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सबका प्यारा, सबका दुलारा ‘दाेपहर का सामना’

सबका प्यारा, सबका दुलारा
‘दाेपहर का सामना’।
भ्रष्टाचारियों का आईना
‘दोपहर का सामना’।
हिंदी पाठकों की भावना
‘दोपहर का सामना’।
अखबार नहीं, ये एक अंगार है,
खलनायकों पर लटकती ये तलवार है।
अखबार नहीं, ये एक पूरा संसार है।
रखता सब पर नजर, देता सबकी खबर।
जीवन का एक हिस्सा है ‘दोपहर का सामना’,
प्रतिदिन पेश करता है एक किस्सा ‘दोपहर का सामना’।
जनता के पक्ष में, जनता की आवाज है,
सबको इस पर नाज है।
कितने सांध्य दैनिक चले बंदी की राह पर,
आज भी ‘दोपहर का सामना’ है बुलंदी की राह पर।
‘अनिल’ का तीव्र झोंका, किसी ने रोका।
अख़बारों में नामी है ‘दोपहर का सामना’,
देशद्रोहियों के लिए सूनामी है ‘दोपहर का सामना’।

– लक्ष्मीकांत रा. चौरसिया , वरली

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