एहसान और एहसास

रिश्ते कामयाब नहीं होंगे जहां एहसान होता है,
रिश्ते कामयाब वहीं होंगे जहां एहसास होता है।
दबाव में बने रिश्तों में एहसान होता है,
स्वेच्छा से बने रिश्तों में एहसास होता है।
एहसान तो हमें अपनों से दूर कर देता है,
एहसास तो परायों को भी पास ले आता है।
एहसान ने संबंधों में छोटे-बड़े का बीज बोया है,
एहसास ने हमेशा छोटे बड़े का दायित्व निभाया है।
एहसान तो समय समय पर बदलाव चाहता है,
एहसास तो हमेशा समय की पहचान दर्शाता है।
एहसान सदैव अपना किया जताता है
एहसास तो अनवरत अभिव्यक्ति चाहता है।
एहसान ने हमेशा व्यक्ति को मजबूर किया है,
एहसास ने हमारे साहस को संबल दिया है।
एहसास वो एहसास होता है जहां रिश्ता
पाक-साफ होता है…
इससे अच्छे-बुरे की परख होती है।
यहां अपनत्व की भावना होती है
जहां लोभ, मोह और लालच नहीं है,
जानो यही प्रियतम के साथ आसक्ति है,
सार्थक जीवन में प्रभु की भक्ति है।

शिवकुमार सिंह ‘दुर्गवंश’

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