटों में १४५ मिलीमीटर बारिश हुई। बीते छह दशकों में यह सर्वाधिक बारिश है। इसलिए त्रिपुरा की नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इन तमाम आपदाग्रस्त राज्यों में आसाम की स्थिति सर्वाधिक विकट है। बीते महीने भर में आसाम को लगा बाढ़ का यह दूसरा झटका है। बीते महीने भी आसाम इसी तरह बाढ़ में डूब गया था और ९ लोगों की उसमें मौत हो गई थी। ५ लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा था। अब यही आंकड़ा ४२ लाख से ऊपर पहुंच गया है। अकेले कामपुर जिले में ३ लाख ६४ हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा है। इसके अलावा राज्य में बाढ़ से मरनेवालों की संख्या भी ७० के पार पहुंच गई है। आसाम में हर साल पेश आनेवाली इस स्थिति के कुछ कारण जैसे कि भौगोलिक हैं, उसी तरह मानव निर्मित भी हैं। आसाम का भू-भाग थोड़ा निचला इलाका है। इसलिए आसपास के हिस्सों में पानी का स्तर बढ़ा तो उसका प्रवाह आसाम की ओर ही मुड़ जाता है। इसके अलावा ब्रह्मपुत्र और उसकी उपनदियों में आनेवाली बाढ़ उसका तेज प्रवाह भी आसाम के हमेशा बाढ़ की चपेट में आने का कारण है। उस पर ऊपरी हिस्से में चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाया है। उसका पानी अनियमित रूप से छोड़ा जाता है। इसलिए आसाम का मैदानी भाग बाढ़मय रहता है। अब तो आसाम और ईशान्य की ओर से राज्यों में तूफानी बारिश का कहर ही जारी है। अकेले आसाम के ३२ जिलों में ३१ लाख लोग इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। आसाम की बाढ़ हमेशा की ही है और इसके कारण भौगोलिक हैं। इस ओर उंगली दिखाकर राज्य व केंद्र सरकार हाथ ऊपर नहीं कर सकती है। राज्य सरकार की मदद, केंद्र सरकार की अधिकतम सहायता वगैरह ठीक होगा, फिर भी ये सब प्राकृतिक आपदा टूटने के बाद की बातें हैं। बाढ़ में हुई जनहानि एवं आर्थिक नुकसान की इससे भरपाई नहीं की जा सकती है। आसाम व अन्य राज्यों में हमेशा आनेवाली बाढ़ को रोकने के लिए बनाई जानेवाली योजनाएं जब तक कागजों पर ही रहेंगी तब तक आसाम बाढ़ और भूस्खलन के श्राप से मुक्त नहीं हो सकेगा। अच्छा है, आसाम में भाजपा की ही सरकार है। इसलिए गैर भाजपाई सरकार के मामलों में तंग रहनेवाला केंद्र का हाथ यहां तुरंत पहुंचना चाहिए। कम-से-कम अब तो आसाम और अन्य राज्यों में बाढ़ विरोधी उपाय योजनाओं को गति देनी चाहिए। ईशान्य की बाढ़ से मची हाहाकार की यही चेतावनी है।

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