मुख्यपृष्ठसमाचारअशोक जयंती मनाकर ओबीसी को रिझाने का प्रयास, भाजपा की कोशिश बनी...

अशोक जयंती मनाकर ओबीसी को रिझाने का प्रयास, भाजपा की कोशिश बनी मजाक!

• बिहार में उपेंद्र कुशवाहा ने कसा तंज
सामना संवाददाता / पटना
बिहार में जदयू-भाजपा गठबंधन के बीच खटपट की खबरें अक्सर आती रहती हैं। इसी कड़ी में जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने अशोक जयंती को लेकर भाजपा का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि मैं यह सुनकर चकित था कि एक राजनीतिक दल दावा कर रहा है कि उसकी पहल से हमारे नेता नीतीश कुमार ने अशोक जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घाषित किया। यह याद रखा जाना चाहिए कि यह घोषणा २०१५ में की गई थी, जब जदयू का भाजपा के साथ गठजोड़ नहीं था। जदयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष कुशवाहा ने अशोक जयंती मनाने के लिए भाजपा द्वारा आयोजित एक समारोह में पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी के भाषण की ओर इशारा करते हुए यह बात कही। सुशील मोदी ने अशोक जयंती को लेकर भाजपा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि भाजपा की पहल से ही अशोक जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित हुआ है।
भाजपा के विचार में बदलाव
कुशवाहा अपनी पार्टी जदयू द्वारा ईसा पूर्व तीसरी सदी के शासक की जयंती मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। अशोक ओबीसी खासकर उनकी अपनी जाति कोइरी के लिए राजनीतिक थाती बन गए हैं। बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा ने पिछले साल अपनी राजनीतिक पार्टी रालोसपा का जदयू में विलय कर दिया था। उन्होंने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भाजपा के रुख में बदलाव को भी दोहराया, जो ओबीसी से जुड़ी जातियां चाहती है और जिसे लेकर जदयू और विपक्ष की एक ही राय है। कुशवाहा ने कहा कि २०१८ में, जब मैं खुद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में था, वैâबिनेट के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा था कि सरकार जातिगत जनगणना कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मैं नेता का नाम नहीं लेना चाहता लेकिन उनकी पार्टी अपने वादे से मुकर गई है।

अन्य समाचार