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शिक्षा पर खर्च घटा …तंबाकू, गुटखा व शराब पर बढ़ा! …सर्वे में हुआ चौंकानेवाला खुलासा

सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान में लोगों के खर्च करने के तरीके में बदलाव आया है और पिछले दस वर्षों में हिंदुस्थानियों ने शिक्षा पर तो खर्च कम किया है, लेकिन तंबाकू-गुटखा और शराब जैसे नशीले पदार्थों पर खर्च बढ़ा दिया है। यह बदलाव ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से दिखाई दिया है। देशभर में हुए इस सरकारी सर्वेक्षण ने सबको चौंका दिया है।
पिछले सप्ताह जारी घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण २०२२-२३ से पता चलता है कि कुल घरेलू खर्च के एक हिस्से के रूप में पान, तंबाकू और नशीले पदार्थों पर खर्च ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बढ़ गया है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में इन चीजों पर खर्च २०११-१२ के ३.२१ प्रतिशत से बढ़कर २०२२-२३ में ३.७९ प्रतिशत हो गया है। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में खर्च २०११-१२ के १.६१ प्रतिशत से बढ़कर २०२२-२३ में २.४३ प्रतिशत हो गया।
शिक्षा पर कम खर्च कर रहे लोग
शहरी क्षेत्रों में शिक्षा पर खर्च का अनुपात २०११-१२ के ६.९० प्रतिशत से घटकर २०२२-२३ में ५.७८ प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात २०११-१२ के ३.४९ प्रतिशत से घटकर २०२२-२३ में ३.३० प्रतिशत रह गया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय ने अगस्त २०२२ से जुलाई २०२३ तक घरेलू उपभोग-व्यय सर्वेक्षण किया।
इन पर हो रहा ज्यादा खर्च
घरेलू उपभोग व्यय से संबंधित इस सर्वेक्षण का मकसद प्रत्येक परिवार के मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग-व्यय के बारे में जानकारी हासिल करना है। इसके तहत देश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों, राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों के लिए अलग-अलग रुझानों का पता लगाया जाता है। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि शहरी क्षेत्रों में पेय पदार्थों और प्रोसेस्ड फूड पर खर्च २०११-१२ के ८.९८ प्रतिशत से बढ़कर २०२२-२३ में १०.६४ प्रतिशत हो गया है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा २०११-१२ के ७.९० प्रतिशत से बढ़कर २०२२-२३ में ९.६२ प्रतिशत हो गया है।

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