जुदाई की आग

नहीं जीना सोच लिया तेरे बिन
नहीं कटती हैं रातें तेरे बिन
तड़पता रहता हूं सारा दिन
फिरता रहता हूं आवारा इधर उधर
तेरी बेवफाई में सुलग रहा आग हूं जैसे
तेरी बातें तेरी यादें जाती नहीं दिल से
तेरी जुदाई में हर पल रोता हूं, तनहाई मुझे न मार डाले
लगता नहीं है दिल तेरे बिन
नहीं जीना सोच लिया तेरे बिन
बेगाना लगता है हर कोई मुझे यहां
बिखर गया है मेरा प्यारा जहां
अब तो खत्म हो रही मेरी सांसें
तेरी जफा को निभाता हूं ऐसे
इतनी दूर तुम चले गए कैसे
चढ़ता नहीं है दिन तेरे बिन
नहीं जीना सोच लिया तेरे बिन
जुदा हो गई अपनी राहें
फेर दी तूने क्यूं मुझसे निगाहें
आंसू बहते हैं
गिला तुझसे करते हैं
कहां गई अपनी चाहते
अब तो तेरे इंतज़ार में गुजरती हैं मेरी शामे
अब तो दिन ढलता नहीं तेरे बिन
नहीं जीना सोच लिया तेरे बिन।
-अन्नपूर्णा कौल, नोएडा

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