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संपादकीय : प्रधानमंत्री का स्वागत है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ घंटों के लिए मुंबई दौरे पर आ रहे हैं और इन कुछ घंटों में वे मुंबई के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेंगे, ऐसा बताया गया‌ है। सरकार की ओर से उसी प्रकार का विज्ञापन दिया गया है। प्रधानमंत्री का ठीक है, लेकिन मुंबई के भविष्य के और भाग्योदय की चिंता भाजपा को कब से होने लगी, यह सवाल ही है। ‌मुंबई का भाग्योदय मराठी लोगों ने अपने श्रम से किया और उसी मुंबई की लूट पर दिल्लीश्वरों की इमारतें खड़ी हुईं। मुंबई का भविष्य व भाग्योदय का निर्माण १०५ हुतात्माओं ने किया, उसे लूटने का प्रयास नहीं किया तो मुंबई पर उपकार होगा। इसलिए प्रधानमंत्री मुंबई के उज्ज्वल भविष्य के लिए अवतरित हो रहे हैं, यह प्रचार झूठा है। वे अपनी पार्टी के प्रचार और क्या मुंबई से शिवसेना का भगवा उतारा जा सकता है? इस भविष्य के विचार से आ रहे हैं। प्रधानमंत्री को इसी मकसद के लिए मुंबई बुलाया गया है। प्रधानमंत्री के शुभ हाथों से महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का लोकार्पण, भूमिपूजन आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए भाजपा ने मुंबई शहर को अपने झंडे से सजाया है। इसमें कहीं-न-कहीं मिंधे गुट ने अपना अस्तित्व दिखाने का निरर्थक प्रयास किया, लेकिन मगरमच्छ ने मेंढक को निगल लिया हो, उसी तरह ये गुट निगला गया है और मगरमच्छ के जबड़े में जाते हुए मेंढक के आखिरी बार टर्राने की तस्वीर दिखाई दे रही है। इस दौरे के मौके पर मुंबई में लगाए गए कटआउट्स में बालासाहेब से ज्यादा भाजपा नेताओं के कटआउट्स बड़े दिखाई दे रहे हैं। खुद को बालासाहेब की शिवसेना बतानेवाले इस पर क्यों चुप्पी साधे बैठे हैं? मुख्यमंत्री शिंदे वैश्विक निवेशकों के सम्मेलन के लिए विदेश में थे। वे भी अपना दौरा बीच में छोड़कर मुंबई लौट आए। बताया जाता है उनका मुंबई हवाई अड्डे पर उनके गुट ने भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री आते समय एक लाख करोड़ रुपए का औद्योगिक करार जेब में लेकर आए। उन समझौतों का स्वागत तभी किया जाना चाहिए जब वे धरातल पर उतरें। यानी क्या यह सरकार तब तक टिकेगी? यह भी सवाल है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री भी मुंबई आकर बड़ा तोहफा देंगे। ऐसी अफवाह उड़ाई गई। प्रधानमंत्री आएंगे तो घोषणा आदि करेंगे ही। वह उनका अधिकार और स्वभाव धर्म है। प्रधानमंत्री नहीं देंगे तो कौन देगा? प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर मुंबई में कड़ी नाकाबंदी की गई है। यह प्रधानमंत्री की सुरक्षा का मामला है। इसलिए जब तक प्रधानमंत्री मुंबई में हैं, तब तक मुंबई के आसमान से एक तितली भी नहीं उड़ेगी और रास्ते भी बंद रहेंगे। इस स्थिति में प्रधानमंत्री का लोकाभिमुख कार्यक्रम वैâसे होगा? मुंबई में प्रधानमंत्री जिन विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन, लोकार्पण आदि करने जा रहे हैं, उनमें से ज्यादातर परियोजनाएं तब आगे बढ़ीं, जब महानगरपालिका में शिवसेना की सत्ता थी। इसलिए शिवसेना द्वारा किए गए नागरिक कार्यों का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री मुंबई आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी भले ही इस काम का श्रेय लेने की कोशिश करे, लेकिन जनता सब जानती है। यानी देखिए, भांडुप के एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का लोकार्पण प्रधानमंत्री करनेवाले हैं। इस अस्पताल के संबंध में वचन शिवसेना ने अपने वचननामे में दिया था और २०१७ में ही इस काम को पूरा करने के लिए १५० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। पिछले १०-१२ वर्षों से मुंबई सीवरेज परियोजना की प्लानिंग चल रही है। विभिन्न अनुमतियों, केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की बाधाओं को दूर करने के लिए महानगरपालिका इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मई २०२२ में इस काम की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ‘वर्क ऑर्डर’ दिया गया और अब सत्ता परिवर्तन के बाद उसी परियोजना का भूमिपूजन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। सवाल श्रेयवाद का नहीं है, बल्कि जिस तरह से लोगों को गुमराह करने का तरीका अपनाया जा रहा है, उसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का है। शिवसेना के कार्यकाल में जिन योजनाओं के लिए बजट का प्रावधान किया गया था, योजना की रूपरेखा तैयार की गई थी, कानूनी अड़चनें दूर की गईं, उन सभी परियोजनाओं का भूमिपूजन प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं और उसकी हमें खुशी है। कोरोना काल में मुंबई महानगरपालिका द्वारा किए गए कार्यों की विश्व ने प्रशंसा की। खुद प्रधानमंत्री ने उस काम की सराहना की। एक तरफ महानगरपालिका यानी शिवसेना द्वारा किए गए कार्यों का श्रेय भाजपा ले, उन कार्यों का उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों करवा के राजनीतिक उत्सव मनाए जाएं और उसी समय उसी महानगरपालिका के कामों की जांच ‘कैग’ आदि से करा के बदनामी की जाए। ऐसा दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री को मुंबई में महानगरपालिका के कार्यों का उद्घाटन करने के लिए लाया गया, वह महानगरपालिका चुनाव का प्रचार करने के लिए। काम शिवसेना का, मेहनत मुंबई महानगरपालिका की और प्रचार का करताल भाजपा बजाएगी। यह घोषणा की गई कि प्रधानमंत्री आएंगे और मुंबई का कायापलट करेंगे। मुंबई के आर्थिक और औद्योगिक महत्व को कम करके ये कायापलट करना केंद्र ने जारी रखा है। लिहाजा, अब नया क्या करेंगे? महाराष्ट्र से सवा दो लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स भगा ले गए। यह मुंबई पर आर्थिक आघात है। महाराष्ट्र के बेरोजगार युवाओं के मुख का निवाला छीन ले गए। क्या इसे ही मुंबई-महाराष्ट्र का भाग्योदय कहा जाए? प्रधानमंत्री मोदी की सभा के लिए भीड़ जुटाने की योजना बनाई गई है और आनेवाले लोगों के गाड़ी-घोड़ों के पार्किंग की सुविधा के लिए कालीना स्थित मुंबई विश्वविद्यालय की सुरक्षा दीवार को तोड़ दिया गया। इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया। मुंबई के भाग्योदय की शुरुआत यूनिवर्सिटी की दीवार तोड़कर हुई। मुंबई के एक-एक प्रमुख स्ट्रक्चर पर इस तरह से हथौड़े चलाए जा रहे हैं। फिर भी हमारे प्रधानमंत्री का स्वागत है! है ही!!

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