मुख्यपृष्ठनए समाचाररेशम की डोर भी रोने लगी! ५ रुपए की राखी २० की हुई

रेशम की डोर भी रोने लगी! ५ रुपए की राखी २० की हुई

  •  बहनों के बटुओं में सेंध
  •  शीशे जड़ी राखियां `५०० में
  • फैंसी  राखी की हो रही अच्छी बिक्री

गोपाल गुप्ता / मुंबई
भाई-बहन के पवित्र प्यार के अनमोल रिश्ते का त्योहार है रक्षाबंधन। इस त्योहार का जहां हर घर में बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, वहीं बहनों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह है। बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों से दुकानें भी सज गई हैं, परंतु इस बार रेशम की डोर भी महंगाई की मार से रो रही है। पिछले साल जो राखी ५ रुपए में बिक रही थी, इस बार वो २० रुपए में बिक रही है। ऐसे में गरीब बहनों के बटुए में महंगाई की ये बड़ी सेंध है।
बता दें कि बदलते परिवेश और आधुनिकता की चकाचौंध के साथ ही राखियों का स्वरूप भी अब बदल गया है। बहनों द्वारा भाई की कलाई पर बांधी जानेवाली रेशम की डोर पर भी महंगाई हावी है। कभी बाजारों में बिकनेवाली स्पंज व सितारों से सजी-धजी रंग-बिरंगी राखियां आज गायब हो चुकी हैं। उनकी जगह सीप, मोतियों व लड़ियों से सजी छोटी-छोटी राखियों का क्रेज बढ़ गया है। भाई की कलाई पर सजनेवाली बड़ी-बड़ी राखियों की जगह रेशम की धागेनुमा निर्मित पतली व छोटी-छोटी राखियां बिकने लगी हैं। जिस तरह राखियों की खूबसूरती बढ़ी, उसी तरह कीमतों में भी उछाल आया है। साधारण रेशम के धागे से बनी राखी जहां २० रुपए से शुरू है, वहीं १०० से ५०० रुपए तक शीशे जड़ी राखियां बिक रही हैं। बच्चों की कलाई व लड़कियों के लिए भी पैंâसी राखी की खूब बिक्री हो रही है। शहर और गांव के बाजारों में बहनें राखी की खरीददारी जोरों से कर रही हैं। वैसे कोरोना का कहर कम हो जाने से शहर से लेकर गांव तक हर घर में रक्षाबंधन को लेकर उत्साह बना हुआ है।

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