मुख्यपृष्ठनए समाचारसंपादकीय : पाकिस्तान के शांति की ‘पुंगी’... सबक सीखना है!

संपादकीय : पाकिस्तान के शांति की ‘पुंगी’… सबक सीखना है!

धर्म के नाम पर हिंदुस्थान से टूटकर बाहर निकला पाकिस्तान आज अन्न के एक-एक दाने के लिए मोहताज हो गया है। पूरे पाकिस्तान पर आर्थिक दिवालिएपन, महंगाई, अनाज की कमी और भुखमरी का संकट मंडरा रहा है। फिर भी पाकिस्तान की दुम के अभी भी सीधे होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। चारों ओर से आर्थिक परेशानियों में फंसने के बाद पाकिस्तान को अचानक हिंदुस्थान से दोस्ती करने की हिचकी आई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने दो दिन पहले एक आश्चर्यजनक बयान दिया। ‘पाकिस्तान को हिंदुस्थान के साथ शांति चाहिए और इसके लिए हिंदुस्थान के साथ गंभीर एवं ईमानदारी के साथ चर्चा करने को हम तैयार हैं’, ऐसा प्रधानमंत्री शरीफ ने ‘अल-अरेबिया’ नामक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में कहा। प्रधानमंत्री शरीफ ने हिंदुस्थान के साथ सिर्फ चर्चा और दोस्ती का ही प्रस्ताव रखा ऐसा नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच चर्चा करवाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात मध्यस्थता करे, ऐसी विनती भी शरीफ मियां ने की। उस पर यहां भी शरीफ ने मजहब का कार्ड खेला ही। ‘संयुक्त अरब अमीरात के शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान के हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अच्छे संबंध हैं इसलिए हमारे मुस्लिम भाई होने के नाते शेख मोहम्मद को हिंदुस्थान व पाक के बीच मध्यस्थता करके चर्चा में मदद करनी चाहिए’, ऐसी प्रार्थना भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने की। पाकिस्तान के किसी भी शासक द्वारा आज तक नहीं कही गई, ऐसी हिंदुस्थान की परिक्रमा करनेवाली बातें शाहबाज शरीफ ने अमीरात के अध्यक्ष के समक्ष और समाचार चैनलों के समक्ष साक्षात्कार में कहीं। हिंदुस्थान के साथ हुए तीन युद्धों की याद दिलाते हुए शाहबाज शरीफ बोले, इन युद्धों से हमने अच्छा सबक सीखा है। लेकिन अब हमें अमन के साथ जीना है। हमें पाकिस्तान की गरीबी को खत्म करना है। हमारी जनता को अच्छी शिक्षा, बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधा और पाकिस्तान के बेरोजगार युवकों को रोजगार देना है। इसके लिए कश्मीर सहित तमाम मुद्दों पर ईमानदारी पूर्वक चर्चा करने की हमारी तैयारी है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी हमारा शांति और मित्रता का संदेश है। तथापि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा शांति व चर्चा का यह प्रस्ताव कितना ईमानदार और गंभीर था, यह अगले २४ घंटों में ही साफ हो गया। प्रधानमंत्री शरीफ के उक्त दो भागों वाले साक्षात्कार को पाकिस्तान के ‘डॉन’ नामक समाचार पत्र ने भी प्रकाशित किया और पाकिस्तान में शरीफ की चारों ओर से आलोचना होने लगी। सबक सीखने की बात करके और चर्चा के लिए गुहार लगाकर शरीफ हिंदुस्थान के समक्ष घुटने टेक रहे हैं, ऐसा शोर वहां के विपक्षी दलों व पाकिस्तानी मीडिया द्वारा मचाते ही प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ अपने बयान से सीधे पलट गए। शरीफ के साक्षात्कार का सनसनीखेज वीडियो होने के बावजूद प्रधानमंत्री ने बयान का गलत अर्थ लगाए जाने संबंधित स्पष्टीकरण देनेवाली विज्ञप्ति अपने कार्यालय के मार्फत जारी कर दी। जब तक हिंदुस्थान कश्मीर को पूर्ण स्वायत्तता नहीं देता, रद्द किया गया अनुच्छेद-३७० दोबारा लागू नहीं किया जाता, तब तक हिंदुस्थान से चर्चा असंभव है। ऐसी पलटी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मारी। चौबीस घंटे के अंदर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने खुद के द्वारा बजाई गई चर्चे की पुंगी को तोड़ दिया क्योंकि कुछ भी हो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को हिंदुस्थान के संबंध में स्वेच्छा से एक भी शब्द बोलने का अधिकार ही नहीं है, ऐसा संदेश इससे गया है। शरीफ मियां के चौबीस घंटों में ये दो परस्पर विरोधी बयान सुनकर यूएई के राष्ट्रप्रमुख भी उलझन में पड़ गए होंगे। पाकिस्तानी जनता की दाने-दाने के लिए हुई दुर्दशा, तबाह हुई अर्थव्यवस्था और राष्ट्र के पतन का खतरा आंखों के समक्ष दिखने के कारण प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने हिंदुस्थान के साथ मैत्री का जो प्रस्ताव रखा, उसमें कुछ भी हर्ज नहीं था। परंतु सेना और विरोधियों के दबाव के आगे शरीफ का निबाह नहीं हुआ। ‘हमने सबक सीखा है’ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के यह तीन शब्द चौबीस घंटों के अंदर हवा में लुप्त हो गए। इसका अर्थ एक ही है… पाकिस्तान को अभी सबक सीखना है!

अन्य समाचार