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संपादकीय : मोदी का दत्तक ‘बयान’

प्रधानमंत्री मोदी बेहद संवेदनशील नेता हैं, ऐसा उनके भक्तों का दावा है। खुद मोदी भी कभी-कभार सार्वजनिक कार्यक्रमों में भावुक होते नजर आते हैं। इसलिए भक्तों के दावों में जाने- अनजाने हवा भरती जाती है। अब भी वाराणसी में मोदी वैसे ही भावुक नजर आए। मोदी ने मंगलवार को वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस आवेदन को भरने से पहले, वह कुछ समय के लिए अपनी मां की यादों से भावुक हो गए। उनकी मां का डेढ़ साल पहले निधन हो चुका है। अब तक मोदी अपना नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले अपनी मां का आशीर्वाद लेते थे। इस साल उन्हें खालीपन का एहसास हुआ और उनका मन भर आया। यह बिल्कुल स्वाभाविक है। इसी भावना में बहते हुए मोदी ने आगे कहा, ‘मां के बाद गंगा मेरी मां है और मुझे ‘गंगा मैया’ ने गोद यानी दत्तक लिया है।’ यह तीसरी बार है जब मोदी ने वाराणसी से लोकसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। उन्होंने २०१४ में पहली बार यहां से चुनाव लड़ा था। उस वक्त उन्होंने कहा था, ‘मैं यहां नहीं आया हूं। मुझे यहां लाया गया है। माता गंगा ने मुझे यहां बुलाया है। अब २०२४ के लोकसभा चुनाव के लिए ‘मां गंगा ने हमें गोद (दत्तक) लिया है!’ उन्होंने ऐसा कहा। मोदी का यह दत्तक यानी गोद लिया ‘बयान’ उनकी हमेशा की भावनात्मक राजनीति के अनुरूप है। पहले विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाले मोदी फिर धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों पर फिसल जाते हैं यह पुराना अनुभव है। अब भी कुछ अलग होता नहीं दिख रहा। उन्होंने विकसित भारत के मुद्दे को रोल कर रखा है और धार्मिक-भावनात्मक मुद्दों को छेड़ा है। उन्होंने वाराणसी में गंगा मैया के नाम पर जो अपील की, वह उत्तर प्रदेश की जनता के लिए एक राजनीतिक संदेश है। धार्मिक और भावनात्मक मिक्श्चर में राजनीति का चालाकी से तड़का लगाने में मोदी की कोई सानी नहीं है। वे इस मामले में बहुत होशियार हैं। लोकसभा चुनाव के अब तक चार चरण हो चुके हैं और मतदान के रुझान मोदी की ‘चार सौ पार’ वाली दहाड़ को खोखले साबित करने वाले हैं। मोदी की बार-बार अपील के बावजूद उत्तर प्रदेश और बिहार में मतदान के आंकड़ों में बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली है। उत्तर प्रदेश में चुनाव में न तो राम मंदिर की लहर दिखी और न ही विकसित भारत की। मोदी ने चुनाव के प्रत्येक चरण में अलग-अलग प्रचार हथियार निकाले, लेकिन सभी विफल रहे। दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। इसलिए मोदी को एहसास हो गया है कि यह उनके बस में नहीं रहा है। पिछले हफ्ते मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर में भगवान राम को साष्टांग प्रणाम किया था। अब मंगलवार को उन्होंने वाराणसी से अपनी उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल करते समय ‘गंगा मैया’ की आरती की। ‘गंगा मैया ने मुझे गोद (दत्तक) ले लिया है,’ इस तरह की भावनात्मक अपील उन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता से की। जाहिर है कि यह बयान भी दत्तक यानी गोद लिया हुआ है। मोदी जी, देश की जनता ने २०१४ और २०१९ में आपको बड़ी उम्मीदों से ‘दत्तक’ यानी गोद ही लिया था। प्रचंड बहुमत के साथ आपको देश की बागडोर सौंपी, लेकिन जनता अब निराश हो चुकी है। गंगा मैया ने आपको दत्तक यानी गोद लिया है या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन लोगों ने आपके दत्तक (गोद लिए) बयान को रद्द करने का पैâसला कर लिया है और यह बिल्कुल निश्चित है!

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