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प्राथमिक स्कूल बन रहे स्मार्ट!… डिजिटल बोर्ड ने ली ब्लैक बोर्ड और चॉक की जगह

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर। स्मार्ट बोर्ड आज के आधुनिक युग का एक जरूरी हिस्सा बनता जा रहा है। स्कूल कॉलेज से लेकर छोटे- बड़े दफ्तरों के साथ-साथ सरकारी संस्थानों में भी इसका उपयोग हर रोज किया जा रहा है। क्योंकि स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से किसी भी विषय वस्तु को समझना या समझाना इतना आसान हो गया है कि हर उम्र के शख्स को रोचक तरीके से विषय को समझने या समझाने में आसानी हो रही है।

पालघर जिले के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को स्मार्ट और डिजिटल शिक्षा देने के उद्देश्य से ओएनजीसी और थिंकशार्प फाउंडेशन ने ग्रामीण क्षेत्रों में १४ जिला परिषद के प्राथमिक स्कूलों इंटरएक्टिव स्मार्टबोर्ड दिए हैं। ओएनजीसी मुंबई के प्रबंधक किरण निकम ने कहा कि कोरोना महामारी के समय स्मार्टफोन की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में छात्र शिक्षा से वंचित थे। यह ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को आधुनिक टेक्नोलॉजी से जोड़ने का प्रयास है। इन स्मार्ट बोर्ड को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि छोटे बच्चे भी इन्हें सरल तरीके से इस्तेमाल कर सकें। निकम ने यह भी कहा कि स्मार्ट बोर्ड बच्चों को किसी भी प्रकार की शैक्षिक जानकारी तक पहुंचने में सक्षम बनाएगा, जिससे उनके ज्ञान में वृद्धि होगी। ओएनजीसी और थिंकशार्प फाउंडेशन ने इन स्कूलों में डिजिटल बोर्डों का वितरण कर इनके उपयोग को लेकर प्रशिक्षण दिया। मल्याण जिला परिषद स्कूल में इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। प्रधानाध्यापिका ममता पटेल और शिक्षकों ने इसके उपयोग के बारे में जानकारी ली। डहाणू तालुका के जिला परिषद के प्राथमिक मल्याण मराठी स्कूल, आगर प्राथमिक स्कूल, धाकटी डहाणू स्कूल, डहाणू स्कूल क्र.२ व पालघर तालुका के उच्छेली, खारेकुरण, टेम्भी, गवराई, एडवण के जिला परिषद स्कूल सहित वसई के अर्नाला गांव व अर्नाला किला प्राथमिक स्कूलों में डिजिटल बोर्ड दिए गए।

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