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संपादकीय: तुतारी बजानी ही होगी!

आज १ जनवरी है, नए साल का पहला दिन! रविवार यानी ३१ दिसंबर की मध्य रात्रि को दुनिया भर में लोगों ने खत्म होते वर्ष २०२३ को अलविदा कहा और हर्षोल्लास के साथ नए साल का स्वागत किया। नए साल २०२४ का शानदार आगमन हुआ। हर साल एक आम आदमी नए साल का स्वागत तहे दिल से करता है, इस बात का हिसाब-किताब न करते हुए कि पिछले साल क्या अप्रिय बातें हुर्इं, उसके हिस्से में क्या दुख आए, इस उम्मीद के साथ कि नए साल में कुछ अच्छा जरूर होगा। २०२३ की आखिरी रात भी अपवाद नहीं थी। गांव-देहातों से लेकर महानगरों तक हर तरफ नए साल का स्वागत धूमधाम से किया गया। घरों और सोसायटियों में थर्टी फस्र्ट की पार्टी जोर-शोर से मनाई गई। संकट, प्रश्न, कठिनाइयां, समस्याएं यह सब तो मनुष्य के पैदा होते ही उससे जुड़ जाती हैं। लेकिन इसके चलते लोग जीना नहीं छोड़ते। हालांकि, खुशी के पल कम होते हैं, लेकिन उन्हें बार-बार दोहराकर इंसान खुशी का जश्न मनाने का एक भी मौका नहीं छोड़ता। इंसान पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश करता ही रहता है।
‘जुने जाऊ द्या मरणालागुनी,
जाळुनी विंâवा पुरुनी टाका,
सडत न एक्या ठायी ठाका,
सावध! ऐका पुढल्या हाका…’
यह बात कवि श्रेष्ठ केशवसुत ने अपनी सुप्रसिद्ध कविता ‘तुतारी’ में कही है। पिछले वर्ष में जो कुछ भी गलत हुआ, उसे भूलकर नए वर्ष में नवप्रवर्तन की तुतारी बजानी चाहिए। पिछले साल कई अच्छी और बुरी घटनाएं घटीं। अप्रैल २०२३ में जनसंख्या के मामले में हिंदुस्थान ने चीन को पछाड़ दिया। तकरीबन एक सदी तक चीन जनसंख्या रैंकिंग में पहले स्थान पर था। लेकिन १४३ करोड़ की जनसंख्या को पार करते हुए भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है, ऐसी घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने की। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘चंद्रयान-३’ ने सफल लैंडिंग कर जो इतिहास रच दिया, वह २०२३ में भारतीय वैज्ञानिकों का देश को सबसे बड़ा उपहार था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कहें तो रूस व यूव्रेâन और फिर इजराइल एवं हमास के बीच युद्ध में जो नरसंहार हो रहा है, वह किसी भी संवेदनशील दिमाग को सुन्न कर देने वाला है। दुर्भाग्य से, पिछले साल के अंत तक उसका कोई समाधान नहीं निकला। कम से कम नए साल में ये युद्ध और रोज-रोज होने वाली मौतें बंद होनी चाहिए। जहां तक ​​हिंदुस्थान की बात है तो साल के आखिरी महीने में राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर बड़ा राजनीतिक माहौल बना। नए साल के पहले महीने में अयोध्या में भगवान रामचंद्र के मंदिर का उद्घाटन हो रहा है। लेकिन यह समारोह भक्ति से ज्यादा राजनीतिक इवेंट में ही उलझा हुआ है। अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, यह निश्चित रूप से देश भर के सभी हिंदुओं के लिए गर्व और खुशी का क्षण है। लेकिन केवल राजनीति के लिए राम नाम जपना और राम राज्य की अवधारणा को तिलांजलि देना ठीक नहीं है। मणिपुर की सड़कों पर हुआ महिलाओं का अपमान शासक खुली आंखों से देखते रहे। ओलिंपिक विजेता महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के खिलाफ प्रदर्शन किया। इन दोनों घटनाओं पर हुक्मरानों के मुंह से एक ‘शब्द’ तक नहीं निकला। सरकार की यह चुप्पी राम राज्य की कौन सी अवधारणा में बैठती है? पिछले साल ऐसे कई मामले देखने को मिले, जहां सरकार के खिलाफ बोलनेवालों को जेल में डाल दिया गया, भ्रष्ट नेताओं को सरकारी तंत्र द्वारा डरा-धमका कर सरकार की पार्टी में लाया गया। नए साल में आम चुनाव हैं। इसलिए अगले तीन-चार महीनों में इस प्रकार के मामलों में अधिक उछाल दिखाई देंगे। २०२३ के अंत से पहले पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। मिजोरम के अलावा, भाजपा तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता में आई, जबकि कांग्रेस ने तेलंगाना में जीत हासिल की। इस नतीजे के बाद केंद्र के सत्ताधारी इस भ्रम में जी रहे हैं कि उन्होंने लोकसभा चुनाव ही जीत लिया है। दरअसल, इन चारों राज्यों में पड़े कुल वोटों पर नजर डालें तो कांग्रेस को ४ करोड़ ९९ लाख ६९ हजार ४६२ वोट मिले, जबकि भाजपा को ४ करोड़ ८१ लाख २९ हजार ३२५ वोट मिले। कांग्रेस को भाजपा से ९ लाख ४० हजार १३७ वोट ज्यादा मिले। मतलब साफ है, इंडिया गठबंधन ने २०२४ के चुनाव के लिए भाजपा के सामने जबरदस्त चुनौती खड़ी कर दी है। जहां तक ​​महाराष्ट्र की बात है तो २०२२ और २३ दोनों ही साल ‘धोखे’ और ‘खोखे’ के रहे। एक गैर-संवैधानिक सत्तांतरण के बावजूद, वह सरकार ढलते वर्ष में भी जारी रही। नए साल के पहले महीने में ही ‘ईडी’ सरकार जा सकती है; लेकिन लोकतंत्र का जो चीरहरण लोगों को देखना पड़ा, उसका क्या? वर्तमान शासकों ने बीतते साल में जनता और देश के सामने कई सवाल खड़े किए हैं, जिसका जवाब आने वाले साल में पूछना ही पड़ेगा। हर किसी को नए साल में पिछले साल के पुराने वूâड़े-कचरे को पेंâककर महाराष्ट्र और देश में एक नया निर्माण करने के प्रबल आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा। केशवसुत के कहे अनुसार देश को नई तुतारी बजानी ही होगी!

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