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संपादकीय : ताला और पूंछ!

प्रधानमंत्री मोदी को दोबारा सत्ता मिली तो वह भारत का चेहरा-मोहरा बदलकर रख देंगे, ऐसा विश्वास देवेंद्र फडणवीस जैसे अंधभक्तों को है। क्या मोदी के कारण देश का चेहरा बदल गया है? कहना मुश्किल है, लेकिन मोदी काल में भारत का नक्शा कुतरा जा रहा है। चीन ने एक बार फिर भारत के मर्म को छेड़ा है। भारत के अविभाज्य भाग अरुणाचल प्रदेश के ३० गांवों के नाम चीन ने बदल दिए हैं। चीन ने एलान किया है कि अरुणाचल पर भारत का दावा गलत है और यह दक्षिण तिब्बत का हिस्सा है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने अरुणाचल के ११ गांवों, १२ पर्वतों, ४ नदियों, १ झील और एक सड़क का नामकरण किया है। ये नाम चीनी, तिब्बती और रोमन भाषाओं में प्रकाशित किए गए हैं। चीन ने पिछले पांच साल में तीसरी बार ऐसा किया है और कहा है कि अरुणाचल पर भारत का दावा अवैध है। चीन की ये हरकतें मोदी काल में ही बढ़ी हैं। चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। सोनम वांगचुक ने खुलासा किया है कि चीन लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में हजारों किलोमीटर अंदर तक घुस आया है। चीन जहां भारतीय सीमा पर ऐसे हमले कर रहा है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी चुनाव प्रचार में मस्त हैं। विदेश मंत्री जयशंकर कहते हैं, ‘चीन ने सिर्फ नाम बदले हैं। उससे क्या होगा? अगर मैं आपके घर का नाम बदल दूं, तो क्या वह हमारा हो जाएगा?’ भारतीय मंत्री का यह तर्क चीन की घुसपैठ को गंभीरता से न लेने का ही एक तरीका है। इससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की जमीन को लेकर कितने गंभीर हैं। देश में विपक्षियों को हताश करने के लिए मोदी ईडी और सीबीआई की दहशत निर्माण करते हैं। जनता के बहुमत से चुने गए मुख्यमंत्रियों को जेल में डालते हैं। राजनीतिक विरोधियों पर झूठे हमले करते हैं, लेकिन उत्तर पूर्व सीमा से चीन की घुसपैठ के बारे में वे बोलने को तैयार नहीं हैं। मोदी-शाह के भाजपा की देशभक्ति एक ढोंग है। तकरीबन सत्तर साल पहले बातचीत में समुद्र का एक द्वीप श्रीलंका को दे दिया गया था। उसका ठीकरा आज मोदी कांग्रेस पर फोड़ रहे हैं, लेकिन पांच साल पहले चीन ने लद्दाख में घुसकर हजारों मील जमीन निगल ली उस पर वे मौन हैं। मणिपुर में हुई हिंसा में भी चीन का हाथ होने के सबूत सामने आए, लेकिन मणिपुर भारत का अविभाज्य अंग होने के बावजूद मोदी पिछले दो सालों में वहां गए तक नहीं। मणिपुर में युद्ध जैसी ही स्थिति निर्माण हो गई, लेकिन मोदी का मणिपुर पर ध्यान नहीं है। अरुणाचल की ओर वे देखने को तैयार नहीं हैं। कश्मीरी पंडितों का आक्रोश और घरवापसी का वादा वे भूल गए। मोदी युग को अमृत काल कहा जाता है, लेकिन इस तथाकथित अमृत काल में सीमावर्ती राज्यों को जहर पीना पड़ रहा है। २०१४ में मोदी की भाषा तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को दोबारा हासिल कर अखंड हिंदुस्थान के सपने को पूरा करने की थी। आज जो हिंदुस्थान है, उसे भी कुतरने का काम चल रहा है। नरेंद्र मोदी को देश की सीमाओं, अंतरराष्ट्रीय नीतियों, विदेश नीति के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। भले ही अंधभक्तों ने उन्हें ‘विश्वगुरु’ की उपाधि दी है, लेकिन ये गुरु भारत के लिए योग्य नहीं हैं। देश में रोज किसान और जवान मर रहे हैं। देश का भूभाग शत्रु कुतर रहा है और ये विश्वगुरु चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। फडणवीस का कहना है कि मोदी देश का चेहरा बदल देंगे। सच तो यह है कि देश का सुंदर चेहरा मोदी ने बिगाड़ दिया है। उन्होंने गंगा, जमुना, सरस्वती की धारा को गंदा कर दिया। मोदी और उनके लोगों ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश में भ्रष्टाचार की गटर गंगा ही बना दी और राष्ट्रीय सुरक्षा को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। पाकिस्तान को दम देने वाले मोदी चीन की घुसपैठ पर चुप रहते हैं। पुलवामा में ४० जवानों की शहादत संदेह के घेरे में है। इतनी कड़ी सुरक्षा के होते हुए भी ३५० किलो आरडीएक्स पुलवामा में पहुंचा वैâसे? मोदी सरकार इसकी जांच नहीं करा सकी। इसके उलट, मोदी और उनकी पार्टी ने २०१९ के लोकसभा चुनाव में इन ४० जवानों की शहादत का अमानवीय तरीके से राजनीतिक लाभ उठाने का काम किया। फिर इस मामले में मोदी सरकार की संदिग्ध गलतियों पर उंगलियां उठाने वाले जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक को भी अपने साहस की कीमत चुकानी पड़ी। मलिक के पीछे भी मोदी सरकार की जांच एजेंसियां लगा दी गर्इं। राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों पर कड़ी नजर रखने वाली मोदी सरकार ने सीमा पर चीनी गतिविधियों पर आंखें मूंद ली हैं। इसलिए मोदी शासन के दौरान जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश-मणिपुर तक भारत की सीमाएं पहले से कहीं अधिक असुरक्षित, अशांत और अस्वस्थ हो गई हैं। चीन लद्दाख में मीलों मील अतिक्रमण कर रहा है। अरुणाचल प्रदेश में गांवों के नाम लगातार बदल रहे हैं। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री मोदी मुंह पर ताला लगाए बैठे हैं। चीनी ड्रेगन के सामने पूंछ हिलाते हुए बैठे हैं। जनता को ही अब इस ताले और पूंछ को उखाड़ फेंकना होगा।

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