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संपादकीय : चंद्रयान से प्रचार करें तब भी…

मुंबई समेत १४ महानगरपालिकाओं का चुनाव कब होगा ये अब ब्रह्मदेव भी बता सकते हैं क्या? यह सवाल ही है। हारने के भय से चुनाव ही नहीं कराना है, ऐसी नई ‘अलोकतांत्रिक’ परंपरा भाजपा और उनके बागी महामंडली में शामिल लोगों ने शुरू की है, ऐसा प्रतीत होता है। लेकिन लोकसभा चुनाव हालांकि समय के पहले ही, यानी दिसंबर महीने में ही कराया जाएगा, ऐसा दावा प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया है। चुनाव के प्रचार के लिए नवंबर-दिसंबर महीने में देश भर के सभी हेलिकॉप्टर्स बुक करने की शुरुआत हो गई है। निजी, छोटे विमान, हेलिकॉप्टर्स की बुकिंग करके अपने राजनीतिक विरोधियों को परेशानी में डालना है। चुनाव प्रचार के लिए कोई भी वेगवान संसाधन विरोधियों को न मिले इसके लिए शुरू हुआ सत्ता का यह दुरुपयोग आपत्तिजनक है। भाजपा के पास उनके समर्थकों के पास असीमित संसाधन संपत्ति है। यह संपत्ति किस तरीके से आती है, इसका एक साधारण उदाहरण मैं देता हूं। ‘चंद्रयान-३’ अभियान का कुल खर्च कितना हुआ? जबकि ६५० करोड़ रुपए और दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेस-वे के तीन किलोमीटर सड़क का खर्च ७५० करोड़ से ऊपर जाने का खुलासा हुआ। फिर बीच में पांच सौ करोड़ का हिसाब कहां गया? वह भाजपा की तिजोरी में गया या भाजपा समर्थित ठेकेदारों की जेब में? यह हुआ केवल ३ किलोमीटर का हिसाब। उस ३ किलोमीटर के पीछे ५०० करोड़ की फावड़ाबाजी करनेवालों ने चुनाव प्रचार के लिए देश में सभी निजी विमानों, हेलिकॉप्टर्स बुक कर लें तो उसमें आश्चर्य वैâसा? फिर भाजपा के सांसद डी. अरविंद ने कहा ही है कि ‘ईवीएम’ का कोई भी बटन दबाओ, वोट भाजपा के पक्ष में ही जाता है। इसका मतलब ऐसा है कि सभी हेलिकॉप्टर्स के साथ लाखो ‘ईवीएम’ भी भाजपा ने बुक कर रखे हैं। उसे लेकर भी उनका अलग खर्च और हिसाब होगा ही। यानी आप कितना भी कुछ भी बुक किए फिर भी इस दौरान मतदाता भ्रष्ट ईवीएम की छाती पर पैर रखकर तानाशाही की पराजय किए बिना नहीं रहेगी। मौजूदा लोकसभा की अवधि २०२४ में समाप्त होते समय मोदी-शाह साल २०२३ में चुनाव क्यों कराएंगे? इसका जवाब सरल है। सरकारी ज्योतिषाचार्यों ने वैसी सलाह दी है। अब ये ज्योतिषी हैं कि तांत्रिक-मांत्रिक ये उन्हें ही पता है। ‘इंडिया’ गठबंधन ने स्पष्ट रूप से वर्ष २०२४ में देश में सत्ता परिवर्तन करने का बीड़ा ही उठा लिया है। यह ‘२०२४’ का बुरा दौर २०२३ का ढलता सूर्य तंत्र-मंत्र, ईवीएम विद्या से नष्ट किया जा सकता है क्या? इस पर अंदरूनी गुट में चर्चा शुरू है। चुनाव २०२४ में करो नहीं तो २०२३ के अंत में करो, मोदी-शाह की कुंडली में राजयोग नहीं और चोरी-चकारी करके ऐसा कुछ करने का प्रयोग किया ही तो वो पूरा मामला उन पर ही पलटेगा। भाजपा की तानाशाही किसी भी परिस्थिति में सत्ता से हटेगी यह तय है। श्रीमती ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में कहा कि भाजपा जब तीसरी बार सत्ता में आई तो लोकतंत्र का पूरी तरह से खात्मा हो जाएगा और तानाशाही लागू की जाएगी। ममता बनर्जी की चिंता जायज है। मोदी-शाह और उनके गुजरात की धनाढ्य मित्रों ने लोकतंत्र का गला कब का घोंट दिया है। साल २०१४ से मोदी सरकार का कदम तानाशाही की तरफ बढ़ने लगा था। वर्ष २०१९ में लोकतंत्र को करीब-करीब वध स्तंभ पर लटकाया और अब २०२४ में डर ये है कि वे वध स्तंभ का बटन दबा देंगे। लेकिन इस देश की चिंता भारत माता को है। भारत माता का मतलब मोदी-शाह-अडानी न होकर १४० करोड़ जनता है। यह जनता २०२४ में तानाशाही प्रवृत्ति को हराकर वध स्तंभ पर पहुंच चुकी लोकतंत्र की प्राण प्रतिष्ठा करेगी। इसलिए ही ‘इंडिया’ गठबंधन ने जन्म लिया है। भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद को दैत्य हिरण्यकश्यप से बचाने के लिए नरसिंह अवतार लिया। हिरण्यकश्यप का अंत नरसिंह ने जिस भयंकर तरीके से किया, वही गति दुनियाभर के सभी तानाशाहों की हुई है। या तो तानाशाहों को देश छोड़कर भागना पड़ा या फिर क्षुब्ध जनता ने उनके राजमहल में घुसकर उनको खत्म कर दिया। क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही नरसिंह का अवतार है। इसलिए २०२४ हो या २०२३, चुनाव कभी भी कराओ, तानाशाही रूपी हिरण्यकश्यप का अंत तय है। ‘इंडिया’ गठबंधन ने देश के वातावरण को झकझोर दिया है। जनता जाग गई है और वह किसी भी झांसे में नहीं आनेवाली है। प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अनुसार, भाजपा ने देश के सभी विमान, हेलिकॉप्टर्स प्रचार के लिए बुक कर दिए हैं। हम कहते हैं, उन्हें जो चाहे वो करने दें (और जो चाहे करें)। यदि वे ‘चंद्रयान-३’ लाकर उस पर सवार होकर भी प्रचार करें तब भी उनकी तानाशाही की पराजय अटल है। उनकी कुंडली में खींचतान कर लाई गई सत्ता योग की हवा निकल गई है। उन्हें राजयोग था ही नहीं। खींच-खींच कर-चोरी कर लाई गई सत्ता का योग था। अब उसका खत्म होना तय है।

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