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संपादकीय: बंद करो बेशर्मी!

महाराष्ट्र में `भाजपा’ भारतीय जुआरी पार्टी बन गई है, जबकि उत्तर प्रदेश में `बीजेपी’ में `बी’ का मतलब बेशर्म और `पी’ का मतलब पब्लिसिटी यानी सस्ता प्रचार ऐसा समीकरण बन गया है। आगरा के रहने वाले वैâप्टन शुभम गुप्ता कश्मीर घाटी में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए। कश्मीर में दो वैâप्टन समेत चार जवान शहीद हो गए। चूंकि प्रधानमंत्री मोदी सहित पूरी भाजपा पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के प्रचार में व्यस्त थी, इसलिए वह अपनी संवेदनाएं व्यक्त नहीं कर सके, लेकिन देश शोकाकुल हो गया। शुभम गुप्ता एक युवा सैन्य अधिकारी थे। विडंबना देखिए जब आगरा में उनके घर पर उनकी शादी की तैयारियां चल रही थीं, तब कश्मीर में उनकी शहादत की खबर से घर पर उनके माता-पिता बुुुरी तरह टूट गए। उनकी चीखों से आकाश कांप उठा, धरती कांप उठी, यहां तक कि पत्थर भी रोने लगे। उसी समय उत्तर प्रदेश की हिंदुत्ववादी सरकार के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय एक फोटोग्राफर और वैâमरामैन के साथ ५० लाख का चेक लेकर आगरा में गुप्ता के घर पहुंचे। उस वक्त वैâप्टन शुभम की मां यानी वीरमाता लगभग होश गवां कर करुण रुदन कर रही थीं। घर में जब शोक का माहौल था तो मंत्री महोदय वैâमरे और फोटोग्राफर के सामने ५० लाख का चेक वीरमाता के हाथों में पकड़ाने की कोशिश कर रहे थे और फोटोग्राफर को फोटो खींचने के लिए कह रहे थे। इस पर बेहोशी की हालत में ही वीरमाता गुस्से में बोल उठीं, `मंत्री जी, यह नौटंकी और दिखावा बंद करो। मुझे आपके पैसे नहीं चाहिए। पैसे वापस ले जाओ और मेरे बेटे को वापस ले आओ।’ इस आक्रोश के बाद भी अगर हिंदुत्ववादी सरकार के मंत्री `फोटो’ शूट करते रहे तो क्या कहा जाए? एक युवा अधिकारी कश्मीर में राष्ट्र के लिए वीरगति प्राप्त करता है और उसकी शहादत का इस्तेमाल राजनेताओं द्वारा प्रचार के लिए किया जाता है। तिरंगा में लिपटे गुप्ता के पार्थिव शरीर के घर पहुंचने से पहले ही ५० लाख का सरकारी चेक लेकर उनके घर जाने की कोई वजह नहीं थी। यह कुछ दिनों के बाद भी किया जा सकता था। क्या वर्तमान नव-हिंदुत्ववादी राजनीतिज्ञों को इतना भी भान नहीं होना चाहिए? आखिर क्यों गई शुभम गुप्ता की जान? वेंâद्र सरकार की लापरवाही के कारण कश्मीर में कई शुभमों की जान चली गई है। पुलवामा में जवानों का नरसंहार भी सरकार की निष्क्रियता का ही सबब है। पुलवामा में एक साथ ४० `शुभम’ मारे गए और अब हर दिन एक- दो `शुभम’ शहीद हो रहे हैं, लेकिन सरकार न तो `पुलवामा’ को रोक पाई और न ही शुभम जैसे युवा अफसरों की जान बचा पाई। मोदी सरकार मशगूल है तो सिर्पâ प्रचार में। और तो और जब शहीद शुभम गुप्ता की वीरमाता शोकाकुल थीं, इस बात का ख्याल रखे बिना उनको ५० लाख रुपए की सहायता देने की निर्लज्जता भाजपा के उत्तर प्रदेश के मंत्रियों ने की। पुलवामा नरसंहार के बाद भी भाजपा ने ऐसी ही बेशर्मी की थी। तब भी पुलवामा शहीदों की `फोटो’ और अस्थियां घुमाकर वोट मांगने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। तब चालीस जवान थे, अब केवल चार हैं, लेकिन धरती वही है, जहां हर दिन हमारे जवान शहीद हो रहे हैं। जवानों के शहीद होने पर उनकी शहादत की कीमत लगाकर उनके परिजनों को चेक देते हुए फोटो निकालकर प्रचार पाना यह धंधा आजकल जोरों पर है।शहीद शुभम की मां चेक और फोटो से इनकार कर रही थीं, लेकिन योगी सरकार के मंत्री `फोटो-फोटो’ करते रहे। यह उस शहादत का अपमान है। जब देश को `पनौती’ लगती है तो शासकों की मति इस तरह भ्रष्ट हो जाती है। देशभर में प्रधानमंत्री से लेकर उनके मंत्री तक सभी जन्म से लेकर मृत्यु तक सिर्पâ फोटो प्रचार का जश्न मनाना चाहते हैं। काम का नाम नहीं, सिर्पâ शोहरत के लालच ने इन्हें जकड़ रखा है। विज्ञापन और फोटोग्राफी के अलावा देश में और क्या हो रहा है? अमदाबाद के मोदी स्टेडियम में भारत विश्व कप की जंग हार गया, लेकिन अगर भारत विश्व कप जीतता तो प्रधानमंत्री मोदी विश्व कप अपने हाथों में लेकर कप्तान रोहित शर्मा के साथ खुली जीप में पूरे स्टेडियम का दौरा करते। गुजरात समेत पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी वल्र्ड कप जीतने का श्रेय मोदी को देने वाली थी और इसके प्रचार-प्रसार की तैयारी भी हो चुकी थी। राजस्थान जैसे राज्यों में इस जीत का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए किया जाना था, लेकिन हम हार गए और सारा राजनीतिक उत्सव खटाई में चला गया। शहीद वैâप्टन शुभम की वीरमाता को मदद देने के लिए भाजपा वालों ने `इवेंट’ किया। जहां एक ओर कश्मीर में शहीद हुए एक और वैâप्टन एम. वी. प्रांजल का पार्थिव शरीर शनिवार को अंतिम संस्कार के लिए बंगलुरु लाया गया, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी `तेजस’ फाइटर जेट में `विहार’ कर रहे थे। वैâप्टन शुभम गुप्ता के साथ जो हुआ वह `पुलवामा’ और क्रिकेट विश्व कप के मामले में भी होने वाला था। शहीदों की जलती चिताओं पर राजनीतिक नफा-नुकसान के बारे में सोचने वालों को बेशर्म कहना भी अब देशद्रोह जैसा अपराध माना जाएगा। वैâप्टन शुभम गुप्ता की शहादत केंद्र सरकार की नाकामी है और शुभम के घर पर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्रियों द्वारा किया जाने वाला तमाशा यह बेशर्मी की हद है! वीरमाता ने ही करुण विलाप करते हुए कहा, `यह नौटंकी बंद करो!’

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