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संपादकीय : यही है बालासाहेब का सपना!

महाराष्ट्र में शिंदे और फडणवीस गुट की सत्ता आई। लेकिन राज्य में कानूनन सरकार स्थापित हुई क्या? यह सवाल जनता के मन में उठने लगा है। सरकार के नाम पर मनमानी ही चल रही है। मुख्यमंत्री की हैसियत से श्री फडणवीस जितने समर्थ और सयाने थे वह प्रतिष्ठा शिंदे गुट के साथ बरबाद होती नजर आ रही है। राज्य की समस्याओं पर वे बोलते नहीं, बोलते हैं तो सिर्पâ शिवसेना को लेकर। शिवसेना को तोड़ने के बाद भी उनके मन में शिवसेना को लेकर डर है। उनकी कलाई पर शिवसेना ही बैठी है। फडणवीस मुंबई में दही-हंडी फोड़ते रहे। उन्होंने शिवसेना से स्पर्धा करने का प्रयास किया। लेकिन उसी दौरान ‘मुंबई पर २६/११ की तर्ज पर आतंकी हमला करेंगे, मुंबई को तबाह कर देंगे’ ऐसी धमकी आतंकवादियों द्वारा दिए जाने की वजह से मुंबई सहित महाराष्ट्र खौफजदा हो गया। दही-हंडी का आनंदोत्सव किसे नहीं चाहिए? सभी को चाहिए। परंतु सर सलामत तो पगड़ी पचास! दो साल तक उत्सव पर पाबंदी थी तो ऐसा पिछली सरकार के शौक के कारण नहीं था। कोरोना के कारण मोदी साहेब ने ही पाबंदी लगाई थी न? अब कह रहे हैं कि हमारे राज्य में उत्सव बंदी नहीं है। देवेंद्र जी, राज्य का स्वास्थ्य ठीक-ठाक करके, लगभग कोरोना मुक्त ही करके राज्य आपको सौंपा गया है। परंतु बीते दो दिनों के उत्सव के बाद तस्वीर कैसी है। दही-हंडी के एक ही दिन कोरोना के १,५०० मरीज बढ़ गए हैं। संक्रमण बढ़ने लगा है। मुंबई में सामान्यत: छह हजार कोरोना मरीज इलाज करा रहे हैं। इसे कैसा  उत्सव कहा जाए? ठंडी बुखार, स्वाइन फ्लू कहर बरपा रहा है। विदर्भ में ठंडी बुखार से लोग मर रहे हैं। मुख्यमंत्री के ठाणे में स्वाइन फ्लू से १७ लोगों की मौत हो गई और आपको पड़ी है मुंबई महानगर पालिका की! फडणवीस ने दो दिन पहले ‘बालासाहेब के लिए भाजपा को वोट दें!’ ऐसे आह्वान किया। इस पर हम कहते हैं, ‘बालासाहेब के नाम पर वोट क्यों मांगते हो? आपका वह मोदी पर्व, मोदी का तूफान शांत हो गया क्या?’ मुंबई महानगरपालिका में इन लोगों को शिवसेना को पराजित करना है और शिवसेना को परास्त करने के लिए भी बालासाहेब के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। मुंबई का महापौर इन्हें भाजपा की ही अर्थात दिल्लीश्वरों की पसंद के अनुसार बनाना है तथा शिंदे गुट की इसे स्वीकृति है। आप ठाणे लूटो, हम मुंबई दबोचते हैं, ऐसी भेड़िया शाही वाला यह गठजोड़ हुआ नजर आता है। उस पर बालासाहेब का नाम लेकर मुंबई से बेईमानी की जा रही है। श्री फडणवीस कहते हैं, हम असली शिवसेना के साथ हैं। लोग जिन्हें बागी, गद्दार कहते हैं ऐसे लोग फडणवीस को ‘असली’ वगैरह लगते होंगे तो इस देश का, कुल मिलाकर हिंदू संस्कृति का कुछ ठीक नहीं है। अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी युग की भाजपा आज बची है क्या? वाजपेयी की भाजपा वचन और ईमान का पालन करनेवाली थी। उस भाजपा का वंश तो छोड़े, अंश भी शेष नहीं बचा है। इसलिए हमने उस भाजपा का साथ छोड़ा और अपनी अलग हिंदुत्व की राह पर निकल पड़े। हमने हमारी राजनीतिक भूमिका बरकरार रखी। हम हिंदुत्ववादी हैं, भाजपा के गुलाम नहीं। हम महाराष्ट्र के निष्ठावान सेवक हैं, दिल्ली के चरणदास नहीं। हमारी हिंदुत्व निष्ठा और महाराष्ट्र के प्रति स्वाभिमान संदिग्ध है। ट्रेन में बैठे लोगों को पेड़ एवं पर्वत दौड़ते प्रतीत होते हैं। लेकिन असल में पेड़ एवं पर्वत दौड़ते नहीं हैं। वे जहां हैं वहीं रहते हैं। शिवसेना मतलब सह्याद्रि की ऊंची चोटी ही है। चूहों के लिए वहां तक पहुंचना संभव नहीं है। श्री फडणवीस हिचकी की तर्ज पर बालासाहेब के नाम का जप कर रहे हैं। क्या तो कह रहे हैं, ‘मुंबई महापालिका में भाजपा को वोट दें। हम बालासाहेब का सपना साकार करेंगे।’ कैसा  यह स्वांग है? बालासाहेब ने ढोंग का सदैव तिरस्कार किया। लेकिन इन मूर्खों को बालासाहेब सचमुच समझ में आए क्या? बालासाहेब का कौन-सा सपना आप साकार करनेवाले हैं। शिवसेना में फूट  डालकर और उसके बल पर मुंबई पर से भगवा उतारने का तुम्हारा सपना, कोई बालासाहेब का सपना हुआ क्या? भूमिपुत्र और जनता आपके ढोंग और दिखावे पर थूकती है! फडणवीस आदि नेता बालासाहेब के सपने को दिल से लगाकर बैठे हैं। २०१४ में शिवसेना से युति तोड़ते समय इन महामंडलेश्वरों को बालासाहेब याद नहीं आए। २०१९ में मुख्यमंत्री के पद को लेकर दिया गया वचन तोड़ते समय भी इन्हें बालासाहेब का स्मरण नहीं हुआ। अब बड़े आए बालासाहेब का सपना साकार करने! फडणवीस की बातें फरेब और लोमड़ी के खाल जैसी हैं। मुंबई-ठाणेकरों को सावधान रहना चाहिए। राज्य में सिर्पâ मनमानी चल रही है। सत्य सिर्फ  यही है कि मुंबई से मराठियों की एकजुटता खत्म करनी है और इसके लिए शिवसेना पर प्रहार पर प्रहार करना है। बालासाहेब का सपना आदि भाजपा के मुंह की बात सिर्फ  साजिश है। ये लोग अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी जैसे माई-बापों को भूल गए, वे बालासाहेब का सपना क्या साकार करेंगे। दुनिया में उगते सूर्य को अघ्र्य देनेवाले कई लोग हैं। चेहरे की पूजा करनेवालों का दुनिया में कोई ठिकाना नहीं होता है। लेकिन शिवसेना मतलब जनता की शक्ति है। यह शक्ति कमजोर न हो इसलिए हम छटपटा रहे हैं। यही बालासाहेब का सपना है। शिंदे गुट को मुख्यमंत्री का पद साबुन की झाग है। महाराष्ट्र में गुस्सा है, चिढ़ है। हमने शिवसेना के उप नेताओं को महाराष्ट्र में भेजा है। आदित्य पूरा महाराष्ट्र घूम रहे हैं। लोगों का जबरदस्त प्रतिसाद मिल रहा है। जल्द ही हम खुद पूरे महाराष्ट्र का दौरा करनेवाले हैं। गद्दारों को उनकी जगह दिखाएंगे ही, साथ ही शिवसेना को तोड़नेवालों को उन्हीं की जमीन में गाड़ कर दिखाएंगे, यही बालासाहेब का सपना है। शिवराय का महाराष्ट्र है ऐसा मुंह से बोलना और कृति औरंगजेब वाली करना। ऐसा धंधा नहीं चलेगा। मुंबई को निगलने का तुम्हारा सपना शिवसेना पूरा नहीं होने देगी, यही बालासाहेब का सपना है! घोड़ा मैदान दूर नहीं है। तब तक शिंदे गुट को तेल मालिश करने दो।

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