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नेपाल में चुनाव, हिंदुस्थान में सरगर्मी! …निकाय चुनाव में हजारों हिंदुस्थानी भी डालेंगे वोट

• सीमावर्ती गांवों में चल रहा नेपाली प्रत्याशियों का प्रचार
• हजारों हिंदुस्थानियों के पास है दोहरी नागरिकता
विक्रम सिंह / लखनऊ
नेपाल से सटे हिंदुस्थान के सीमावर्ती जिलों के नागरिकों के लिए ये खुशी की बात है कि उन्हें दोहरी नागरिकता मिली हुई है।१३ मई को पड़ोसी मित्र देश नेपाल में निकाय चुनाव हैं और सरगर्मी हिंदुस्थान में नजर आ रही है। सिर्फ यूपी के महराजगंज व सिद्धार्थनगर जिले के ही तकरीबन १२ हजार लोग (हिंदुस्थान-नेपाल संधि १९५० के अनुसार) नेपाल के सीमावर्ती जिलों रूपनदेही, कपिलवस्तु व नवलपरासी आदि जिलों में भी वोटर हैं। नेपाल के प्रत्याशियों की प्रचार गाड़ियां रात-दिन सरहद के जिलों में दौड़ रही हैं और वहां के सियासी बाजार गर्म हो गए हैंै। प्रत्याशी और उनके समर्थक हिंदुस्थानी सीमा क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के घर पहुंचकर रोटी-बेटी के रिश्ते की दुहाई दे रहे हैं।
नए संविधान के बाद पड़ेंगे वोट
नेपाल में नया संविधान लागू होने के बाद दूसरे स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। १३ मई को ६ महानगर ६, ११ उप-महानगरीय शहरों, २७६ नगरपालिका और ४६० ग्रामीण नगर पालिकाओं में १७ करोड़ ७३ लाख मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करेंगे। नेपाल के कपिलवस्तु, नवलपरासी और रूपनदेही जिले की लगभग १५० किलोमीटर लंबी सीमा पर सिद्धार्थनगर और महराजगंज में १० हजार से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिनके पास दोहरी नागरिकता है। ये लोग नेपाल के निकाय चुनाव में मतदान करेंगे।
संधि से मिला है विशेषाधिकार 
१९५० में भारत-नेपाल के बीच विशेष संधि ने दोनों देशों के सीमावर्ती नागरिकों को विशेष अधिकार दिए। समझौते के अनुसार दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के देश में रहकर संपत्ति अर्जित कर सकते हैं। वह सरकारी नौकरी भी कर सकते हैं। नेपाल में दो दशक पूर्व हुए माओवादी आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में नेपाली मूल के लोग भारतीय क्षेत्र में आ बसे थे, लेकिन उनके नेपाली दस्तावेज व संपत्ति अब भी बरकरार है। यही लोग नेपाल का चुनावी समीकरण बदल देते हैं, जिस पर प्रत्याशियों की नजर है।

सरहद के गांवों में रोटी-बेटी का रिश्ता
मतदाताओं को रिझाने के लिए नेपाली प्रत्याशी महराजगंज के नौतनवा, सोनौली, भगवानपुर, श्यामकाट, शेख फरेंदा, केवटलिया, डाली, सुंडी व सिद्धार्थनगर के बैरियहवा, ककरहवा, फरसादीपुर, धनगढ़वा आदि इलाकों में जनसंपर्क कर रहे हैं। दोनों जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में अधिकांश घरों के युवक-युवतियों की शादी भारत-नेपाल में हुई है। रिश्तेदार और परिचितों के घर पहुंचकर प्रत्याशी और समर्थक रोटी-बेटी का रिश्ता जोड़कर वोट की अपील कर रहे हैं।

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