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पालघर में शिक्षा व्यवस्था वेंटीलेटर पर! … शिक्षा बनी मजाक

• रेलवे के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए तोड़ा गया सरकारी स्कूल
• कंटेनरों में ३२ नौनिहाल भविष्य गढ़ने को मजबूर

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए केंद्र से लेकर राज्य की सरकारें तमाम दावे करती रहती हैं। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। पालघर के आदिवासी इलाकों में तो हालात यह है कि बुनियादी सुविधाएं तक स्कूलों से नदारद हैं, जिससे यहां शिक्षा का स्तर सुधरने की बजाय दिन-ब-दिन बिगड़ता ही जा रहा है। कहीं स्कूल है तो शिक्षक ही नहीं हैं और कहीं दोनों ही नहीं हैं। डहाणू के सरावली-मोरपाड़ा इलाके में करीब ५ वर्षों से रेलवे की (डीएफसीसीएल) परियोजना को पूरा करने के लिए जिला परिषद के एक सरकारी स्कूल को तोड़ा गया था, लेकिन स्कूल का निर्माण आज तक नहीं हो पाया, जिससे इस स्कूल में पढ़नेवाले नौनिहाल भीषण गर्मी में भी कंटेनरों में भविष्य गढ़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कई बार शासन प्रशासन और रेलवे से स्कूल को बनाने की मांग की है, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
दिल्ली और मुंबई के बीच डेडिकेटेड प्रâेट कॉरिडोर (डीएफसीसीएल) परियोजना के लिए ५ साल पहले स्कूल की इमारत को ध्वस्त कर दिया गया था। इसलिए उस स्कूल के बच्चे बीएचसीसीआईएल मुंबई द्वारा निर्मित दो कंटेनरों में पढ़ाई कर रहे हैं। कंटेनरों में चल रहे स्कूल में आनेवाले बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बरसात के दिनों में कंटेनर लीक होते हैं और गर्मियों में बहुत गर्मी होती है, इसलिए छात्रों की संख्या कम हो गई है। इससे गरीब छात्रों की पढ़ाई में बड़ी मुश्किलें पैदा हो गई हैं। ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं और सरकारी स्कूल टूटने के बाद बन नहीं रहा है।
स्कूल के मुख्य शिक्षक कोमल सिंह शेरे ने कहा कि स्कूल में फिलहाल ३२ बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल कंटेनर में संचालित करने में बहुत दिक्कत हो रही है। जल्द से जल्द स्कूल के भवन का निर्माण कराने की मांग की गई है।
• बरसात में भी स्थिति काफी खराब हो जाती है और गर्मियों में कंटेनर इतना गर्म हो जाता है कि बच्चे उसके अंदर बैठ ही नहीं सकते। मेरा बेटा दूसरी कक्षा में है, उसे ठीक से शिक्षा नहीं मिल पा रही। बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल भवन का निर्माण तत्काल कराया जाए।
-जानू गोरखाना -परिजन
• स्कूल की बिल्डिंग बनाने के लिए जगह मिल गई है। अधिकारियों से पत्र व्यवहार किया गया है। स्कूल के भवन के निर्माण के लिए लगातार प्रयत्न किए जा रहे हैं।
-माधवी तांडेल, गट शिक्षा अधिकारी डहाणू

स्कूल छोड़ रहे हैं बच्चे
दो कंटेनरों में पहली से पांचवीं तक चल रहे स्कूल के बच्चों के लिए न पीने के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था है, न ही यहां बिजली का कनेक्शन है, जिससे बच्चों को गर्मियों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, नए स्कूल भवन के निर्माण के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है, लेकिन फिर भी भवन निर्माण में देरी हो रही है, जिससे इस स्कूल को छोड़कर बच्चे दूसरे स्कूल में एडमिशन ले रहे हैं।

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