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संपादकीय : श्री मोदी प्रा. लिमिटेड!

घरानाशाही, परिवारवाद पर प्रधानमंत्री मोदी अब बोलने लगे हैं और उनकी बयानबाजी हास्यास्पद होती है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार को तेलंगाना में थे। वहां उन्होंने परिवारवाद पर बयान देकर अपने विरोधियों पर हमला किया है। कुछ राजनैतिक दल प्राइवेट कंपनियों की तरह चलाए जाते हैं। मोदी ने राजनैतिक घरानों को ‘प्राइवेट कंपनी’ कहा है। इन प्राइवेट कंपनियों का जनता से कोई लेना-देना नहीं है, ऐसा श्री मोदी का मत है। लेकिन सच्चाई ये है कि इनमें से अधिकांश प्राइवेट कंपनियां भाजपा ही चला रही है। तेलंगाना में मोदी ने भारत राष्ट्र समिति और कांग्रेस पर हमला किया। जिनके पास परिवार है, उसके पास भावना है, भावना है अर्थात परिवार है। परिवार रहित लोग भावना शून्य होते हैं। हिंदू संस्कृति और मोदी के नए सनातन धर्म में कुटुंब, परिवार, एकजुट कुटुंब पद्धति को काफी महत्व है, लेकिन मोदी का धर्म अलग है। मोदी तेलंगाना में जाकर परिवारवाद, निजी कंपनियों के दल इस पर तंज कसते हैं, लेकिन विसंगति ऐसी है कि उड़ीसा में नवीन पटनायक, आंध्र में जगनमोहन रेड्डी के राजनैतिक परिवारवाद पर नहीं बोलते हैं। आंध्र और उड़ीसा के परिवारवादी दल किसी प्राइवेट कंपनी की तरह चलाया जाता है और इन कंपनियों ने केंद्र की मोदी सरकार को समर्थन दिया है। इसलिए मोदी परिवारवाद के संदर्भ में कितनी ‘ढोंगी’ भूमिका अपना रहे हैं यह स्पष्ट होता है। उत्तर प्रदेश में मायावती की ‘प्राइवेट’ कंपनी से तार जोड़ने का प्रयास भाजपा कर रही है। ‘प्राइवेट’ कंपनी से गांठ जोड़ने का प्रयास भाजपा कर रही है। ‘इंडिया’ को रोकने के लिए ‘एमआईएम’ इस एक और प्राइवेट कंपनी से छिपे तौर पर साठगांठ उन्होंने की ही है। महाराष्ट्र के बारामती परिवार के अजीत पवार को भाजपा को गोद में बैठाया है। कर्नाटक की एक अन्य प्राइवेट कंपनी देवेगौड़ा कृत जनता दल (सेक्युलर) पार्टी से भाजपा ने गठबंधन घोषित कर एक तरह से परिवारवाद के झंडे को अपना डंडा दिया है। मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक। उनका राजनैतिक परिवार बड़ा है। मुलायम सिंह को मोदी ने ही पद्मविभूषण देकर सम्मानित किया है। जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की ‘पीडीपी’ पार्टी के साथ भाजपा ने काफी समय तक सत्ता का सुख भोगा। यह पार्टी भी परिवारवादी ‘प्राइवेट कंपनी’ की तरह ही थी। परिवारवाद के कांटे तब इस मंडली को क्यों नहीं चुभे? बिहार के रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी परिवारवाद का बेहतरीन नमूना होने के साथ-साथ फिलहाल इस नमूने को भाजपा ने अपने खेमे में लेकर खुद का ढोंग फिर एक बार जाहिर किया है। जीतनराम मांझी की ‘हिंदुस्थानी आवाम मोर्चा’ (हम), मुकेश साहनी की ‘विकासशील इंसान पार्टी’ इन परिवारवादी पार्टियों को भी भाजपा ने अपने साथ ही रखा है। ‘अपना दल’ यह पारिवारिक पार्टी मोदी सरकार में शामिल है। इसलिए परिवारवाद आखिर है क्या, इसे नए सिरे से समझने की आवश्यकता खड़ी हो गई है। मध्य प्रदेश में ‘शिंदे शाही’ परिवारवाद को करीब करने की वजह से ही वहां भाजपा सत्ता में आई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, धर्मेंद्र प्रधान राजनैतिक परिवारवाद के प्रतीक हैं। महाराष्ट्र सहित देश के कई राजघरानों को भाजपा ने राजनैतिक स्वार्थ के लिए घेरकर रखा हुआ है। यह भी एक प्रकार का परिवारवाद ही है। महाराष्ट्र के विखे पाटील की कुटुंबशाही को भाजपा ने समाहित कर लिया। बाजार से लगभग बाहर होने के बावजूद भाजपा में आज मौजूद वरुण गांधी, श्रीमती मेनका गांधी का जो स्थान है, वह उनके परिवारवाद की वजह से ही है न? देश के सर्वाधिक राजनैतिक घराने आज भाजपा में हैं। वह भाजपा के विचार को माननेवाली हैं, ऐसा नहीं है। ईडी, सीबीआई की धमक दिखाकर इन घरानों को भाजपा ने अपने तंबू में लिया है। परिवारवाद के मामले में ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनकी वजह से भाजपा के दांत उनके गले में डाले जा सकते हैं। अमित शाह का परिवारवाद भारतीय क्रिकेट में किस योग्यता के चलते ‘गिल्ली डंडा’ खेल रहा है? यह किसी के शोध का विषय हो सकता है। भाजपा देश की कई संवैधानिक संस्थाओं को खुद की प्राइवेट कंपनी की तरह संचालित कर रही है, जिसका परिणाम देश को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ही आज एक प्रकार से प्राइवेट कंपनी बन गई है। इस कंपनी के असली संस्थापक लालकृष्ण आडवाणी को ठोकर मारकर इस कंपनी पर कब्जा कर लिया गया और पार्टी पर एक तरह से मालिकाना हक स्थापित किया गया। भारतीय जनता पार्टी आज ‘पब्लिक कंपनी’ अर्थात लोगों के सहभाग वाली पार्टी नहीं रही। वह शेयरधारक, पूंजीवादी, व्यापारी, निवेशकों की प्राइवेट पार्टी बन गई है। राहुल गांधी के कहे अनुसार, यह कंपनी ‘हम दो और हमारे दो’ तक ही सीमित रह गई है। इस प्राइवेट कंपनी की न तो कोई नीति है, न ही विचारों का स्तंभ! ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी एक दल न होते हुए एक व्यापारिक केंद्र बन गया है। कांग्रेस, शिवसेना, बीआरएस इनका एक घराना जरूर है, लेकिन इन घरानों ने देश, समाज, किसान, श्रमिक के लिए जो किया है क्या आप पिछले दस सालों में वह कर सके हैं? कांग्रेस के घराने ने ७० सालों में जो कमाया, उन्हें पिछले दस सालों से बेचकर खाना यही आपकी प्राइवेट कंपनी का धंधा बन गया है। कांग्रेस ने सार्वजनिक उपक्रमों की नींव रखी। इस नींव को श्री मोदी प्रा. लिमिटेड कंपनी ने बेचकर खा लिया। तेलंगाना के किसानों की स्थिति देश में बेहतर है। महाराष्ट्र में शिवसेना ने, ‘ठाकरे’ घराने ने सामाजिक, राजनैतिक विरासत का निर्माण किया। शरद पवार का हाथ पकड़कर मैं राजनीति में आया ऐसा कहनेवाले मोदी इन्हीं पर परिवारवाद का तंज कसते हैं। पवार के राजनैतिक परिवार के प्रफुल्ल पटेल और अजीत पवार आज मोदी के साथ हैं। मोदी-शाह की कोई भी वैचारिक, सांस्कृतिक विरासत नहीं है। वे जैसे आए हैं, वैसे ही चले जाएंगे। इतिहास में उनका नामोनिशान भी नहीं रहेगा। अंधभक्तों के शोर-शराबों पर विरासत नहीं टिकती है। इसके लिए जमीन पर और लोगों के मन में बीज बोना पड़ता है। दूसरों के लगाए हुए पौधे उखाड़कर उसमें अपने विचार कैसे डालोगे?

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