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संपादकीय : अब म्यांमार भी घुसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्षद्वीप में किसी मॉडल की तरह किया गया फोटो सेशन या जगह-जगह हो रहे उनके ‘रोड शो’ को देखकर देश की जनता को यह गलतफहमी हो सकती है कि देश के सामने एक भी समस्या नहीं बची और देश की सीमा और वहां की सुरक्षा आदि सब कुछ ‘ऑल वेल’ है। वैसे यह सत्य नहीं है। लदाख से सटे हिंदुस्थान के ४,००० वर्ग किलोमीटर के विशाल भूभाग पर कब्जा करने के बाद भी चीन की हिंदुस्थान में घुसपैठ जारी ही है। पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ का सिलसिला थम नहीं रहा है और अब खबर आई है कि म्यांमार जैसे छटंकी देश ने भी हिंदुस्तान में घुसपैठ की है। थोड़े-बहुत नहीं, बल्कि म्यांमार के लगभग ४१६ सैनिक बिना किसी अनुमति के हिंदुस्तानी सीमा में घुस आए। हालांकि, इन सभी सैनिकों को अब वापस म्यांमार भेज दिया गया है, लेकिन म्यांमार जैसे छोटे- मोटे देश के सैनिकों का हिंदुस्थान की सीमा में घुसपैठ करना, यह बात न तो खुद को ‘चौकीदार’ कहलवाने वाले प्रधानमंत्री के लिए गर्व करने वाली बात है और न ही देश के लिए! हिंदुस्थान के सेनाप्रमुख मनोज पांडे ने खुद इस बात का जिक्र किया है कि हिंदुस्थान-म्यांमार सीमा के पास तीन जगहों पर स्थिति चिंताजनक है। भले ही यह सच है कि म्यांमार के सैनिक हिंदुस्थान की सीमा में घुस आए हैं, लेकिन हमारी सेना तैयार है, ऐसा सेनाप्रमुख ने कहा। लगभग तीन साल पहले सेना द्वारा म्यांमार में आंग सान सू-की की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से म्यांमार में गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। कई म्यांमार संगठनों ने हथियार उठाए हैं और तानाशाही को पैâलाने वाले म्यांमार के सैन्य शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का आह्वान किया है। म्यांमार की सैन्य सरकार दो साल से अपने ही देश के इन विद्रोहियों पर हवाई हमले कर रही है। दो दिन पहले, म्यांमार के सैनिकों ने हिंदुस्थान की सीमा रेखा से सटे सासांग प्रांत के खमपत शहर में एक बड़ा हवाई हमला किया। लड़ाकू विमानों ने कानन गांव पर तीन बम गिराए। इसमें गांव के स्कूल और आस-पास की इमारतों में रहने वाले १७ नागरिकों की मौत हो गई। इस बम हमले में स्कूल के पास के १० घर नष्ट हो गए। ये सब हिंदुस्थान की सीमा के पास हुआ। हालांकि, म्यांमार सरकार ने इन हवाई हमलों से इनकार किया, लेकिन स्थानीय निवासियों ने सैन्य शासन के दबाव के सामने न झुकते हुए दुनियाभर की मीडिया के सामने इन हमलों की सच्चाई को उजागर किया। इस पृष्ठभूमि में हिंदुस्थानी सेनाप्रमुख मनोज पांडे ने शुक्रवार को पत्रकारों को जो जानकारी दी, वह वाकई चिंताजनक है। म्यांमार के कुछ विद्रोही गुट वहां के सीमावर्ती क्षेत्र में भारी दबाव में हैं और ये विद्रोही म्यांमार के सैनिकों से बचने के लिए मणिपुर में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर पहले से ही जातीय संघर्ष के कारण महीनों से जल रहा है। ऐसे समय में जब मणिपुर भीषण हिंसा, अमानवीय हत्याओं, महिलाओं पर होने वाले राक्षसी अत्याचारों के कारण देश का सबसे अशांत द्वीप बन गया है, अगर म्यांमार के सशस्त्र विद्रोही मणिपुर में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं तो यह निश्चित रूप से गंभीर है। इसी वजह से सेना प्रमुख पांडे ने ‘चिंताजनक’ शब्द का प्रयोग जिम्मेदारी से किया होगा। सेना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कॉन्प्रâेंस में सेना प्रमुख मनोज पांडे ने कहा कि हिंदुस्थान-चीन सीमा, खासकर लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति संवेदनशील है। देश की समग्र सीमाओं पर गौर करें तो चीन की लगातार हिंदुस्थान में घुसपैठ जारी है। १३ हॉटस्पॉट से चीन कई चरणों में और बार-बार घुसपैठ करता है। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से हो रही आतंकियों की घुसपैठ रुक नहीं रही है और अब म्यांमार की घुसपैठ ने हिंदुस्थान की चिंता बढ़ा दी है। जहां देश की सीमा पर इतनी चिंताजनक स्थिति है, वहीं ‘मैं चौकीदार हूं’ ऐसा छाती ठोककर कहने वाले प्रधानमंत्री सिर्फ पर्यटन और ‘रोड शो’ करते फिर रहे हैं। प्रभु राम ही अब इस चौकीदार को सद्बुद्धि दें!

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