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संपादकीय : शिवशक्ति-भीमशक्ति …असली महाशक्ति!

महाराष्ट्र में नया राजनीतिक समीकरण अस्तित्व में आया है। प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्ववाली वंचित बहुजन आघाड़ी और शिवसेना ने एक साथ आकर राजनीति के साथ समाजसेवा करना सुनिश्चित किया है और नए राजनीतिक पर्व की ये पहल है। शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के जन्मदिन पर इस नए राजनीतिक गठबंधन की घोषणा हुई और खुद उद्धव ठाकरे ने दादर के आंबेडकर भवन की इमारत में जाकर प्रकाश आंबेडकर के साथ इसकी घोषणा की। इससे पहले भी शिवशक्ति व भीमशक्ति का कुछ प्रयोग महाराष्ट्र में हुआ था, लेकिन महाराष्ट्र की जनता जिस युति की आतुरता से राह देख रही थी, वह युति यानी ‘आंबेडकर-ठाकरे’ का साथ आना है। एक तो महाराष्ट्र की राजनीति व समाजनीति में आंबेडकर-ठाकरे नाम का एक तेजस्वी संघर्ष का इतिहास है। राजनीति की बजाय दोनों परिवारों के पूर्वजों ने समाज की अनिष्ट रूढ़ि, जाति प्रथा के विरोध में संघर्ष किया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर देश के संविधान के रचयिता हैं और आज देश में सभी स्तरों पर संविधान के साथ तोड़-मरोड़ करके राज चलाया जा रहा है। गैर-कानूनी तरीके से प्राप्त की गई सत्ता की डगमगाती कुर्सियां बचाए रखने के लिए संविधान की बैसाखी का सहारा लिया जा रहा है। यह एक तरह की तानाशाही है। देश में राजनीतिक नेतृत्व खत्म करने के लिए ईडी, सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप एड. प्रकाश आंबेडकर ने लगाया और वह सही भी है। इस तानाशाही के खिलाफ लड़ने के लिए किसी को तो दो कदम आगे आना चाहिए था। अब प्रत्यक्ष संविधान रचयिता के वारिस प्रकाश आंबेडकर और उद्धव ठाकरे ने मौजूदा तानाशाही के खिलाफ लड़ने के लिए पहल की है, यह अच्छा हुआ। प्रकाश आंबेडकर द्वारा बनाई गई वंचित बहुजन आघाड़ी को पिछले आम चुनाव में १४ प्रतिशत वोट मिले थे और उसकी वजह से कांग्रेस, राष्ट्रवादी गठबंधन को नुकसान हुआ। आंबेडकर द्वारा रास्ता बदले जाने के कारण इसके आगे वोट विभाजन को टाला जा सकता है और लोकसभा, विधानसभा चुनाव में तानाशाही प्रवृत्ति को पराजित किया जा सकता है। कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं की प्रकाश आंबेडकर के मामले में अलग राय है। ढाई साल पहले शिवसेना का भी इन दोनों पार्टियों के बारे में अलग राय थी और इसके आगे न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत तीनों पार्टियां साथ आर्इं और उन्होंने महाविकास आघाड़ी सरकार चलाई। इसलिए महाविकास आघाड़ी की दोनों कांग्रेस को एड. आंबेडकर को लेकर दिक्कत होने की कोई वजह नहीं है। दिल्ली की सत्ता लोकतंत्र और स्वतंत्रता के सभी मापदंडों को रौंद रही है और अब तो उसने न्यायालय पर भी कब्जा करने की शुरुआत कर दी है। यह देश के भविष्य के लिए घातक है। इस बुलडोजर के नीचे रौंदे न जा सकें इसलिए सभी मतभेद भुलाकर एकता का नारा देना ही विकल्प है। राहुल गांधी ने देश में नफरत यानी द्वेष भावना मिटाने के लिए ‘भारत जोड़ो’ यात्रा निकाली है। उसी भावना से सभी लोगों को जूने-पुराने मतभेद भुलाकर भीमशक्ति के साथ अगला कदम बढ़ाना चाहिए। महाराष्ट्र की स्थिति दिन-ब-दिन विकट होती जा रही है। पैसे से सत्ता खरीदना, उसी सत्ता से फिर पैसा और सत्ता, इस चक्रव्यूह में महाराष्ट्र घुट रहा है। शोषितों और वंचितों की समस्याएं जहां थीं, वहीं हैं। दावोस से निवेश लाने की डींगे हांकी जा रही हैं। लेकिन प्रत्यक्ष रूप से महाराष्ट्र के लघु-मध्यम उद्योगों को सहयोग नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से बेरोजगारी भयानक तरीके से बढ़ गई है। इन सभी मसलों को लेकर आवाज उठानेवाले नेतृत्व को बदनाम करना और बाद में जेल में डाल देना, यही मोदी सरकार की नीति है। श्री आंबेडकर ने एक स्पष्ट राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘हर नेतृत्व का कभी न कभी अंत होगा ही। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी अंत होगा, लेकिन मोदी ने खुद ही अपनी पार्टी का नेतृत्व खत्म कर दिया है। किसी भी नेता को वे उभरने नहीं देते। मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं है!’ श्री आंबेडकर ने आगे महत्वपूर्ण बात कही, ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था कि क्राइसिस के दौरान राजनीतिक नेतृत्व तैयार होते हैं। लिहाजा, महाराष्ट्र या बाहर की क्षेत्रीय पार्टियां खुद का नेतृत्व व संगठन खड़ा करना चाहती हैं तो उन्हें हम मदद करेंगे।’ विवेक, नैतिकता के बल पर राजनीति करने का प्रयास उद्धव ठाकरे के साथ करेंगे, ऐसा श्री प्रकाश आंबेडकर ने घोषित किया। महाराष्ट्र में नैतिकता के अधोपतन व स्वाभिमान के पतन के बीच ‘आंबेडकर- ठाकरे’ शक्ति का उदय हो, यह शुभ संकेत है। शिवशक्ति व भीमशक्ति यही महाराष्ट्र सहित देश की महाशक्ति बने!

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