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संपादकीय : अफगानिस्तान में प्रकोप

हमेशा जान मुट्ठी में रखकर जीनेवाले अफगानिस्तान पर अब प्रकृति का प्रकोप हुआ है। बुधवार की मध्यरात्रि को दो बजे के आसपास अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंप  आया। अफगान के पाकटिका प्रांत के चार जिले इस विनाशकारी भूकंप  में पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गए हैं। एक हजार से अधिक लोग इस भूकंप  में मारे गए। यह संख्या प्राथमिक है। प्रत्यक्ष रूप से मरनेवालों की संख्या इससे बहुत ज्यादा हो सकती है, ऐसा अफगानिस्तान के तालिबानी सरकार के अधिकारियों का कहना है। रिक्टर स्केल पर ६.१ की भयंकर तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र  बिंदु खोस्त शहर से ४४ किलोमीटर दूर था। जमीन के भीतर ५१ किलोमीटर की गहराई में भयंकर हलचल हुई और एक क्षण में कानफाड़ू आवाज के साथ इस भूकंप ने खोस्त से लेकर ५०० किलोमीटर तक के संपूर्ण परिसर को दहला दिया। पाकिस्तान के लाहौर, मुल्तान, क्वेटा शहर तक इस भूकंप का झटका महसूस किया गया। इसी समय मलेशिया में भी ५.१ रिक्टर स्केल का झटका महसूस किया गया। राजधानी क्वालालंपुर से ५५० किलोमीटर दूर केंद्र  बिंदु वाले इस भूकंप से मलेशिया में सौभाग्य से कोई भी जनहानि नहीं हुई। लेकिन अफगानिस्तान में भूकंप ने चार जिलों के सैकड़ों गांवों को बर्बाद कर दिया। भूकंप जब आया तो रात के दो बज रहे थे। गंभीर निद्रा का समय होने की वजह से लोगों को बचने का मौका नहीं मिला। जमीन क्यों हिल रही है, ये महसूस होने के पहले ही घरों की छतें और दीवारें ऊपर गिर पड़ीं और हजारों लोग मलबे के नीचे दब गए। अफगानिस्तान के अधिकांश क्षेत्रों में कच्चे घर हैं। पत्थर और मिट्टी से बनाए गए घरों के कारण जनहानि अधिक बढ़ गई। भूकंप के कारण पत्थरों की दीवार गिरने से परिवार के परिवार जगह पर ही खत्म हो गए। पाकटिका और खोस्त क्षेत्र में असंख्य गांव भूकंप के झटके में तबाह हो गए। जहां देखो वहीं ध्वस्त घरों के मलबे ही दिखाई दे रहे हैं। किसी-किसी गांव की स्थिति इतनी भयावह है कि गिरे हुए मलबे को उठाने के लिए गांव में एक भी व्यक्ति बचा नहीं है। संपूर्ण गांव के मलबे में दब जाने के कारण कौन किसे बचाए, ऐसी विकट स्थिति पैदा हो गई है। इसलिए सरकारी यंत्रणाओं पर मदद और बचाव कार्य की सारी जिम्मेदारियां आन पड़ी हैं। तालिबान सरकार ने हेलिकॉप्टर का उपयोग करके कुछ जगहों पर तुरंत बचाव दलों को भेजा। लेकिन अभी भी कई गांवों में बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। मलबों को हटाने के लिए लगनेवाली यंत्र सामग्री और बचाव कार्य के लिए लगनेवाली कुशल यंत्रणाओं का अभाव होने के कारण घरों के नीचे दबे और फंसे हुए घायलों को सुरक्षित बाहर निकालना यह तालिबान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। संकट की इस विकट घड़ी में अधूरी यंत्रणा के कारण तालिबान ने पूरे विश्व से मदद की अपील की है। उसमें भी भूकंप के ठीक बाद आई मूसलाधार बरसात ने अफगानिस्तान में हाहाकार मचा दिया है। भूकंप ग्रस्त भागों के साथ ही कई जिलों में तूफानी बारिश और बाढ़ का झटका लगा है। इसमें हजारों घर बह गए। पहले भूकंप के झटके में हजारों लोग मारे गए। कुछ ही घंटों बाद बारिश और बाढ़ के कहर में चार सौ लोगों की मृत्यु हो गई। लगातार आई दोनों प्राकृतिक आपदाओं के कारण अफगानिस्तान की जनता लाचार हो गई है। सरकार को एक ही बार में दो मोर्चों पर मदद कार्य के लिए जूझना पड़ रहा है। पूरे ३० हजार लोगों को बाढ़ का झटका लगा है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कई दशकों से युद्ध से मुकाबला करनेवाले अफगानिस्तान में सुल्तानी, आसमानी संकट के साथ-साथ अब पाताल से आए हुए भूकंप के प्रकोप ने भी हाहाकार मचा दिया। हजारों की बलि लेनेवाले भूकंप के अफगानिस्तान से आनेवाली तस्वीरें मन को सुन्न कर देनेवाली हैं। सैकड़ों गांवों को उजाड़नेवाले इस विनाशकारी भूकंप के बाद हजारों लोग बेघर हो गए हैं। जो लोग सौभाग्य से बच गए हैं उनके घर-बार, संसार फिर बनाने के लिए विश्व से मानवता रूपी मदद अफगानिस्तान में पहुंचनी ही चाहिए।

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