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संपादकीय : श्रीरामचरितमानस!

धार्मिक दृष्टिकोण से देश का माहौल तनावपूर्ण होने के दौरान शिवसेना का अयोध्या दौरा आज हो रहा है। भगवान श्रीराम सिर्फ हिंदुस्थानियों के ही नहीं अथवा हिंदुओं के ही नहीं, बल्कि समस्त मानवजाति के लिए आदर्श हैं। श्रीराम को परब्रह्म का अवतार माना जाता है, जो मर्यादा की रक्षा के लिए अवतरित हुए। सत्य, सदाचार, धर्म रक्षा यही उनके अवतार का मुख्य उद्देश्य था। श्रीराम का जीवन ही हिंदुस्थानी संस्कृति का वास्तविक दर्पण है। इसलिए ही ‘रामायण’, ‘रामकथा’ का प्रचार और प्रसार हिंदुस्थानी जनमानस में सर्वाधिक होता है। मातृभूमि ही स्वर्ग है, यह मंत्र प्रभु श्रीराम ने दिया है। ‘जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ है’ यह मार्मिक मंत्र श्रीराम ने ही दिया है। जन्मभूमि श्रीराम को अतिप्रिय थी व श्रीराम हम सभी के आराध्य हैं। एक बार स्वामी श्री करपात्री महाराज से एक भक्त ने पूछा, ‘हिंदुस्थान की संस्कृति और सनातन धर्म की महत्ता का बखान करनेवाले कई ग्रंथ हैं। असंख्य वेद हैं, उपनिषद हैं। पुराण, उपपुराण और स्मृति है। इन सभी का वाचन एक साथ कैसे  किया जा सकता है? ऐसा कौन-सा ग्रंथ है कि जिसे पढ़ने पर संपूर्ण हिंदुस्थानी संस्कृति का दर्शन होगा।’ इस पर स्वामी जी ने कहा, ‘किसी एक ग्रंथ में सनातन धर्म एवं हिंदुस्थानी संस्कृति का दर्शन करना होगा तो भगवान श्रीराम की कथा ‘श्रीरामचरितमानस’ पढ़ो। इस एक ही ग्रंथ से हिंदुस्थान की संस्कृति का दिव्य दर्शन होगा। सनातन धर्म का ज्ञान प्राप्त होगा।’ यह उस ग्रंथ की महिमा नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के चरित्र की महिमा है। ‘श्रीरामचरितमानस’ में स्वयं भगवान श्रीराम अपनी जन्मभूमि के महत्व और महिमा का वर्णन करते हैं। मातृभूमि की रक्षा व प्रेम श्रीराम के इस संदेश का शिवसेना जन्म से पालन करती है। इसलिए ही अयोध्या के प्रत्येक आंदोलन में शिवसेना आगे रही। कई आक्रमणों, हमलों के जख्म सहन करके अयोध्या खड़ी है। अयोध्या ने तमाम हमले झेले हैं। शिवसेना ने भी वही किया है। इसलिए शिवसेना व अयोध्या का एक नाता हमेशा से ही बना रहा है। बाबरी आंदोलन के समय से प्रत्यक्ष राम मंदिर के निर्माण तक हर जगह शिवसेना का कुछ-न-कुछ योगदान रहा ही है। इस छोटे-छोटे योगदान का रामायण में सर्वाधिक महत्व है। छोटा-छोटा योगदान नहीं होता तो रामसेतु का निर्माण नहीं हुआ होता व प्रभु श्रीराम लंका पर चढ़ाई करके रावण प्रवृत्ति पर विजय प्राप्त नहीं कर पाए होते। महाराष्ट्र के रावणों की लंका शिवसेना ने इसी तरह से ध्वस्त की। उद्धव ठाकरे अयोध्या में पहली बार गए तब राम मंदिर का मुद्दा ठंडे बस्ते में पड़ा था। उद्धव ठाकरे हजारों शिवसैनिकों के साथ अयोध्या पहुंचे तब इस ठंडे बस्ते की गांठ खुली। इस समस्या को लेकर सोये कुंभकर्ण  जाग गए और न्यायालयीन कार्रवाई ने गति पकड़ी। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद के रूप में महाराष्ट्र को शिवसेना का मुख्यमंत्री मिला व मुख्यमंत्री के रूप में राम प्रभु का दर्शन करने के लिए श्री उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री की हैसियत से फिर अयोध्या पहुंचे। श्रीराम जन्मभूमि ऊर्जा का एक स्रोत है। बार-बार आते रहें, ऐसी राम जन्मभूमि है। इस राम जन्मभूमि का विवाद अंतत: सर्वोच्च न्यायालय ने हल किया। इसलिए राम जन्मभूमि एक बार फिर राजनीति का अखाड़ा न बने। हिंदू अस्मिता की यह भूमि साढ़े पांच सौ वर्षों के बाद फिर बाबर के आक्रमण से मुक्त हुई व उसके लिए सैकड़ों कारसेवकों को बलिदान देना पड़ा। इसी बलिदान से आज की भारतीय जनता पार्टी खाक से उठी और सत्ता तक पहुंची। परंतु देश में राम राज्य का निर्माण हुआ क्या? दीन-दुर्बलों को इंसाफ मिला क्या? लोगों के चूल्हे जले इतनी आमदनी हो रही है क्या? किसान, मेहनतकशों को उनके पसीने का मुआवजा मिल रहा है क्या? बेरोजगारों के हाथों को काम उपलब्ध है क्या? कश्मीर में हिंदुओं का रक्तपात थम नहीं रहा है। हिंदुस्थानी सीमा से बाहरी लोगों की घुसपैठ जारी ही है और सैनिकों की शहादत बढ़ रही है। इसे कैसा  लक्षण माना जाए? ऐसे कई सवालों के उत्तर अधर में रखकर अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, परंतु प्रभु श्रीराम ऐसे राम राज्य को मान्यता नहीं देंगे। देश का माहौल बिगड़ गया है। हिंदू-मुसलमानों में विवाद की चिंगारी भड़काकर राज करना व चुनाव जीतना यह राम राज्य नहीं है। इससे राम की जन्मभूमि बार-बार विभाजित होगी और हिंसा से छिन्न-भिन्न होगी। राम मंदिर के निर्माण से राम जन्मभूमि में शांति पनपे, राष्ट्र में एकात्मकता रहे, अहंकार नष्ट हो। मानवता की जीत हो। इसी राम राज्य का सपना हमने देखा था। पिता को दिए वचन का पालन करके प्रभु श्रीराम, भ्राता लक्ष्मण, सीता माता सहित चौदह वर्षों के लिए वनवास गए थे। इन चौदह वर्षों में अयोध्या नगरी श्रीराम की बाट जोह रही थी। राजा गए इसलिए राज्य खत्म हो गया, ऐसा नहीं है क्योंकि राम की जन्मभूमि सत्य, ईमानदारी के आदर्शों पर खड़ी है। वही प्रभु श्रीराम का स्वर्ग है। उस स्वर्ग की रक्षा करना शिवसेना का कर्तव्य ही सिद्ध होता है। शिवसेना अयोध्या की भूमि पर जाती है तो इसी उद्देश्य के साथ। आज आदित्य ठाकरे के साथ सैकड़ों शिवसैनिक अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दर्शन करेंगे। उस राम जन्मभूमि से नई ऊर्जा लेकर महाराष्ट्र वापस आएंगे। महाराष्ट्र में राम राज्य का निर्माण करने के लिए यह रामचरितमानस है। विरोधियों को इस पर आलोचना का प्रहार करते रहना चाहिए! राम हमारे साथ हैं!

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