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योगी सरकार को किसानों की ललकार! `जब तक आवारा पशु नहीं हटेंगे, तब तक तार नहीं कटेंगे’

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खेतों से कंटीले तार हटाने के आदेश के बाद किसान परेशान हैं। फसलों को बचाने के लिए उन्हें खेतों में १२ से १३ घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है। किसानों की मांग है कि सरकार पहले छुट्टा जानवरों को नियंत्रित करे, फिर वे खेतों के किनारे लगे अपने कंटीले तार खुद ही हटा लेंगे।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में जानवरों को खेत में घुसने से रोकने के लिए साधारण रस्सी का प्रयोग करने का आदेश दिया था। खेत में ब्लेड या कंटीले तारों का प्रयोग करनेवाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया है। अब किसान सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। सरकारी फरमान के पक्षकारों का दावा है कि फसल को बचाने के लिए लगाए जानेवाले कंटीले तारों की वजह से अक्सर जानवर घायल और अपंग हो जाते हैं। कई बार तो जानवरों की मौत तक हो जाती है। जवाब में भारतीय किसान यूनियन ने सीएम योगी को पत्र लिख कर मांग की है कि सरकार पहले अपने सरकारी गौशालाओं से कंटीले तार हटाए।
बता दें कि नवरात्रि में लखीमपुर और उन्नाव में ट्रैक्टर ट्रॉली से जा रहे श्रद्धालुओं की अलग-अलग हुई दुर्घटना में ३७ श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। उसके बाद यूपी सरकार ने ट्रैक्टर ट्रॉली से सवारी ढोने पर रोक लगाने का आदेश दिया था। लखीमपुर कांड के एक वर्ष पूरा होने आए किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिवैâत ने जिसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि किसानों का प्रमुख ट्रांसपोर्ट ट्रैक्टर ट्राली ही है। सरकार नहीं चाहती कि किसान अपने कार्यक्रमों में इकट्ठा हों, इसलिए उसने ट्रैक्टर ट्राली पर प्रतिबंध लगाया है। क्या सरकार ने कभी रेल, बस या बाइक से एक्सीडेंट होने के बाद उस पर प्रतिबंध लगाया है, लखनऊ के बन्नी राय गांव में किसान सरकार के इस आदेश से परेशान हैं। यहां के किसानों का कहना है कि खेतों के किनारे से वंâटीले तार हटा दिए हैं। इसके बाद से ही वे अपनी फसल बचा पाने में असमर्थ हैं। उन्हें खेतों में जानवरों से फसलों को बचाने के लिए १२ से १३ घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है। किसानों की मांग है कि सरकार पहले छुट्टा जानवरों को नियंत्रित करे, फिर वे खेतों के किनारे लगे अपने कंटीले तार खुद हटा लेंगे। इस मामले में गांव के प्रधान बद्री ने कहा कि गांव के पास गौशाला है। उस गौशाला में सरकार ने वंâटीले तार लगाए हैं। इसका मकसद अभी तक समझ में नहीं आया हमें। सरकार गौशालाओं में इन तारों को लगवा सकती है, लेकिन खेतों में हम अपनी फसल को बचाने के लिए ये तार क्यों नहीं लगवा सकते हैं। सरकार पहले गौशालाओं से कंटीले तार हटवाए, फिर हम कुछ सोचेंगे। गांव के रहनेवाले मायाराम और उनके परिवार के लोग अपने खेतों को जानवरों से बचाने के लिए दिन भर खड़े रहते हैं। बता दें कि भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा के मुताबिक, `हम किसान वंâटीले तार लगाना नहीं बंद करेंगे। सरकार को पहले सोचना चाहिए कि फसल बर्बाद हो गई तो हम कहां से वापस लाएंगे? गौशालाओं में भी कंटीले तार लगे हुए हैं। गायों को उससे भी चोट लगती होगी। क्या यह सरकार को ये दिखाई नहीं देता। हम किसान खेतों से तार तभी हटाएंगे जब आवारा जानवरों का इंतजाम हो जाए। अगर सरकार इस पर कुछ नहीं करती तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे।

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