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गिर रहे स्लैब ने उड़ाई सीवुड में सिडको सोसायटी की नींद 

•  एक माह में छह बार गिर चुका है
•  स्लैब दहशत के साए में जी रहे हैं लोग  

मनमोहन भारती / नई मुंबई
नई मुंबई के सीवुड इलाके में सिड़को द्वारा बनाए गए फ्लैटों की दशा का अंदाज सिर्फ जुलाई महीने में ही स्लैब गिरने व प्लास्टर भरभरा कर गिरने की घटनाओं से लगाया जा सकता है। इस एक महीने के भीतर ६ बार स्लैब गिरने की घटना से सिडको सोसायटी में रहने वाले लोग दहशत के साये में जी रहे है।
ज्ञात हो कि २२ जुलाई की रात तकरीबन दो बजे, सीवुड सेक्टर ४८ स्थित गायत्री सोसाइटी में रहने वाले चंद्रकांत मोहिते के बेडरूम का स्लैब अचानक गिर गया। सौभाग्य से उनके बेटे को ज्यादा चोट नहीं आयी। इस घटना से पहले २ जुलाई को भी इसी सोसाइटी में रहने वाले भीमराव मंगल के फ्लैट का प्लास्टर उखड़ कर गिर गया था और १५ जुलाई को फ्लैट नंबर ४१ निवासी बनसोडे के बेडरूम में ऐसी ही एक घटना की पुनरावृत्ति हुई थी। २३ जुलाई को सुख सागर सोसायटी के फ्लैट नंबर १, २९ जुलाई को साई संगम सोसायटी के फ्लैट नंबर ६ और जुलाई महीने के खत्म होते-होते ३० जुलाई को विलास बागड़ी के फ्लैट का सीलिंग व प्लास्टर भरभरा कर गिर गया। स्लैब गिरने व प्लास्टर भरभरा कर गिरने की इन घटनाओं से सिड़को द्वारा बनाए गए फ्लैटों की दशा का अंदाज लगाया जा सकता है।
सीवुड सिड़को सोसाइटी में हो रही इन घटनाओं से गुस्साए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के विभागप्रमुख विशाल विचारे कहते हैं, `इन घटनाओं से सोसाइटी में रहने वाले लोगों में डर बैठ गया है। सोचने की बात तो यह है कि बार-बार शिकायत के बावजूद सिडको आखिर चुप क्यों बैठी है? क्या उसे किसी बड़े हादसे का इंतजार है? क्या सिड़को चाहती है कि हम उनके खिलाफ अपने तरीके से आंदोलन करें?
सिड़कों ने १९९८ में सीवुड में ३२ सोसाइटी का निर्माण किया था। इन सोसाइटियों में ढाई सौ से अधिक इमारतें हैं जिनमें तीन हजार से ज्यादा फ्लैट हैं। सोसाइटीवालों का आरोप है कि सिडको ने घटिया दर्जे का कार्य किया है। यही वजह है कि इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। अन्नपूर्णा सोसाइटी के निवासी बताते हैं कि यहां के कई फ्लैट के स्लैब और दीवारों के प्लास्टर निर्माण कार्य के २ साल बाद ही गिरने लगे थे। नितिन पवार बताते हैं,`निवासियों ने २०१० में सिडको के खिलाफ आंदोलन किया था, जिसके बाद सिडको ने मरम्मत कार्य किया लेकिन अब सिडको की लापरवाही का आलम यह है कि घरों के स्लेब गिर रहे हैं और सिडको आंखें मूंद कर बैठी है।’

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