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यूपी में फर्जी बैंक खाते का झोल! …कानपुर में मिले १७१ संदिग्ध खाते

• मचा हड़कंप, केस दर्ज
• दहशतगर्दों को फंडिंग की आशंका

विक्रम सिंह / कानपुर । यूपी के कानपुर महानगर में देश के अर्थतंत्र को चकमा देकर बड़े पैमाने पर फर्जी नाम पते पर बैंक खाते खोले जाने का मामला सामने आने से सरकारी मशीनरी में हड़कंप मच गया है। वित्त विभाग ने विभिन्न बैंकों में १७१ संदिग्ध खातों की जानकारी पुलिस को दी है। जिनके जरिये दहशतगर्दों , नक्सलियों व ठगों को बड़े पैमाने पर रकम का लेनदेन करने की आशंका है। फिलहाल क्राइम ब्रांच ने कोतवाली और नौबस्ता थाने में दो-दो केस दर्ज कराए हैं। साथ ही मामले की तह तक पहुंचने के लिए सघन जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय बैंकों में हो रहे लेनदेन की निगरानी करता है। इस दौरान शहर के कई बैंक खातों से संदिग्ध लेनदेन पकड़ा गया। इस तरह के १७१ खातों की जानकारी मंत्रालय ने पुलिस को दी।

रिपोर्ट के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने खातों की जांच कर उनका सत्यापन किया। इसमें पता चला कि खाताधारकों के नाम और पते फर्जी हैं। इनमें विदेश से भी लेनदेन हुआ है। कई और बड़ी गड़बड़ियां भी सामने आईं। डीसीपी (पूर्वी) प्रमोद कुमार ने बताया कि क्राइम ब्रांच से ही इसकी तहकीकात की जाएगी।

बड़े आर्थिक अपराध की ओर इशारा
जानकारों के अनुसार, बैंक अपने स्तर से संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखते हैं। इससे संबंधित रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को भेजी जाती है। वहां से तय होता है कि इसमें किस तरह की जांच होगी। इसमें ये भी हो सकता है कि ये खाते ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे हों या इनके जरिये कालेधन का लेनदेन किया गया हो या फिर नियम विरुद्ध तरीके से विदेश से लेनदेन किया गया हो। आशंका है कि इन खातों को अपराध में इस्तेमाल किया गया हो। ये अपराध किस स्तर का है, ये जांच में स्पष्ट होगा। आतंकवाद, नक्सलवाद में भी फंडिंग की आशंका है।मंत्रालय से करीब एक दर्जन ऐसे संदिग्ध खातों का ब्योरा कानपुर पुलिस को सौंपा गया है। कई खातों की जांच पूरी हो चुकी है, जिसमें गड़बड़ियां नहीं मिली हैं। उसकी रिपोर्ट क्राइम ब्रांच मंत्रालय को भेजेगी। वहीं कइयों की जांच जारी है। सचेंडी के एक खाते में ठगी की रकम जमा करने का अंदेशा है। वजह यह कि इसमें बार-बार रकम जमा कर बैंक से शिकायत दर्ज कर वापस मांगी गई है। इसमें भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है। कुल १७१ में से ९५ खाते दक्षिण क्षेत्र की बैंकों में खुलवाए गए हैं। ज्यादातर खाते एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक की शाखाओं के हैं।

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