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किसानों की आय जस की तस! …आय दुगना करना साबित हुआ जुमला

चालू वित्त वर्ष में कृषि विकास दर गिरी
पिछले वर्ष ४ज्ञ् की तुलना में इस वर्ष १.८ज्ञ् रहने का अनुमान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २०१४ में सत्ता संभालते वक्त कहा था कि उनका लक्ष्य है देश में किसानों की आय को दोगुना करना और वे इसे करके रहेंगे। इस बात को अब करीब १० साल बीतने को आए, पर यह जुमला ही साबित हुआ। किसानों की आय दोगुना होना तो दूर वह जस की तस है। बल्कि अब तो खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में आय दुगना करने की बात सिर्फ जुमला साबित हुआ है। इस साल तो हालत काफी बुरी नजर आ रही है। खेती की विकास दर खात्मे की तरफ बढ़ रही है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जानकारों ने खेती की विकास दर इस चालू वित्त वर्ष में सिर्फ १.८ फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया है।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि कृषि क्षेत्र की वृद्धि उतनी नहीं है जितना सरकार मानकर चल रही थी। सरकार का इरादा कृषि आय को दोगुना करने का था लेकिन महंगाई की वजह से इसे अभी तक हासिल नहीं किया जा सका है। सकल घरेलू उत्पाद के अग्रिम अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर १.८ प्रतिशत रहने का अनुमान है। २०२२-२३ में यह चार प्रतिशत रही थी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि लेखानुदान का मुख्य उद्देश्य सरकार को अगले वित्त वर्ष के चार महीनों के लिए वेतन, मजदूरी, ब्याज और कर्ज भुगतान के लिए पैसा खर्च करने की अनुमति देना है। लेकिन समाज के कुछ वर्ग दबाव में हैं। क्या उनके लिए कोई कदम उठाने हेतु चार-पांच माह और इंतजार किया जा सकता है। यदि पांच महीने बाद कुछ किया जाएगा तो उनकी स्थिति और खराब हो जाएगी। अंतरिम बजट में इस वर्ग के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं। दरअसल, महंगाई का असर साफ तौर पर खेती पर पड़ा है। खेती के बीज और उर्वरक काफी महंगे हो गए हैं। मौसम के उतार-चढ़ाव का बुरा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ा है। बेमौसम की बारिश के कारण भी काफी फसलें खराब हो गईं।

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