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संपादकीय : स्वयंप्रभु की मानसिक बीमारी!

चुनाव खत्म होते ही नरेंद्र मोदी का इलाज करना जरूरी है। मोदी पचहत्तर की उम्र की ओर बढ़ रहे हैं। वे २० घंटे काम करते हैं। यानी सोते नहीं। उन्हें खाने-पीने में भी कोई दिलचस्पी नहीं। इसका असर उनके दिमाग और शरीर पर साफ दिखता है। गोदी मीडिया के चमचे कुछ भी कहें, मोदी भारी दबाव में हैं और भाजपा उन्हें बुरी तरह इस्तेमाल कर रही है। मोदी को एक अच्छे डॉक्टर, मनोचिकित्सक की जरूरत है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘मैं तो ‘अविनाशी’ हूं। मैं काशी का हूं।’ भगवान शंकर को अविनाशी कहा जाता है। जिनका कभी विनाश नहीं होता ऐसे हैं वे अविनाशी। मोदी ने खुद को स्वयंप्रभु शिव शंकर बता दिया है। यह मानसिक तौर पर स्वास्थ्य सही नहीं होने का संकेत है। स्वयंप्रभु ने अपने एक प्रचार प्रवचन में प्रजा से कहा, ‘मैं ८५ करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देता हूं। इसलिए मुझे वोट दें, नहीं तो आपको पाप लगेगा।’ अगर उनके भक्तों को लगता है कि मोदी के ये बयान देववाणी हैं तो भक्तों को भी अपना दिमाग जांच लेना चाहिए। मन का बीमार होना ठीक नहीं। शरीर के रोग ठीक हो सकते हैं। मन की बीमारी ठीक नहीं होती। इसलिए हमें स्वयंप्रभु और उनके भक्तों की चिंता है। प्रभु के गुजरात में राजकोट के एक मॉल के गेम जोन में आग लग गई। उस आग में २६ युवक और १२ बच्चे जलकर राख हो गए। आग में फंसी ये आत्माएं स्वंयप्रभु मोदी की दुहाई दे रही थीं। चूंकि मोदी गुजरात के भगवान हैं, इसलिए संकट के समय गुजरात की जनता उन्हें पुकारेगी, लेकिन जब भक्त आग में खाक हो रहे थे, तब स्वयं प्रभु मोदी ने भक्तों की जान बचाने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग नहीं किया। स्वयंप्रभु को भी इसके लिए पाप लग सकता है, लेकिन ईश्वर के अवतार होने के नाते, वे पाप-पुण्य की सीमा को पार कर सिंहासन पर बैठे हैं। स्वयंप्रभु गरीबों को मुफ्त अनाज देते हैं और बदले में वह वोटों की वसूली करते हैं। क्या भगवान कृष्ण या श्री राम त्रेतायुग में गरीब प्रजा को मुफ्त अनाज देकर अपने सिंहासन की सुरक्षा चाहते थे? क्या राम-कृष्ण को चुनाव लड़कर, चुनाव में हेराफेरी कर, लोगों को मूर्ख बनाकर देवत्व प्राप्त हुआ था? इस पर नए सिरे से शोध करना जरूरी है। क्योंकि मोदी सिर्फ भगवान नहीं बल्कि ‘देवों के देव महादेव’ हैं, उन्होंने एलान किया। दार्शनिक, विचारक रजनीश या ‘ओशो’ ने भी खुद को ‘भगवान’ घोषित किया था और रजनीश के भक्त आज भी उन्हें ‘भगवान रजनीश’ ही कहते हैं। इसलिए मोदी को ‘ओशो’ की तरह ‘भगवान मोदी’ कहकर संबोधित किया जाना चाहिए। ४ जून के बाद भगवान महोदय की पराजय होगी। इसके बाद उनका ‘पूर्व भगवान’ के रूप में उल्लेख करना पड़ेगा। भगवान मोदी अपने भाषण में पहले मंगलसूत्र लेकर आए और बाद में जाते-जाते ‘मुजरा’ लेकर आए। उन्होंने एलान किया कि इंडिया गठबंधन अल्पसंख्यकों के कोठे पर मुजरा करती है। यह पता था कि देवताओं के दरबार में अप्सरा, रंभा, मेनका और उर्वशी देवताओं के मन को रिझाने के लिए नृत्य आदि करती हैं। ऐसी पौराणिक स्वर्ग कथाएं हैं, लेकिन कुल मिलाकर यही लगता है कि स्वयंप्रभु को नृत्य शौक नहीं बल्कि मुजरा अच्छा लगता है। इंडिया गठबंधन सत्ता में आते ही मुसलमानों को आरक्षण देगा। इसलिए उन्होंने घोषणा की कि हिंदुओं को स्वयंप्रभु को वोट देना चाहिए। जब स्वयंप्रभु गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने ७० मुस्लिम जातियों को ओबीसी में आरक्षण दिया था। महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में खुलकर कहा कि हमने ५२ मुस्लिम जातियों में से ‘ओबीसी’ वर्ग को आरक्षण दिया है। इसका मतलब यह निकाला जाना चाहिए कि स्वयंप्रभु मोदी और उनके भक्त देवेंद्र ‘मुजरा’ कर रहे थे। स्वयंप्रभु कहते हैं, ‘मैं बायोलॉजिकल नहीं हूं। यानी मैं मां के गर्भ से पैदा नहीं हुआ। मुझे परमात्मा ने भेजा है। मैं ईश्वर का उपहार हूं।’ इस पर इन स्वयं प्रभु के चमचे ‘वाह… वाह…वाह…’ कहकर तालियां बजाते हैं और ‘प्रभु की जय हो’ कहते हैं। इस पर एक सार्वजनिक सभा में राहुल गांधी ने स्वयंप्रभु से एक नाजुक सवाल पूछा है, ‘आपको ऐसा महसूस कब होता है कि आप भगवान है यानी सुबह होता है, शाम को होता है या नींद में यानी स्वप्नावस्था में होता है?’ राहुल गांधी इस तरह स्वयंप्रभु मोदी का मजाक उड़ाते हैं। राहुल गांधी ने मोदी को सचमुच पप्पू कर दिया है और मोदी चुनाव के दौरान पप्पू अवस्था को प्राप्त हो गए हैं। यही ‘पप्पू’ अवस्था अविनाशी है। मोदी अविनाशी अवस्था में पहुंच गए हैं। मोदी की सेहत ठीक नहीं, लेकिन परवाह किसे? उन्हें मानसिक रोग हो गया है। उन्हें आराम और इलाज की जरूरत है। चूंकि मोदी का घरसंसार और रिश्तेदार कोई नहीं है, इस उम्र और मानसिक स्थिति में उनकी परवाह कौन करेगा? ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको मोदी ने ठगा नहीं। इसलिए स्वयंप्रभु की स्थिति में पहुंचकर भी मोदी अकेले हैं। वे मानसिक रूप से कमजोर हो गए हैं। कमजोर मानसिक स्थिति के व्यक्ति को अजीब-अजीब सा आभास होता है। खुद के बारे में उनके मन में भ्रामक कल्पनाएं आकार लेती हैं। मोदी का अविनाश उनमें से एक प्रकार है। अगर ४ जून के बाद भाजपा बची रही तो उन्हें मोदी की मानसिक बीमारी का ख्याल रखना होगा। कम से कम पतंजलि के रामदेव बाबा को स्वयंप्रभु के उपकारों को मानकर आगे आना चाहिए, लेकिन अंत में…
‘जन पळभर म्हणतील हाय हाय,
तू सत्तेवरून जाता…
राहील कार्य काय?’
यही अवस्था स्वयंप्रभु की होगी!

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