मुख्यपृष्ठसमाचारबच्चों में एपिलेप्सी बढ़ा रहा टेंशन!

बच्चों में एपिलेप्सी बढ़ा रहा टेंशन!

-समय पर इलाज से रोकी जा सकती हैं भविष्य की जटिलताएं

सामना संवाददाता / मुंबई

बच्चों में एपिलेप्सी माता-पिता के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। मौजूदा समय में यह बीमारी बच्चों में बढ़ती ही जा रही है। यदि समय पर पता लगाकर इलाज नहीं किया गया तो यह भविष्य में कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। बच्चों में मिर्गी के विभिन्न प्रकारों को समझना आपके बच्चों को उचित चिकित्सा उपचार प्रदान करने के लिए आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि बचपन की मिर्गी एक तंत्रिका संबंधी विकार है, जिसमें बार-बार दौरे पड़ते हैं। यह बच्चे के विकास, शारीरिक कार्य और जीवन की समग्र गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। जायनोवा शाल्बी अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका ताटेर ने कहा कि एपिलेप्सी के कई मामले उम्र बढ़ने के साथ और भी गंभीर हो जाते हैं, जबकि कुछ में वयस्क होने पर भी दौरे पड़ते हैं। बचपन की एपिलेप्सी के प्रबंधन में दवा और जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं। लीलावती अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सिद्धार्थ खारकर ने कहा कि जब बच्चे को चक्कर आता है, तो माता-पिता परेशान हो सकते हैं। दौरे की समझ की कमी और बच्चे के भविष्य को लेकर चिंता इसके दो प्रमुख कारण हैं। आम तौर पर हमारे मस्तिष्क का एक हिस्सा छोटी विद्युत धाराओं का उपयोग करके दूसरे के साथ संचार करता है। एपिलेप्सी को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है। कई चीजें इस बात पर निर्भर करती हैं कि दौरे या दौरा पड़ने पर मस्तिष्क का कौन-सा हिस्सा प्रभावित होता है और कितना प्रभावित होता है।
सावधानीपूर्वक निगरानी करने की आवश्यकता
डॉ. प्रियंका ने कहा कि बीमारी का पता लगाने के बाद प्रत्येक बच्चे के लिए उपचार योजना तैयार करने, दवा की उचित खुराक निर्धारित करने और हर चीज की सावधानीपूर्वक निगरानी करने की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में जहां दवा प्रभावी नहीं है, इस तरह के कुछ बच्चों की सर्जरी की जा सकती है। मिर्गी के इलाज के लिए ३० से अधिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। मिर्गी के प्रकार को जाने बिना कोई भी सही दवा का चयन नहीं कर सकता है।

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