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संपादकीय : सिर्फ गाना ही तो गाया…

महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल में गजब की अराजकता मची है, लेकिन सभी मंत्री अपने भ्रष्ट आचरण पर पर्दा डालकर दूसरों पर कार्रवाई का सोंटा चला रहे हैं। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने तो कमाल ही कर दिया। राजस्व मंत्री ने नांदेड़ जिले के उमरी के तहसीलदार प्रशांत थोरात को इसलिए निलंबित कर दिया क्योंकि उन्होंने सरकारी कुर्सी पर बैठकर गाना गया था। मामला सीधा-साधा है। थोरात नांदेड़ जिले के उमरी में कार्यरत थे। पिछले महीने उनका तबादला लातूर जिले के रेणापुर में हुआ। उमरी तहसील कार्यालय ने ८ अगस्त को तहसीलदार के लिए एक विदाई समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर उमरी के तहसीलदार के प्रशंसक और कार्यालय के सहकर्मी एकत्रित हुए। इस समारोह के अंत में संगीत प्रेमी थोरात ने अपने ही कार्यालय में सरकारी कुर्सी पर बैठकर गाना गाया। बस इस कृत्य को अनुशासनहीनता और अशोभनीय माना गया और थोरात को निलंबित कर दिया गया। अगर इस राज्य में तहसीलदार के खिलाफ सरकारी कार्यालय में कुर्सी पर बैठकर
‘याद करेगी दुनिया, तेरा मेरा अफसाना…’
यह गाना गाने पर, निलंबित किए जाने की कार्रवाई की जा रही है तो बावनकुले ऐसी ही कुर्सियों पर बैठकर पैसा खानेवाले, लोगों को सताने वाले तलाठी, तहसीलदारों और जिला कलेक्टरों को क्या सख्त सजा देने वाले हैं? उमरी के तहसीलदार ने तो सिर्फ गाना गाया और सभी कर्मचारी गाना सुनने के लिए जमा हो गए। अब क्या तहसीलदार का गाना सुनने के लिए इन सभी कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी?
गाने की क्रिया
को गैरजिम्मेदार गतिविधि ठहराते हुए महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, १९७९ की धारा ४(१) के तहत संभागीय आयुक्त ने यह कार्रवाई की। यह कार्रवाई इतिहास में दर्ज होगी। महाराष्ट्र में एक सरकारी अधिकारी को एक सुंदर गाना गाने पर निलंबित कर दिया गया। यानी अब सरकारी दफ्तर में कुर्सी पर बैठकर कोई धुन नहीं गुनगुना सकता। मूड होने पर कोई ठेका नहीं बजा सकता। तहसीलदार पर गाना गाने का आरोप लगाकर उसे निलंबित करने की बजाय उन्हें कड़े शब्दों में समझाइश दी जा सकती थी। ऐसा नहीं हुआ। और भला, यह सब कहां हो रहा है, महाराष्ट्र में? वह राज्य जहां इस समय सबसे अधिक राजनीतिक और प्रशासनिक अनुशासनहीनता बजबजा रहा है। जिस राज्य के मुख्यमंत्री में भ्रष्ट, व्यभिचारी मंत्रियों को अनुशासित करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का साहस नहीं है, वहां एक सरकारी अधिकारी का गाना गाना एक अपराध बन गया है। महाराष्ट्र के चार मंत्री हनी ट्रैप में फंस गए हैं। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एक मंत्री विधानसभा में ‘रमी’ का खेल खेलता है। मुख्यमंत्री ने उन्हें अभय दे देते हैं। दूसरा मंत्री पैसों से भरा बैग खोल ‘चड्डी-बनियान’ पहने सिगरेट फूंकता दिखाई देता है। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। सत्तारूढ़ पार्टी का एक विधायक अध नंगे हालत में विधायक निवास के वैंâटीन कर्मचारी की खुलेआम बेरहमी से पिटाई करता है और राज्य इसकी फुटेज देखता है इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती। एमएमआरडीए के एक टेंडर घोटाले में ३,५०० करोड़ रुपए की चोरी सुप्रीम कोर्ट में पकड़ी जाती है। लेकिन संबंधित टेंडर को लेकर उप मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। फडणवीस सरकार में कई मंत्री हत्या, छेड़छाड़ और भ्रष्टाचार करके मौज में हैं। उनके खिलाफ कोई अनुशासन का डंडा नहीं घूम रहा है। ‘लाडली बहन’ योजना में ‘बहनों’ के नाम पर हजारों पुरुषों ने पैसों का गबन किया और
राज्य के खजाने को
करोड़ों रुपए का चूना लगाया। लगता है हुक्मरानों में उन सभी लाडले भाइयों को हाथ लगाने की हिम्मत नहीं है, लेकिन विदाई समारोह के दौरान एक तहसीलदार को सरकारी नौकरी से इसलिए निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उसने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक गाना गाया था । दरअसल, राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार का बोलबाला है। राज्य में भ्रष्टाचार के मामले में राजस्व और पुलिस विभाग हमेशा से सबसे आगे रहे हैं। ये दो विभाग जनता से सबसे ज्यादा जुड़े हैं और यहीं सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है। फडणवीस की सत्ता आने के बाद भी राज्य में भ्रष्टाचार नहीं रुका है, बल्कि यह बढ़ता ही गया है। चंद्रशेखर बावनकुले ने खुद नागपुर में ६०-७० एकड़ जमीन कौड़ियों के मौल पर हासिल की है न? तब नियम, अनुशासन और कानून कहां थे? महाराष्ट्र में भर्ती से लेकर टेंडर तक घोटाले चरम पर हैं, लेकिन नांदेड जिला के उमरी के तहसीलदार ने सरकारी कुर्सी पर बैठकर गाना क्या गा लिया अनुशासन ही भंग हो गया, यह अजब ही है। जो लोग कहते हैं कि इससे महाराष्ट्र राज्य का अनुशासन बिगड़ गया है, उनका ही संतुलन हर तरह से बिगड़ चुका है। जिस राज्य में मुख्यमंत्री की पढ़ी-लिखी पत्नी गायिका हों, वहां किसी सरकारी अधिकारी के कार्यालय में गाना गाना गंभीर अपराध नहीं माना जाना चाहिए। तहसीलदार ने दफ्तर में नंगा नाच नहीं किया, हंगामा नहीं किया, डकैती नहीं डाली, लोगों पर अत्याचार नहीं किया। सिर्फ गाना ही गाया है न? बावनकुले छोड़ भी दीजिए! इस गलती को माफ ही कर दिया जाना चाहिए!!

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