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आम्रपाली ग्रुप संपत्ति कुर्क मामला, ईडी का ही गड़बड़ घोटाला! सुप्रीम कोर्ट में एजेंसी ने किया स्वीकार

एजेंसी / नई दिल्ली। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) केंद्र सरकार के इशारे पर जोर-शोर से कार्रवाई कर रही है। एजेंसी अपनी जांच के दौरान संपत्ति जप्त करने जैसी कार्रवाई कर रही है। इसी तरह इस एजेंसी ने आम्रपाली समूह के एक पूर्व निदेशक की संपत्ति कुर्क की थी, उसमें उन्होंने गड़बड़ घोटाला किया था। वो कार्रवाई गलत थी, ऐसा खुद ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया है। ईडी की ओर से अपना पक्ष रखने वाले संजय जैन ने न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ को बताया कि अधिकारियों ने आम्रपाली समूह के पूर्व निदेशक प्रेम मिश्रा की करीब ४.७९ करोड़ रुपए की गलत संपत्ति कुर्क की। जैन ने कहा कि जांच एजेंसी की ओर से की गई कार्रवाई एक त्रुटि थी, क्योंकि उसने इन संपत्तियों को अपराध की आय के रूप में माना था।
जैन ने अदालत में मांग की कि जप्त की गई संपत्तियों को मिश्रा की निजी संपत्तियों से बदलने के लिए कहा जाए। पीठ ने उनकी मांग को खारिज करते हुए कहा कि हम ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकते, क्योंकि यह उचित नहीं होगा। जैन ने आग्रह किया कि जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है, वे अदालत के रिसीवर वरिष्ठ अधिवक्ता आर वेंकटरमणि की हिरासत में रहें। उनके इस आग्रह पर पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अपना पैâसला सुरक्षित रख रही है और उचित आदेश पारित करेगी।
इस सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उन्हें अब तक ५४० करोड़ रुपए में से १५० करोड़ रुपए दिए गए हैं। बाकी राशि का बैंकों द्वारा भुगतान किया जाना है और परियोजनाओं के आगे निर्माण के लिए धन की आवश्यकता है। वेंकटरमणि ने कहा कि यह बैंकों के कंसोर्टियम सात बैंकों को एनबीसीसी का भुगतान करने पर निर्भर है। पीठ ने कहा कि बैंकों द्वारा जताई गई आशंका को ४ अप्रैल को उसके आदेश द्वारा ध्यान में रखा गया है और अब एनबीसीसी के लिए जरूरी ५४० करोड़ रुपए जारी करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

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