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कटआउट से फडणवीस आउट … एकनाथ ने छोड़ा साथ! देवेंद्र टेंशन में!!

रामदिनेश यादव

शिवसेना और शिवसैनिकों के साथ घात करने वाले एकनाथ शिंदे की प्रवृत्ति दगा देने वाली हो चुकी है। शिंदे ने पहले शिवसेना को दगा दिया, फडणवीस का हाथ पकड़ कर भाजपा के सहयोग से राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। सुनने में आ रहा है कि अब वे फडणवीस को भी डिच्चू (धोखा) दे रहे हैं। एकनाथ ने उनका साथ छोड़ दिया है। इससे देवेंद्र टेंशन में आ गए हैं। फडणवीस को लग रहा है कि एकनाथ शिंदे उनके सहयोग से सीएम बने हैं, इसलिए शिंदे हमेशा उनके साथ रहेंगे और उन्हें कभी दगा नहीं देंगे। लेकिन शायद वे गलतफहमी में हैं। शिंदे ने अब प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से नजदीकियां बढ़ा ली हैं। वे अब सीधे मोदी और शाह से बात करते हैं। ऐसे में फडणवीस को विश्वास में लेने की भी उन्हें जरूरत नहीं पड़ती है। यहां तक कि अब वे भाजपा के दिग्गज नेता फडणवीस को अपना नेता भी नहीं मानते हैं। यही वजह है कि २२ जनवरी को अयोध्या के राममंदिर में प्राणप्रतिष्ठा के लिए मुंबई में जो बैनर लगाए गए उनमें फडणवीस को महत्त्व नहीं दिया गया। फडणवीस की फोटो को ही गायब कर दिया गया। शिंदे के जो पोस्टर व कटआउट लगाए गए, उसमें से फडणवीस आउट नजर आए।
सूत्रों के अनुसार २२ जनवरी को पूरे मुंबई और ठाणे में शिंदे और उनके समर्थकों के पोस्टरों में मोदी-शाह का फोटो ही लगाया गया। मतलब साफ है कि एकनाथ शिंदे के नेता अब मोदी शाह हो गए हैं और फडणवीस को उन्होंने डिच्चू यानी धोखा दे दिया है। इससे पहले युति सरकार में देवेंद्र मुख्यमंत्री थे और एकनाथ शिंदे सार्वजानिक निर्माण मंत्री थे। शिंदे, फडणवीस को हमेशा अपने से बड़ा नेता मानते थे, लेकिन अब शिंदे ने जो काम किया है, उससे भाजपाइयों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। भाजपाई अपने कलेजे पर पत्थर रखकर यह सब बर्दाश्त कर रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। कई बार फडणवीस के समर्थकों और भाजपाइयों ने कहा कि वे शिंदे पर भरोसा नहीं करते हैं। शिंदे को कलेजे पर पत्थर रखकर सीएम बनाया है।


विज्ञापन पर रार
इससे पहले भी राजनीतिक रूप से फडणवीस को गायब करने की योजना पर शिंदे काम कर चुके हैं। इनके बीच पोस्टर और विज्ञापन वॉर नया नहीं है। पिछले साल शिंदे ने एक विज्ञापन जारी कर दावा किया कि वे राज्य के सबसे पसंदीदा नेता हैं। उन्होंने फडणवीस को बहुत पीछे छोड़ दिया, जिसके बाद फडणवीस को तगड़ा झटका लगा और उन्होंने तुरंत दूसरे दिन विज्ञापन जारी कर डैमेज कंट्रोल करने के लिए नया विज्ञापन दिया, जिसमें खुद को जनता की पसंद बताया। उस विज्ञापन वॉर के आलावा भी कई बार दोनों के बीच रार सामने आई है।
सरकारी निर्णय में भी वर्चस्व की लड़ाई
एकनाथ शिंदे भले ही सीएम हैं, लेकिन देवेंद्र फडणवीस ही खुद को इस सरकार का सीएम मानते हैं। भाजपा वाले खुलकर कहते हैं कि शिंदे को तो ऐसे ही बनाया है, असली सीएम तो देवेंद्र फडणवीस हैं। शायद यही वजह ऊपर से भले ही नजर नहीं आए पर फडणवीस कहीं न नहीं घुटन महसूस करते हैं। सरकार में दोनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिलती है। मुंबई मनपा में कई बार एकनाथ शिंदे के निर्णय को देवेंद्र फडणवीस ने रोका है तो फडणवीस के आदेश को शिंदे ने कई बार रोकने के लिए फोन किया है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच भितरघात शुरू है।

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