मुख्यपृष्ठनए समाचारएनकाउंटर बनी कश्मीर की पहचान : घाटी में एनकाउंटर राज!

एनकाउंटर बनी कश्मीर की पहचान : घाटी में एनकाउंटर राज!

  • ५ महीने में ९० आतंकियों का सफाया

सामना संवाददाता / श्रीनगर
असल में कश्मीर की फिज़ा अब बदल गई है। ३ साल पहले जिस तरह से ‘बंद’ कश्मीर की पहचान थी, लेकिन अब ‘एनकाउंटर’ की खबर लोगों के लिए एक आम खबर है। कश्मीर पुलिस जोन के ट्विटर हैंडल में ‘एनकाउंटर’ उसी तरह अपडेट हो रहे हैं जैसे किसी मीडिया संस्थान में बुलेटिन होते हैं। कब, किसे मारा गया, कौन-कौन से हथियार बरामद हुए, आतंकी का नाम, उसका संगठन सब कुछ। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ट्विटर अपडेट किसी दिखावे में नहीं किया जा रहा।
गोली से आतंकियों का सफाया
गोली से आतंकी का सफाया करते हैं और ट्विटर अपडेट से ‘खौफ’ और सरकार का मैसेज साफ है, आतंकी की मौत की खबर सबको लगनी चाहिए। केवल हमें नंबर कम नहीं करने हैं, बल्कि उनके इरादे को तोड़कर रख देना है। आतंक के आकाओं के मंसूबों को ध्वस्त करना है। उधर आम जनता को यह बताना है कि घाटी में अब आतंक का नहीं हिंदुस्थान सरकार का शासन है।
कब पुलिस आ धमकेगी, नहीं पता
वाकई ताबड़तोड़ ढंग से वहां खोजी अभियान चालू है। आम बहुसंख्यक नागरिक इससे खफा भी हैं और मुश्किल में भी। कुपवाड़ा के आशिफ (बदला हुआ नाम) ने बताया कि ३ दिन पहले हमारे घर पुलिस आ धमकी। कहां जाते हो, कब जाते हो? कई बार पूछताछ हो चुकी है। पर उन्हें अब तक हम पर भरोसा नहीं हुआ। इस बार जब पुलिस आई तो मेरे बड़े भाई-भाभी के बेडरूम में सीधे धड़धड़ाते हुए पहुंच गई।
आतंक की पैâक्ट्री में कैसे -कैसे  आतंकी?
डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि आतंक की पूरी एक फैक्ट्री है। यहां कई तरह के आतंकी मौजूद हैं। पहली तरह के आतंकी ज्यादा खतरनाक होते हैं। इनकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है। ये लोगों के बीच घुसकर और उनमें घुल मिल कर काम करते हैं। कोई सरकारी मुलाजिम, वकील, डॉक्टर या फिर मदरसे का टीचर, प्रोफेसर भी होता है। ये लोग अपने आकाओं के लिए काम करते हैं। कोई हथियार लाने का काम करता है, कोई सूचना पहुंचाने और लाने का काम करता है।

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