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संपादकीय : अब मालदीव का युद्ध!

हिंदुस्थान की राजनीति में फिलहाल ‘जोकरगीरी’ ही चल रही है। लोकतंत्र की छाती पर नाचते हुए जो जोकरगीरी चल रही है, वो निंदनीय है। जब से देश और कुछ राज्यों में मोदी-शाह का शासन आया है, राजनीति का स्तर और भाषा दोनों ही गिर गए हैं। बेशक, जो भी हो, हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री की घटिया भाषा में आलोचना करना विदेश के मंत्रियों को शोभा नहीं देता। मालदीव के तीन मंत्रियों ने हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री मोदी की घटिया भाषा में आलोचना की। ‘जोकर’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करने से हिंदुस्थानी आहत हो गए। मालदीव की सरकार ने उन तीनों मंत्रियों को मंत्रिमंडल से निकाल दिया। माना कि प्रधानमंत्री मोदी आत्ममुग्ध नेता हैं। खुद की तस्वीरें, खुद का ही प्रचार और खुद की ही वाहवाही करना उनकी नीति है। मोदी व उनकी फोटो के बीच जो भी आता है, उसे वे खुद हाथ पकड़कर बगल कर देते हैं यह सबने देखा ही है। मोदी एक उत्तम अभिनेता हैं और उनका ‘फोटोसेंस’ बढ़िया है। अगर वे किसी मंदिर में पूजा या आरती के लिए जाते भी हैं तो उनकी नजर भगवान की मूर्ति पर नहीं, बल्कि वैâमरे के ‘एंगल’ पर होती है। कभी मोदी गले में वैâमरा लटकाकर फोटोग्राफी करते हैं तो कभी अपने ही मोबाइल फोन से ‘सेल्फी’ लेते नजर आते हैं। जम्मू-कश्मीर में ‘पुलवामा’ कांड के दौरान, जिसमें चालीस जवान शहीद हुए थे, मोदी जिम कॉर्बेट के जंगल में शूटिंग में मगन थे। भले ही इसके लिए उनकी आलोचना की गई, लेकिन वे परवाह नहीं करते और वैâमरा-फोकस-लाइट्स-एक्शन के सानिध्य में रहते हैं। वे केदारनाथ जाते हैं और वहां की गुफा में तपस्या करते हैं। लेकिन खास बात यह है कि जब वैâमरे उनकी तपस्या की लाइव रिकॉर्डिंग कर रहे होते हैं, उनकी तपस्या भंग नहीं होती। कहने का मतलब यह है कि मोदी लक्षद्वीप गए। वहां के नीले समंदर पर वह ‘आत्ममग्न’ यानी तपस्वी अवस्था में ध्यान कर रहे हैं, अकेले फिर रहे हैं, चिंतन मनन कर रहे हैं, इस तरह की तस्वीरें अनेक ‘मुद्राओं’ में जारी हुर्इं। कुछ वीडियो भी जारी किए गए। मोदी ने लक्षद्वीप में कुछ ऐसे अद्भुत पोज दिए हैं, जिससे कोई कमर्शियल मॉडल भी शरमा जाए और उन पर देशभर के भाजपाई भक्तों ने खूब रिएक्शंस दिए। उनमें से कुछ अंधभक्तों ने तो यहां तक खोज कर दी है कि हाल ही में लक्षद्वीप की खोज हुई और उस खोज के जनक मोदी हैं। लक्षद्वीप समुद्र में कई द्वीपों का एक समूह है, जहां वर्तमान में राष्ट्रवादी कांग्रेस के मोहम्मद पैâजल सांसद चुने गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के लिए यहां कोई जगह नहीं है। मोदी ने यहां कदम रखते ही लक्षद्वीप के विकास के लिए करीब एक हजार करोड़ रुपए के ‘पैकेज’ की घोषणा की। इसे वहां लोकसभा सीट की तैयारी ही कहना होगा। मोदी आए, उन्होंने समुद्र पर चिंतन किया। हजार करोड़ रुपए दिए। लक्षद्वीप से उनका पुराना नाता है बस, इतना ही नहीं कहा। लेकिन उसके बाद भगत मंडली जोश में आ गई और उन्होंने हिंदुस्थान के पर्यटन नीति की घोषणा कर दी। उन भगतगणों ने सोशल मीडिया पर कहा कि मालदीव जाने के लिए लाखों रुपए खर्च करने से बेहतर है कि हम लक्षद्वीप जाएं। जिस पर मालदीव के तीन मंत्रियों ने आलोचना की और हिंदुस्थानियों का मजाक उड़ाया। मंत्री मरियम शिउना ने हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री के लिए ‘जोकर’ जैसे अपशब्द का इस्तेमाल करते हुए मोदी को इजरायल का समर्थक वगैरह कह डाला। एक अन्य मंत्री जाहिद रमीज ने कहा कि हिंदुस्थान हमारा मुकाबला नहीं कर सकता। जैसे ही भारत ने इस पर गुस्सा जाहिर किया, मालदीव के उन तीन मंत्रियों को छुट्टी दे दी गई। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर ‘बायकॉट मालदीव’ नाम से एक अभियान शुरू किया गया और इसकी वजह से बड़ी संख्या में पर्यटकों ने मालदीव के लिए अपने होटल और फ्लाइट की बुकिंग रद्द कर दी। मालदीव में हिंदुस्थान से सबसे ज्यादा पर्यटक जाते हैं और मालदीव की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर है। हालांकि, मालदीव समुद्र में द्वीपों का एक बड़ा समूह है, लेकिन यह देश पूरी तरह से समुद्र में है, जमीन पर नहीं। इसलिए वहां पर कोई उत्पादन नहीं होता। मालदीव एक इस्लामिक रिपब्लिक है और वहां की आबादी पांच लाख से भी कम है। राजनीतिक संकट के समय हिंदुस्थान ने बार-बार उनकी मदद की है, लेकिन हाल ही में मालदीव में चीन प्रभावित राजनीति ने जोर पकड़ लिया है। ये देश चीन के कर्ज के तले दबा हुआ है और इसीलिए ये हिंदुस्थान विरोधी फुत्कार शुरू हो गई है। चीन के युद्धपोत मालदीव के समुद्र में डेरा जमाए हुए हैं और चीन ने नेपाल की तरह मालदीव को भी अपने कब्जे में लेकर उसका दमन करने की नीति अपना रखी है। देश भले ही छोटा है, लेकिन हिंदुस्थान की समुद्री सीमा की रक्षा के लिए मालदीव का महत्व काफी है। लक्षद्वीप के निमित्त से मोदी भक्तों ने मालदीव को चिढ़ा दिया है। मालदीव के मद्देनजर लक्षद्वीप से एक सांसद की सीट पर टिचकी मारी है। अब देश की कई सेलिब्रिटीज ने ‘चलो लक्षद्वीप’ का नारा दिया है। सलमान खान से लेकर जॉन अब्राहम तक कई अभिनेताओं ने अब ‘चलो लक्षद्वीप’ पर जोर दिया है। अब से लक्षद्वीप के समुद्र तटों पर कई देशभक्त एक्टर-एक्ट्रेस आने जाने लगेंगे। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यह सब मोदी की वजह से हुआ है इस तरह का डंका पीटकर वहां के एकमात्र लोकसभा सीट के लिए प्रचार किया जाएगा। मोदी का लक्षद्वीप दौरा ‘सोची समझी’ राजनीतिक रणनीति का ही हिस्सा हो सकता है। २०२४ के सियासी संग्राम में एक-एक सीट मायने रखती है और ‘अबकी बार चार सौ पार’ का लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं, बल्कि मुश्किल है। इसलिए मोदी और उनके प्रचारकों ने लक्षद्वीप की एकमात्र सीट के लिए यह समुद्रीनाट्य रचा। बेशक, जो भी हो, ‘अपशब्दों’ का प्रयोग करके हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री का अपमान करने की निंदा की जानी चाहिए। हम भी धिक्कार… धिक्कार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का अपमान १४० करोड़ हिंदुस्थानियों का अपमान है।

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