मुख्यपृष्ठसमाचारहर दिन गर्भ में ही मर रहे हैं ३४ भ्रूण!

हर दिन गर्भ में ही मर रहे हैं ३४ भ्रूण!

-करोड़ों बहाने के बाद भी शिशुओं को नहीं बचा पा रही है सरकार

-हर आठ घंटे में दम तोड़ रही है एक मां

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में कुर्सी बचाए रखने के लिए ‘ईडी’ सरकार में शामिल मंत्री-संत्री केवल जोड़-तोड़ की राजनीति में मशगूल हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में जो आज तक नहीं हुआ वह अब हो रहा है। दूसरी तरफ जनता कई जटिल समस्याओं से गुजर रही है, उसका बिल्कुल भी भान इस सरकार को नहीं है। स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। मरीजों की अस्पतालों में मौत हो रही है, लेकिन दिखावे के तौर पर समिति गठित कर पल्ला झाड़ने का काम यह सरकार कर रही है। इसी का नतीजा है कि प्रदेश में करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी माता व भ्रूण मृत्यु दर का अनुपात कम नहीं हो रहा है। आज परिस्थिति ऐसी है कि कातिल ‘ईडी’ सरकार रोजाना दुनिया देखने से पहले ही मां की कोख में ही ३४ भ्रूण को मरते हुए देख रही है। इसी तरह हर आठ घंटे में एक मां की भी मौत हो रही है, जो सरकार की बहुत बड़ी लापरवाही को उजागर कर रही है।
सूचना के अधिकार में जनस्वास्थ्य विभाग के ब्यौरे से यह चौंकानेवाली जानकारी सामने आई है। राज्य में एक अप्रैल २०२२ से ३१ दिसंबर २०२३ के बीच २२,०९८ प्रसवकालीन भ्रूण की मौतें (गर्भ में कम वजन वाले शिशुओं की मौत) हुर्इं। इस दौरान २,०६४ मातृ मृत्यु भी दर्ज की गई। इन आंकड़ों का दैनिक औसत निकालें तो प्रदेश में करीब ३४ भ्रूणों की मौतें और ३ मातृ मौतें हो रही हैं। एक अप्रैल २०२२ से ३१ मार्च २०२३ के बीच राज्य में १३,६३५ प्रसवकालीन भ्रूण मृत्यु और १,२१७ मातृ मृत्यु की जानकारी मिली है। एक अप्रैल २०२३ से ३१ दिसंबर २०२३ के बीच ८,४६३ प्रसवकालीन भ्रूण मृत्यु और ८४७ मातृ मृत्यु दर्ज की गईं। सामाजिक कार्यकर्ता अभय कोलारकर द्वारा सूचना के अधिकार के जरिए यह हकीकत को सामने लाई गई है। इस डेटा की पुष्टि पुणे के राज्य परिवार कल्याण कार्यालय की तरफ से की गई है।
डॉक्टर की सलाह जरूरी
चिकित्सकों के मुताबिक, भ्रूण में विकलांगता, एनीमिया, विभिन्न संक्रमण, दुर्घटनाओं के साथ ही अन्य कारणों से भ्रूण के मौतों का प्रमाण अधिक है। यदि हर मां गर्भावस्था से पहले डॉक्टर की सलाह का पालन करे तो प्रसवपूर्व और मातृ मृत्यु दर को भी कम किया जा सकता है। इसके साथ ही हर डिलीवरी अस्पताल में होनी चाहिए।

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