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फडणवीस ने गुप्त बैठक लेकर वेदांता-फॉक्सकॉन को गुजरात भेजा!… आदित्य ठाकरे का गंभीर आरोप

सामना संवाददाता / मुंबई
वेदांता-फॉक्सकॉन परियोजना १०० फीसदी नहीं, बल्कि एक हजार फीसदी महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में महाराष्ट्र में आनेवाली थी। मगर वर्तमान ‘ईडी’ सरकार के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ हुई एक गुप्त बैठक के बाद यह परियोजना महाराष्ट्र से गुजरात ले जाई गई। यह गंभीर आरोप शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने ‘ईडी’ सरकार पर लगाया है। आदित्य ठाकरे ने कल एक पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए इस संबंध में प्रमाण भी प्रस्तुत किए।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि वेदांता-फॉक्सकॉन जैसी दर्जनों कंपनियां राज्य से बाहर चली गर्इं। इसके लिए जिम्मेदार और अपनी नाकामी को छुपाने के लिए ‘खोके’ सरकार खोटे (झूठ) बोल रही है। लेकिन इस मामले में ‘ईडी’ सरकार का झूठ पकड़ा गया है।

वेदांता-फॉक्सकॉन परियोजना के गुजरात जाने के मामले से ‘ईडी’ सरकार अपना पल्ला झाड़ती रही है। मगर अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने इस परियोजना के गुजरात ले जाए जाने के पीछे की साजिश का पर्दाफाश किया है। इस परियोजना के गुजरात जाने के पहले उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक गुप्त बैठक की थी। कल एक पत्रकार परिषद में उन्होंने प्रमाण के साथ ‘ईडी’ सरकार की साजिश पर से पर्दा हटाते हुए स्पष्ट शब्दों में सीधा सवाल पूछा कि आखिर उपमुख्यमंत्री फडणवीस के साथ हुई उस गुप्त बैठक में ऐसा क्या हुआ, जो वेदांता को गुजरात जाने के लिए मजबूर होना पड़ा? उपमुख्यमंत्री इस गुप्त बैठक का राज खोलें। आदित्य ठाकरे ने इस विषय पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को खुली चर्चा के लिए चुनौती देते हुए कहा कि वेदांता-फॉक्सकॉन मामले में मुख्यमंत्री के साथ वे किसी भी समय डिबेट के लिए तैयार हैं। अन्य लोगों से कोई उम्मीद नहीं है। पत्रकार परिषद के दौरान उन्होंने वेदांता-फॉक्सकॉन से जुड़े दस्तावेजों को पेश करते हुए संदेह व्यक्त किया कि उक्त कंपनी को गुजरात भेजने की साजिश हुई है।
शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने शिंदे सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वह महाराष्ट्र में परियोजनाओं को अन्य राज्यों में स्थानांतरित करने के मुद्दे पर मीडिया के सामने चर्चा करें। उन्होंने कहा कि भले ही राज्य में एक असंवैधानिक सरकार है लेकिन महाराष्ट्र को आगे बढ़ाने की उसकी जिम्मेदारी है। राज्य में किसानों की दशा बिगड़ती जा रही है। युवा बेरोजगार हो रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार के मंत्री ही महिलाओं को अपशब्द कह रहे हैं। उनके बारे में सरकार एक शब्द नहीं बोलती है, कोई कार्रवाई नहीं होती है। ऐसी सरकार से अब जनता को कोई अपेक्षा नहीं रही।
राज्य में उद्योग और रोजगार दोनों चौपट हो रहे हैं। उद्योग के लिए हमारी महाविकास आघाड़ी सरकार ने अपने कार्यकाल में जिन कंपनियों साथ समझौते किए थे, उनमें से कुछ को अब तक मंजूरी नहीं दी गई है, जबकि कुछ को महीनों इंतजार करना पड़ा है। हमारी सरकार कोरोना काल मे भी निवेश लाने में जुटी थी। महाविकास आघाड़ी सरकार ७ लाख करोड़ का निवेश लाई थी। लेकिन ‘ईडी’ सरकार मविआ पर उल्टे आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि ‘ईडी’ सरकार के झूठ से अब पर्दा उठ रहा है सरकार की हकीकत अब जनता के सामने आ रही है। इस सरकार से अब लोगों का भरोसा उठ गया है।
कश्मीरी पंडित की मुसीबत बरकरार
आदित्य ठाकरे ने कहा कि जो लोग कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि आज भी कश्मीरी पंडितों की दशा वहां अच्छी नहीं है। आज भी वे लोग डर के साये में जी रहे हैं और उनकी आवाज कोई सुन भी नहीं रहा है। कश्मीर में कई पंडितों की बेरहमी से हत्या की जा रही है।

महाराष्ट्र में परियोजना एक हजार फीसदी आनेवाली थी, ये लो प्रमाण!
आदित्य ठाकरे ने आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेज मीडिया को दिखाते हुए बताया कि ये लो प्रमाण, २६ अगस्त को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और २९ अगस्त को उपमुख्यमंत्री के साथ वेदांता-फॉक्सकॉन वालों की बैठक हुई। इस बैठक की जानकारी मीडिया के समक्ष रखी जानी थी, किंतु बैठक की किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई। उधर एमआईडीसी ने वेदांता के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल को पत्र लिखकर उन्हें कंपनी स्थापित करने के लिए सभी छूट की जानकारी देते हुए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर के लिए आमंत्रित किया। इसका मतलब है कि वह कंपनी १००० फीसदी महाराष्ट्र में अपना प्रोजेक्ट लगाने में रुचि ले रही थी। आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि इतना सब होने के बाद वेदांता कंपनी वैâसे गुजरात गई? फडणवीस के साथ हुई बैठक में क्या हुआ? वैâसे हुआ? किसने किया? क्यों किया? जैसे कई सवाल उपस्थित हो रहे हैं। फडणवीस को इन सवालों के जवाब देना चाहिए।

महाराष्ट्र की छवि मलिन कर रहे हैं राज्यपाल!
आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य में ‘ईडी’ सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार अब तक नहीं हुआ है। सरकार जनता के हित के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रही है। ऐसे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, जो महाराष्ट्र की छवि मलिन कर रहे हैं। वे छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में टिप्पणी करते हैं और उन्हें केंद्र सरकार तलब तक नहीं करती। आखिर उन्हें पदमुक्त क्यों नहीं किया जाता है? यह सवाल उन्होंने उपस्थित किया।

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