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संपादकीय : अयोध्या में क्या चल रहा है? …नए पंडों के कब्जे में भगवान!

असली शिवसेना का महासम्मेलन देवभूमि नासिक के अनंत कान्हेरे मैदान में आयोजित हुआ। उससे पहले शिवसेनापक्षप्रमुख श्री उद्धव ठाकरे ने कालाराम मंदिर जाकर पूजा-आरती की। इसके बाद उन्होंने गोदावरी तट पर जाकर हजारों रामभक्त शिवसैनिकों के साथ महाआरती की और प्रभु श्रीराम के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए, जिसका गुस्सा महाराष्ट्र के मिंधे मुख्यमंत्री और उनके चेलों को आया है। क्रोध इतना कि उनकी दाढ़ी में हनुमान की पूंछ की तरह आग लग गई। हनुमान की पूंछ में आग लगाने से रावण की लंका जल गई। यहां मिंधे खुद ही खुद को जला रहे हैं। नासिक के सभी समारोहों को जनता का प्रचंड प्रतिसाद मिलने का यह झटका है। मुख्यमंत्री मिंधे आदि कहते हैं, ‘धूर्त भेड़िया बाघ की खाल ओढ़ लेने से बाघ नहीं बन जाता, इसके लिए उसके पास बाघ का कलेजा होना चाहिए।’ मिंधे का यह कथन खुद उन पर ही बिल्कुल सही बैठता है। ‘ईडी’ जैसी जांच एजेंसियों के डर से ये धूर्त भेड़िये भाजपा के पाले में घुस गए और अब वे हिंदुत्व का नाटक कर रहे हैं। ऐसे धूर्तों को शिवसेना के कलेजे की चिंता करने की बजाय अपने भविष्य की चिंता करनी चाहिए। कायरों द्वारा बाघ और सिंह की चिंता करना बिल में छुपे चूहों द्वारा बकवाद करने के समान है। श्रीराम जन्मभूमि समारोह, राम का कम और श्री मोदी का अधिक था। मंदिर श्रीराम का बन रहा है या मोदी का? बहुत से लोगों के मन में ये सवाल है। इसीलिए उद्धव ठाकरे ने नासिक में भाजपामुक्त श्रीराम का आह्वान किया और वह सही ही है। महाराष्ट्र के अनेक मंदिरों को पंडों, दलाल आदि के चंगुल से मुक्त कराने के लिए आंदोलन हुए हैं। नासिक के कालाराम मंदिर में दलितों और बहुजनों को प्रवेश दिलाने के लिए भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने आंदोलन किया था। अब अयोध्या के श्रीराम मंदिर पर भाजपा के पंडों का कब्जा होगा और वहां आस्था की राजनीतिक चोरी होगी तो प्रभु राम को भाजपा से मुक्त कराना होगा। भाजपा को वोट देने वालों को अयोध्या के रामलला के मुफ्त में दर्शन करवाने जैसे सुभाषित फूल भाजपा के नेता बरसा ही चुके हैं। इसलिए भक्तों को श्रीराम के अस्तित्व की चिंता सता रही है। आस्था के इस बाजार को सजाकर भाजपा लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है और वही तस्वीर महाराष्ट्र में भी दिख रही है। महाराष्ट्र में प्राण प्रतिष्ठा के शुभ दिन पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री क्या कर रहे थे? मुख्यमंत्री मिंधे पूजा आदि कर रहे थे। ‘पाव’ उपमुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस भी पूरे दिन ताल और भजन में डूबे दिखे, लेकिन दूसरे उपमुख्यमंत्री अजीत पवार समारोह व श्रद्धा कार्यक्रम में कहीं नजर नहीं आए। न तो उन्होंने पूजा की, न ही आरती की थाली घुमाई। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार मोदी के धार्मिक एजेंडे से दूर ही रहे जबकि पूरा राज्य राम भजन में डूबा हुआ था। वे उस दिन कहीं नजर ही नहीं आए या फिर उन्होंने भी अकेले में मोदीमुक्त राम का भजन शुरू कर दिया है? श्रीराम भक्ति के ऐसे विविध रूप राज्य में दिखाई दिए। या तो उपमुख्यमंत्री पवार को भाजपा का यह धार्मिक ढोंग बिल्कुल भी स्वीकार नहीं है या फिर अजीत पवार अभी तक भाजपा की धारा में ठीक से शामिल नहीं हो पाए हैं। मुख्यमंत्री मिंधे या फडणवीस का इस बारे में क्या कहना है? देश में इस वक्त कई सवाल उफान पर हैं। राम मंदिर तो बन गया, अब देश और जनता के काम की बात करें, लेकिन महाराष्ट्र की या देश की मोदी सरकार ‘काम’ के बारे में बात करने के लिए तैयार नहीं। भाजपा इस बात से खुश है कि अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ रही है। लाखों की संख्या में जत्थे राम जन्मभूमि की ओर निकल रहे हैं और ये आम श्रद्धालु हैं। इसमें किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की तादाद ज्यादा है। राम के दर्शन हो जाने पर भी उनके हाथों को काम, किसानों को उनके उपज की कीमत सरकार को ही देनी होगी। महाराष्ट्र के विधायकों को ‘खोखे’ मिलते हैं; लेकिन प्याज, कपास, सोयाबीन उत्पादकों को कीमत नहीं मिलती। दुग्ध उत्पादकों की हालत खराब है। आए दिन उद्योगपतियों का कर्ज माफ किया जाता है। अजीत पवार का ७० हजार करोड़ रुपए का सिंचाई घोटाला भी माफ कर दिया गया, लेकिन जिन किसानों पर ५-१० हजार का कर्ज है, उनके घर जब्ती की कार्रवाई चल रही है। प्रभु श्रीराम के दर्शन से ये कार्रवाइयां बंद होने वाली होगी तो श्री मोदी जैसे रामभक्तों को ऐसा कहना चाहिए। आए दिन किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। क्या राम मंदिर समारोह उसका समाधान है? महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार जंगल की आग की तरह बढ़ गया है। श्रीराम इसे स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन भ्रष्ट हाथ वहां बैठकर श्रीराम के भजन में ताल बजा रहे हैं। महाराष्ट्र में ये ढोंग अजीब है। महाराष्ट्र में धूर्त भेड़ियों का साम्राज्य है और राष्ट्रवाद की खाल पहने लोग देश पर शासन कर रहे हैं। श्रीराम उनके बीच फंस गए हैं। तस्वीर कुछ ऐसी है कि अयोध्या की अगली लड़ाई भाजपामुक्त श्रीराम के लिए लड़नी पड़ेगी। आम लोगों ने राम के लिए बलिदान दिया। उन राम के सूत्र पाखंडियों और धूर्त भेड़ियों के हाथ आ गए। मंदिर भ्रष्टाचार और पाखंड से मुक्त होने चाहिए। अयोध्या में जो चल रहा है उस पर और क्या भगवान नए पंडों के कब्जे में चले गए हैं, इस पर बारीकी से गौर करना होगा। भक्तों को ही राम का दम घुटने से बचाना होगा।

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