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बहुचर्चित विजय इक्का हत्याकांड : तत्कालीन हाइवे थाना प्रभारी को दस साल की सजा, एक लाख का जुर्माना

-पुलिस हिरासत में सन् 2000 में हुई भी विजय इक्का की मौत

डॉ.कमलकान्त उपमन्यु
मथुरा। सेंट फ्रांंसिस स्कूल के डकैती कांड में पूछताछ करने को लेकर आई स्कूल के ही रसोई (कुक) विजय इक्का की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मुकदमा का निर्णय हो गया। करीब 24 साल बाद आए बहुचर्चित कांड में एडीजे चतुर्थ डा. पल्लवी अग्रवाल की अदालत ने तत्कालीन नरहौली (हाइवे) थाना प्रभारी सुनील कुमार शर्मा को दस साल की सजा सुनाई है। एक लाख रुपए का भी अर्थदंड भी किया है। चार अन्य पुलिसकर्मियों को अदालत ने बरी कर दिया है।
मुकदमे की शासन की तरफ से पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता हेमेन्द्र भारद्वाज ने यह जानकारी देते हुए बताया, थाना नरहौली (हाइवे) क्षेत्र के सेंट फ्रांसिस स्कूल में 7 जून 2000 को डकैती की वारदात हुई थी। स्कूल के शिक्षक ब्रदर जार्ज क्रूजी की डकैतों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस जघन्य वारातद के संबंध में पूछताछ के लिए शक के आधार पर थाना हाइवे पुलिस ने स्कूल के कुक का कार्य करने वाले विजय इक्का को उठा लिया था। थाने में पूछताछ के बाद पुलिस विजय इक्का को रिजर्व पुलिस लाइन लाई। पुलिस लाइन के बाथरूम में 17 जून 2000 को विजय इक्का का शव लटका मिला था। पुलिस हिरासत में हुई विजय इक्का की मौत का मामला गरमा गया था। तत्कालीन नरहौली (हाइवे) थाना प्रभारी सुनील कुमार शर्मा, हेडकांस्टेबल राधेश्याम सिंह पुत्र सीताराम और उपनिरीक्षक जमील मोहम्मद रावत पुत्र मकसूद अली रावत निवासी ग्राम गंगावली थाना बीवीनगर बुलंदशहर, सिपाही दिनेश उपाध्याय पुत्र रामभरोसे निवासी मजटीला थाना ढकी आगरा, कांस्टेबल क्लर्क रामानन्द यादव पुत्र शंकर लाल यादव निवासी मटपुरा थाना सैफई इटावा के खिलाफ 18 जून 2000 को पुलिस हिरासत में साजिश के तहत कुक विजय इक्का की हत्या किए जाने का मुकदमा थाना सदर बाजार में दर्ज हुआ था। थाना सदर बाजार पुलिस ने आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और जांच कर आरोप पत्र भी पुलिस ने अदालत में भी दाखिल कर दिया। इस मुकदमें की सुनवाई एडीजे चतुर्थ डा. पल्लवी की अदालत में हुई। एडीजीसी हेमेन्द्र भारद्वाज ने बताया, अदालत ने बहुचर्चित विजय इक्का हत्याकाण्ड में तत्कालीन नरहौली (हाइवे) थानाध्यक्ष सुनील कुमार शर्मा को गैर इरादतन तरीके से विजय इक्का की हत्या का दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कारावास और एक लाख रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने राधेश्याम सिंह, जमील मोहम्मद रावत, दिनेश उपाध्याय और रामानन्द यादव को बरी कर दिया है। निर्णय के बाद अदालत ने सुनील का सजा भुगताने के लिए वारंट बनाकर जेल भेज दिया।

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