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संपादकीय : सच में कमजोर कौन?

कारगिल विजय दिवस की पाश्र्वभूमि में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जम्मू गए और वहां उन्होंने तिरंगा फहराया। रक्षामंत्री ने जम्मू में प्रेरणादायी तथा वीरतापूर्ण भाषण दिया। ‘कोई भी हमें कमजोर समझने की गलती न करे। एक शक्तिशाली देश के रूप में हिंदुस्थान आज जाना जाता है। पाकिस्तान को हमने हर बार झुकाया है। चीन को अब अति आत्मविश्वास में रहने की कोई जरूरत नहीं है।’ ऐसा श्री राजनाथ सिंह कहते हैं लेकिन ठीक उसी समय चीन के जंगी विमान के हिंदुस्थान की सीमा में, लद्दाख के आकाश में घुसने की खबर चिंताजनक है। चीन ने लद्दाख स्थित हिंदुस्थान की सीमा में पहले ही घुसपैठ करके जमीन हथिया ली है। पेंगांग झील के पास सड़क, पुल, रनवे तैयार करके चुनौती पेश की है। यह सब हिंदुस्थान की सीमा में घट रहा है। इसलिए चीन का अति आत्मविश्वास हिंदुस्थान को महंगा पड़ता दिख रहा है। चीनियों ने कई बार वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया है। अब उनके विमान हमारी सीमा में घुसने लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि दो देशों के कोर कमांडर स्तरीय चर्चा शुरू रहने के दौरान चीन ये सब कर रहा है। एक तरफ बातचीत के लिए बैठना और उसी दौरान दगाबाजी करना ये चीन की नीति है। पाक को झुकाना और फटकारना आसान है। लेकिन चीन का ऐसा नहीं है। पाकिस्तान पर कर्ज का भारी बोझ है। राष्ट्रीय संपत्ति बेचकर वो पैसा जमा कर रहा है। पाकिस्तान की अर्थव्यस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। श्रीलंका से बुरी अवस्था पाकिस्तान की होगी, ऐसी तस्वीर है। उस पर पाकिस्तान को फटकारने से यहां ‘हिंदू बनाम मुसलमान’ के मुद्दे को गति मिलती है। लेकिन चीन के मामले में ऐसा नहीं है। चीन की आर्थिक शक्ति व शस्त्र बल के साथ मनुष्य बल को देखें तो हिंदुस्थान को सोच-समझकर ही कदम उठाने पड़ते हैं। पाकिस्तान को हम सहज ही युद्ध की धमकी दे सकते हैं। उस तरह से चीन को दे सकते हैं क्या? पाक व्याप्त कश्मीर में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करके बम बरसा सकते हैं वैसी हिम्मत हम चीन के संदर्भ में कर सकते हैं क्या? चीन को मुंहतोड़ उत्तर देने के लिए हम तैयार हैं, यह बोलना ठीक है। लेकिन चीनी फौज लद्दाख में घुस आई है और बाहर निकलने को तैयार नहीं है। इससे कैसे निपटेंगे? लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन १९६२ से ही घुसपैठ कर रहा है। पंडित नेहरू के दौर में चीन हमारी सीमा में घुस आया, ऐसा आरोप जो लगा रहे हैं। उन्होंने घुसपैठिए चीनियों को बाहर निकाला ही नहीं बल्कि आप लोगों के दौर में चीन अधिक आगे घुसकर मुंहजोर हो गया है। हिंदुस्थान को कोई कमजोर न समझे, ऐसा रक्षामंत्री कहते हैं तो यह सही ही है। परंतु पाकिस्तान और चीन में फर्क करना चाहिए। हिंदुस्थान के पड़ोसी हर देश आज चीन की लाल मुट्ठी में बंद हैं। हिंदुस्थान का कोई पड़ोसी मुल्क आज बचा है क्या? नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, पाकिस्तान, अफगानिस्तान ऐसे कई राष्ट्र हिंदुस्थान के मित्रों की सूची में हैं क्या? एक नेपाल जैसा हिंदू राष्ट्र भी लाल चीनियों के शिकंजे  में फंस गया है। यह तस्वीर अच्छी नहीं है। हमारी सेना शूर है और राष्ट्र के लिए बलिदान देने में आगे-पीछे नहीं देखेगी। नहीं तो भी कश्मीर की भूमि पर प्रतिदिन बलिदान जारी ही है। कश्मीरी पंडित भी संकट में हैं और दूसरी तरफ हमारे सैनिकों का हमारी ही भूमि पर बलिदान जारी है। इसलिए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब, कड़ा जवाब कब मिलेगा? ‘कारगिल विजय दिवस’ हम मनाते हैं वह कारगिल युद्ध भी हमारी ही भूमि पर लड़ा गया और हमारे ही हजारों सैनिकों का उस समय इस्तेमाल किया गया। कमजोर पाकिस्तान ने ही हमें यह कीमत चुकाने को मजबूर किया। इसलिए चीन क्या अथवा पाकिस्तान क्या, उन पर अंकुश लगाने के दौरान रक्षामंत्री को अधिक कड़े कदम उठाने होंगे। देश कमजोर नहीं होता है, देश की व्यर्थ राजनीति देश को कमजोर बनाती है। आज यही हो रहा है।

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