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गोगावले की डिमोशनल कहानी में मंत्रियों का इमोशनल अत्याचार! … शिंदे गुट के विधायक की भावनात्मक लीपा-पोती

सामना संवाददाता / मुंबई
रायगड के पालक मंत्री पद से उपहास का पात्र बने विधायक भरत गोगावले ने अपना मंत्री पद गंवाने का खुलासा किया है। उन्होंने अपनी इस डीमोश्नल कहानी में मंत्रियों के इमोशनल अत्याचार का तड़का लगाया। एक तरह से कहे तो गोगावले ने भावनात्मक लीपा-पोती की है। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के बाद मंत्री पद की पहली सूची में मेरा भी नाम था। लेकिन एक बहादुर आदमी ने आकर मुख्यमंत्री से कहा कि अगर मुझे मंत्री पद नहीं दिया गया तो मेरी पत्नी आत्महत्या कर लेगी। दूसरे विधायक ने कहा, मंत्री पद नहीं मिला तो नारायण राणे मुझे समाप्त कर देंगे, वहीं तीसरे ने सीधे इस्तीफा देने की धमकी देते हुए मंत्री पद अपने गले लगा लिया। विधायकों की इसी ढकोसलेबाजी के कारण मेरा मंत्री पद चला गया, ऐसा सनसनीखेज खुलासा शिंदे गुट के विधायक भरत गोगावले ने किया। शिंदे गुट के विधायकों के इस ढकोसलेबाजी के कारण ‘नैपकीनवाले सेठ’ लटक गए और उनका मंत्री बनने का सपना चकनाचूर हो गया, ऐसा स्वयं गोगावले ने स्पष्ट किया। अलीबाग के खानाव में आयोजित एक कार्यक्रम में भरत गोगावले ने उनका मंत्री पद वैâसे कटा, इसका किस्सा सुनाया। गोगावले ने कहा, ‘सरकार बनने के बाद शिंदे गुट को ९ मंत्री पद मिले थे, इसमें मेरा भी नाम था। लेकिन उक्त तीनों विधायकों की व्यथा सुनने के बाद मैंने कहा, इसकी पत्नी जीवित रहनी चाहिए। अगर राणे ने उन्हें खत्म कर दिया तो हमें एक सीट का नुकसान होगा।’ मैंने मुख्यमंत्री से कहा कि मुझे मंत्री पद नहीं चाहिए.. उन्हें मंत्री बना दीजिए। गोगावले ने मौके पर उपस्थित विधायक महेंद्र दलवी से कहा कि आपको भी यह कहानी सभी को बतानी चाहिए। पालक मंत्री पद न मिलने से उपहास के पात्र बने गोगावले के बारे में इसी कार्यक्रम में अलीबाग से शिंदे गुट के विधायक महेंद्र दलवी ने भविष्यवाणी की कि अगले कुछ घंटों में गोगावले को मंत्री पद मिलेगा। लेकिन दलवी की भविष्यवाणी की भी हवा निकल जाने से गोगावले समर्थकों की स्थिति ‘असहनीय और अवर्णनीय’ हो गई है।

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