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चाहे कांग्रेस ही क्यों न हो, हर १० साल में बदल जानी चाहिए सरकार! चिदंबरम ने साधा मोदी सरकार पर निशाना

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने महंगाई, मूल्य वृद्धि और बेरोजगारी को लेकर केंद्र की भाजपाई सरकार पर फिर हमला बोला है। शनिवार (३० सितंबर) को रामेश्वरम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार दुविधा में है। इसे अलविदा कहना होगा। वे तमिलनाडु के रामेश्वरम में अखिल भारतीय मछुआरा कांग्रेस की बैठक में बोल रहे थे।
पी. चिदंबरम ने कहा, ‘ऐसी निष्क्रिय भाजपा सरकार को अलविदा कहें जो मुद्रास्फीति, कीमतों को नियंत्रित नहीं कर सकती और नौकरी नहीं दे सकती।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से नहीं बढ़ रही है। ऐसी अर्थव्यवस्था जो कीमतों पर नियंत्रण नहीं रखती और रोजगार पैदा नहीं करती, उसे विकसित अर्थव्यवस्था नहीं माना जा सकता। मेरी राय है कि १० साल में एक बार सरकार बदलनी चाहिए। यह एक अच्छी बात है। चाहे वो कांग्रेस पार्टी की सरकार ही क्यों न हो।’ महंगाई के मुद्दे पर पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि महंगाई ६ फीसदी से ऊपर पहुंच गई है, जो ४ फीसदी से ऊपर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भाजपा शासन के ९ वर्षों में युवाओं के लिए बेरोजगारी कम नहीं हो रही है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, आर्थिक विकास का मतलब कीमतों पर नियंत्रण, रोजगार में वृद्धि, घरेलू बचत में वृद्धि, कर्ज को कम करना और मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना है।’ चिदंबरम ने कहा, ‘१० साल पहले चुनावों के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि २ करोड़ नौकरियां पैदा की जाएंगी, लेकिन सत्ता संभालने के बाद वह भूल गए। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि सरकार कहती है कि देश में २.३ फीसदी बेरोजगारी है, जिसमें २२ फीसदी १५ से २४ साल के युवा हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत में ४२ प्रतिशत स्नातक बेरोजगार हैं और ८.१ प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं। पी. चिदंबरम ने आगे कहा, ‘गत वर्ष जब भारत में लोगों की एकता और भाईचारे पर जोर देने के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक पदयात्रा निकाली गई थी, ५१ साल का एक युवक (राहुल गांधी) ४,००० किलोमीटर पैदल चला। २१वीं सदी में केवल राहुल गांधी ने ही यह उपलब्धि हासिल की है।’ उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह इस विश्वास के साथ काम करते हैं कि हिंदू-मुस्लिम के बीच तकरार पैदा करना चुनाव जीतने का तरीका है।

 

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