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संपादकीय : ‘वन मैन रूल’… तालिबानी कॉकटेल!

सत्ता का स्वाद चखने के बाद अच्छे-खासे लोगों की नीति और मति भ्रष्ट हो जाती है। इसीलिए तो व्यक्ति की पुरानी से पुरानी लत एक बार छूट सकती है, लेकिन सत्ता का नशा एक बार शासकों को लगा तो फिर कुछ भी हो जाए लेकिन सत्ता का सिंहासन उनसे छूटता नहीं है। विश्व के कई देशों में फिलहाल यही ‘ट्रेंड’ चल पड़ा है। ऐसे में ‘कुछ भी हो जाए लेकिन सत्ता नहीं छोड़ेंगे’, इस नए ट्रेंड से भला अफगानिस्तान का तालिबानी शासन वैâसे अपवाद रह सकता है? अफगानिस्तान में सत्ता का फल चख रहे तालिबान सरकार ने एक अर्जेंट प्रेस कॉन्प्रâेंस का आयोजन कर देश की तमाम राजनैतिक पार्टियों पर हमेशा के लिए पाबंदी लगा दी है। तालिबानी सरकार के कानूनी मंत्री अब्दुल हकीम शरेई ने इस संदर्भ वाला फरमान मीडिया के सामने पढ़कर सुनाया। एक झटके में अफगानिस्तान की राजनीति ही समाप्त कर देनेवाले इस फरमान में तालिबानी सरकार ने एलान किया है कि ‘तालिबान में शरियत कानूनी लागू है और शरिया कानून में राजनैतिक पार्टियों को कोई भी स्थान नहीं है। शरिया कानून ही मुस्लिमों की जीवन पद्धति का मुख्य आधार है और राजनैतिक दल इस्लामिक शरिया कानून के खिलाफ होने की वजह से सभी ७० राजनैतिक दलों पर हमेशा के लिए पाबंदी लगाई गई है और भविष्य में भी केवल तालिबान और तालिबान की ही सत्ता अफगानिस्तान में रहेगी। अन्य कोई भी राजनैतिक दल इसके बाद अफगानिस्तान की सत्ता पर नहीं आ सकता। १५ अगस्त को हिंदुस्थान में स्वतंत्रता दिवस मनाते समय ही इसी दिन अफगानिस्तान के तालिबान सरकार ने भी अपनी दूसरी सालगिरह मनाई। दो साल पहले इसी दिन अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुला ली थी। और फिर एक बार तालिबान ने अफगान की सत्ता पर कब्जा जमा लिया। तालिबान पार्ट टू शासक ने देश भर में अपने बंदूकधारी सत्ता की वर्षगांठ मनाने के बाद तुरंत तमाम राजनैतिक दलों पर पाबंदी लगाने की घोषणा कर दी। दो साल पहले जब तालिबान ने दूसरी बार अपनी सत्ता स्थापित की थी, तब अफगानिस्तान के ७० राजनैतिक दलों ने कानून मंत्रालय में अपने-अपने दलों का बाकायदा पंजीकरण करवाया था। उस वक्त तालिबान ने राजनैतिक दलों को मान्यता नहीं दी जाएगी या भविष्य में इन पर पाबंदी लगाई जाएगी, ऐसी कोई बात नहीं कही थी। लेकिन अब अचानक शरिया कानून की धार्मिक ढाल आगे कर तालिबान ने अफगान के सत्ता के सभी सूत्र हमेशा के लिए अपने ही पास रख लिए हैं। तालिबान के ‘तालिब’ इस पश्तू भाषा के शब्द का अर्थ असल में विद्यार्थी होता है, लेकिन इसमें धार्मिक उन्माद और जिहाद की मानसिकता की भांग मिलाकर इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा को माननेवाले तालिबान ने जन्म ले लिया है। इस संगठन का क्रूर चेहरा संपूर्ण विश्व ने देखा है। मामूली सी बात पर महिलाओं को चौराहे पर चाबुक से मारना, किसी का सिर धड़ से अलग करना, किसी का हाथ-पैर बांधकर उस पर गोलियों की बारिश करना और धार्मिक घोष करते हुए उस सजा का वीडियो बनाना, इस तरह का भयंकर कार्य तालिबान ने अपने पहले शासनकाल में किया था। अब दूसरे शासनकाल में भी तालिबान के कदम उसी दिशा में पड़ते नजर आ रहे हैं। सत्ता में आने से पहले तालिबानी नेताओं ने वादा किया था कि महिलाओं से सम्मानपूर्वक बर्ताव किया जाएगा, लेकिन सत्ता में आते ही तालिबान ने कन्याओं का स्कूल बंद कर उनकी हर प्रकार की शिक्षा पर और नौकरियों पर पाबंदी लगा दी। महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश करने पर रोक लगा दी और अब तो महिलाओं को ब्यूटी पार्लर में जाने पर भी पाबंदी लगा दी है। कोर्ट में अब महिलाओं के वकालत करने की मनाई है। बेलगाम, पक्षपाती और जुल्मी शासक तालिबान ने तो अब देश के सभी राजनैतिक दलों पर पाबंदी लगाकर कहर बरपाया है। राज करेंगे तो सिर्फ हम, ‘वन मैन रूल’ की यह विकृति अफगानिस्तान में भी मजबूत हुई है। पहले ही अफगानिस्तान में अफीम की पैदावार भारी पैमाने पर होती है, उसमें भी धर्म का नशा मिलाकर शासन कर रहे तालिबान नाम के भयंकर कॉकटेल ने इस्लामी तानाशाही का एलान किया है। कौन जानता है कि वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर जी रहे अफगानी लोगों को इस ‘बंदूक राज’ से कब मुक्ति मिलेगी!

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