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जमीन में दफन हो गए फायर हाइड्रेंट! …गोरेगांव अग्निकांड के बाद उठे सवाल

मुंबई के कई इलाकों में फायर हाइड्रेंट बंद

नागमणि पांडेय / मुंबई
गोरेगांव अग्निकांड के बाद मुंबई शहर में लगे अधिकतर फायर हाइड्रेंट बंद पड़े होने का खुलासा हुआ है। इस दुर्घटना के बाद बंद फायर हाइड्रेंट को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मुंबई में जरूरत के समय आग बुझाने के लिए लगभग दस हजार से अधिक फायर हाइड्रेंट लगाए गए थे। इन में से लगभग ९ हजार फायर हाईड्रेंट बंद पड़े हैं। इतना ही नहीं इन फायर हाइड्रेंट में लगे पीतल के वाल्व और चाभी गायब होने का खुलासा आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई जानकारी में हुआ है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में नागरिकों की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण भी तेजी के साथ हुआ है। इन इमारतों में या शहर में किसी भी जगह पर अचानक आग लग जाने पर पानी की सबसे अधिक जरूरत पड़ती है। इसके लिए ब्रिटिशकाल के समय मुंबई में साढ़े दस हजार फायर हाइड्रेंट लगाए गए थे। यह फायर हाइड्रेंट जगह-जगह पर जरूरत के अनुसार लगाए गए थे। आग लगने पर तुरंत बुझाने में मददगार साबित होते थे, लेकिन आज लापरवाही के कारण शहरभर में लगे लगभग ९ हजार फायर हाइड्रेंट बंद पड़े हैं। आग लगने की स्थिति में इन फायर हाइड्रेंट की मदद से फायर ब्रिगेड पानी लेता है, लेकिन वर्षों से मरम्मत न होने और रोड की ऊंचाई बढ़ने के कारण ये फायर हाइड्रेंट लगभग बेकार पड़े हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि सायन, केईएम, टाटा अस्पताल आदि जगहों पर लगाए गए फायर हाइड्रेंट में से एक भी काम नहीं कर रहा है।

३० मीटर पर होना चाहिए एक फायर हाइड्रेंट
फायरब्रिगेड के नियमों के अनुसार, हर ३० मीटर के बाद एक फायर हाइड्रेंट होना चाहिए। कई जगहों पर तो सड़कों की मरम्मत और विस्तार करते समय ये हाइड्रेंट्स हटा दिए गए हैं। बीएमसी पहले ही नए फायर हाइड्रेंट लगाने और पुरानों की मरम्मत करने पर करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है। अपने बेड़े में नए और हाइटेक वाटर टैंकर शामिल करने की वजह से अग्निशमन विभाग इन फायर हाइड्रेंट की उपेक्षा कर रहा है। अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी की मानें तो शहरभर में लगे फायर हाइड्रेंट पुराने हो गए हैं। इन फायर हाइड्रेंट में २४ घंटे पानी उपलबध नहीं है। पहले सात फाइटिंग फिलिंग सेंटर थे, अब इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग ५० कर दी गई है।

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