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फडणवीस ने जब से संभाला है गृह मंत्रालय तब से बढ़ा है अपराध का ग्राफ … सुप्रिया सुले का जोरदार हमला

सामना संवाददाता / मुंबई
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जब से गृह मंत्री पद का दारोमदार संभाला है, तभी से ही महाराष्ट्र में अपराध का ग्राफ बढ़ गया है। वे यह जिम्मेदारी संभालने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। इस तरह का हमला बोलते हुए राकांपा की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस में अधिकारियों का लगातार ट्रांसफर किया जा रहा है। उन्हें पारदर्शिता से काम करने की अनुमति नहीं है। केंद्र सरकार ने १५ दिन पहले एक नया अपराध विधेयक पेश किया है, जिसमें फोन टैपिंग को मंजूरी दे दी गई है। सुले ने यह भी दावा किया है कि गृह मंत्रालय पूरी तरह से विफल हो गया है।
राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने एक प्रेस कॉन्प्रâेंस में मीडिया से बात करते हुए कहा कि आंबेडकर परिवार ने कई वर्षों तक महाराष्ट्र और देश के सामाजिक कार्यों में बहुत योगदान दिया है। वंचित बहुजन आघाड़ी प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने भी अच्छा काम किया है। संविधान और देश को बचाने के लिए प्रकाश आंबेडकर की जरूरत है। उन्हें नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करना चाहिए। सुले ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि इंडिया गठबंधन में भी उनकी बड़ी भूमिका रहनेवाली है। सुप्रिया सुले ने कहा कि हम सभी ने संविधान और देश की प्रगति के लिए एक साथ आने का फैसला किया है।
तय हुआ महाविकास आघाड़ी का फॉर्मूला!
लोकसभा चुनाव के लिए महाविकास आघाड़ी का फॉर्मूला तय हो चुका है, बस उस पर मुहर लगनी बाकी है। यह फॉर्मूला कई महीने पहले दिल्ली में तय हुआ था। सुले ने यह भी बताया कि महाविकास आघाड़ी जल्द ही सीट आवंटन को लेकर पैâसला लेगी। मैं एक छोटी कार्यकर्ता हूं। सुप्रिया सुले ने यह भी कहा कि इस समय जनता की सेवा और लोकसभा में भागीदारी ही उनकी जवाबदारी है।
दूसरे राज्यों में भेजी जा रही महाराष्ट्र की परियोजनाएं
महाराष्ट्र में आनेवाली परियोजनाएं दूसरे राज्यों में भेजी की जा रही हैं। निवेश नहीं हो रहा है। यह महाराष्ट्र के साथ अन्याय है। महाराष्ट्र की ट्रिपल इंजन सरकार इस पर चुप है। सुले ने कहा कि खोके सरकार के पास २०० विधायक होने के बावजूद कोई भी महाराष्ट्र के साथ हो रहे अन्याय के बारे में बात नहीं कर रहा है।
पारदर्शी होना चाहिए लोकसभा चुनाव
सुले ने कहा कि साल २०२४ में दुनिया भर के कई देशों में चुनाव होंगे। हमारे देश में चुनाव पारदर्शी और बिना किसी दबाव के होने चाहिए। यह साल सामाजिक और राजनीतिक तौर पर बेहद अहम साल है। अगर विदेशों में ईवीएम को लेकर संदेह जताया जा रहा है तो पीएम नरेंद्र मोदी को सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस पर बात करनी चाहिए। वह सिर्फ भाजपा के ही नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री भी हैं। सुले ने ईवीएम को लेकर तंज कसते हुए कहा कि नकल करके पास होने की तुलना में पढ़ाई करके पास होना हमेशा बेहतर होता है।

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