" /> कृषि कानूनों के खिलाफ और तेज होगा आंदोलन! किसान नेताओं का प्लान तैयार

कृषि कानूनों के खिलाफ और तेज होगा आंदोलन! किसान नेताओं का प्लान तैयार

कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार और किसानों के बीच टकराव और बढ़ गया है। किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को बुधवार को सिरे से खारिज कर दिया। किसान नेताओं ने इसके साथ ही एलान कर दिया है कि कृषि कानूनों के रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने आंदोलन तेज करने की रूपरेखा भी तय की है।
बता दें कि सरकार ने कल सुबह किसानों को प्रस्ताव भेजा था, जिसमें एमएसपी को लेकर गारंटी की बात की गई थी। उम्मीद थी कि बात बन जाएगी लेकिन किसानों ने प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। सरकार की ओर से मिले प्रस्ताव के बाद किसान नेताओं ने सिंघु बॉर्डर पर मीटिंग की। बैठक के बाद किसानों ने औपचारिक प्रेस कांफ्रेंस करके अपनी बात कही, जिसमें आगे का प्लान बताया गया।
पांच दौर की बातचीत के बाद सरकार की ओर से किसानों को लिखित में प्रस्ताव भेजा गया था। इस लिखित प्रस्ताव में एमएसपी की गारंटी समेत मंडी को लेकर वादे किए गए। कृषि कानूनों को वापस लेने पर तो सरकार राजी नहीं है लेकिन संशोधन प्रस्तावों में एपीएमसी को मजबूत करने की बात है। विवाद की सूरत में स्थानीय अदालत जाने का अधिकार दिया गया है। पराली जलाने पर सख्त कानून में ढील की भी बात कही गई। कृषि कानूनों के विरोध में किसान १४ दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर डेरा डाले हैं। सरकार और किसानों के बीच अब तक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है। सभी बातचीत बेनतीजा रही। कल छठे दौर की वार्ता होनी थी लेकिन उससे पहले मंगलवार शाम को गृहमंत्री अमित शाह की किसान नेताओं से मुलाकात हुई। ये बातचीत भी बेनतीजा रही, जिसके बाद किसान नेताओं ने आज होनेवाली वार्ता को स्थगित करने की बात कही। कल की बैठक में तय हुआ था कि सरकार किसानों को लिखित में प्रस्ताव भेजेगी। सरकार की ओर से इसे कल भेजा गया लेकिन किसानों को ये पसंद नहीं आया। बता दें कि सरकार जहां कृषि कानूनों को वापस न लेने पर अड़ी है तो किसान कृषि कानून को रद्द किए जाने की मांग पर अडिग हैं।

किसानों का क्या है आगे का प्लान?
रिलायंस के प्रोडक्‍ट्स का बहिष्कार करने का एलान
१४ दिसंबर को देशभर में धरना-प्रदर्शन होगा
दिल्ली की सड़कों को करेंगे जाम
दिल्ली-जयपुर, दिल्ली-आगरा हाइवे को १२ दिसंबर को रोका जाएगा
पूरे देश में आंदोलन तेज होगा
सरकार के मंत्रियों का घेराव होगा
१४ दिसंबर को भाजपा के ऑफिस का घेराव होगा
१४ दिसंबर को हर जिले के मुख्यालय का घेराव होगा
१२ दिसंबर को सभी टोल प्लाजा फ्री करेंगे
कृषि कानूनों के वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा
दिल्‍ली और आस-पास के राज्‍यों से ‘दिल्‍ली चलो’ की हुंकार भरी जाएगी

रद्द हो कृषि कानून! राष्ट्रपति से मिलने के बाद बोले विपक्षी नेता
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन के बीच विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत विपक्ष के ५ नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। राष्ट्रपति से मिलने के बाद विपक्षी नेताओं ने एक सुर में कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की बातों को समझे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि किसानों ने देश की नींव रखी है। वो दिन-रात काम करते हैं। ये कानून किसानों के हित में नहीं हैं। तीनों बिल संसद से बिना चर्चा के पास हुए। राहुल गांधी ने कहा कि किसानों की शक्ति के सामने कोई खड़ा नहीं हो सकता। हिंदुस्थान का किसान हटेगा नहीं, डरेगा नहीं। जब तक कानून रद्द नहीं होते तब तक वे डटे रहेंगे, वहीं सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि हमने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है। हम कृषि कानूनों और बिजली संशोधन बिल को रद्द करने के लिए कह रहे हैं, जो बिना लोकतांत्रिक तरीके से पारित किए गए थे। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि इस ठंड में देश के किसान सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे नाखुश हैं। सरकार की ड्यूटी है कि वो मामले का समाधान निकाले।