मुख्यपृष्ठसंपादकीयदावानल में तेल!

दावानल में तेल!

पाकिस्तान में महंगाई का दावानल भड़का हुआ है। कर्ज में डूबे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। जीवनावश्यक वस्तुओं की कीमतें आज तक का सभी रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं। इससे पाकिस्तानी जनता का जीना मुहाल हो गया है। इसी बीच महंगाई में तेल डालने का काम खुद प्रधानमंत्री इमरान खान ने ही किया है। महंगाई की आग के कारण लगातार हो रही आलोचनाओं से आक्रोशित हुए इमरान खान ने ‘मैं कोई आलू या टमाटर का दाम समझने के लिए राजनीति में नहीं आया हूं’, ऐसा बयान दिया है। इस वजह से वे एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। साग-सब्जियों से दूध तक, अनाज से खाद्य तेल तक तमाम जीवनावश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे पाकिस्तान की गरीब जनता पस्त हो गई है। पाकिस्तान के गांव-गांव में जनता ने महंगाई के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया है। महंगाई के खिलाफ आंदोलन का दावानल भड़काने के लिए वहां के विपक्ष से ताकत मिल रही है। ये सत्य होगा तब भी आम जनता के जीने-मरने का सवाल है इसलिए प्रधानमंत्री के रूप में बोलते समय इमरान को संयम और सबूरी दिखाना चाहिए था। परंतु इसके बजाय उन्होंने महंगाई के मुद्दे की ही खिल्ली उड़ाई। फलस्वरूप पाकिस्तान में इमरान के खिलाफ जनाक्रोश भड़क उठा है। देश में महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा संसद में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में इमरान के आक्रोश का मूल छिपा है। विपक्ष में रहने के दौरान जनता से जुड़ी समस्याओं को लेकर हाय-तौबा मचाना, महंगाई जैसे जनता से जुड़े मुद्दे पर देशभर में हंगामा करना, सरकार को कटघरे में खड़ा करना यह एक तरह से दुनिया भर की राजनीति का रिवाज ही है। पाकिस्तान में विपक्ष आज यही काम करता है। इमरान ने भी क्रिकेट के मैदान से राजनीति में कदम रखने के बाद यही किया था। परंतु सत्ता में आने के बाद महंगाई पर लगाम लगाने में इमरान खान जबरदस्त नाकाम साबित हुए, बल्कि इमरान के शासन में पाकिस्तान की जनता दाने-दाने को मोहताज हो गई। दरिद्रता बढ़ी, बेरोजगारी बढ़ी, तिजोरी खाली हो गई है। पाकिस्तान पूरी तरह कर्ज में डूब गया है। वैश्विक बैंक अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष व अमेरिका, चीन, खाड़ी देश के पास भीख का कटोरा लेकर इमरान खान गए। कई महीनों से घूम रहे हैं। ‘मदद के लिए विलाप करनेवाला याचक देश’ ऐसी पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छवि बन गई है। सभी देशों के कर्ज डुबाने के बाद अब पाकिस्तान रूस के आगे-पीछे दुम हिलाता दिख रहा है। जर्जर हो चुके पाकिस्तान की यह तस्वीर वहां की जनता को भी विचलित कर रही है। इसलिए विपक्ष ने महंगाई के मुद्दे पर इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव पर संसद में राजनीतिक उत्तर देने का मौका होने के बावजूद इमरान खान ने एक सार्वजनिक सभा में ‘आलू, टमाटर के दाम देखने के लिए मैं प्रधानमंत्री नहीं बना हूं’, ऐसा बयान देकर महंगाई की आग में खुद ही तेल झोंक दिया है। धनशक्ति के जोर पर मेरी सरकार गिराने का प्रयास विपक्ष कर रहा है, परंतु शाहबाज शरीफ, आसिफ अली जरदारी और मौलाना फजर्लुरहमान इन तीन विपक्षी नेताओं का विकेट मैं एक ही इन स्विंग यॉर्कर से ले लूंगा, ऐसा दावा इमरान खान ने किया है। अपनी कुर्सी मजबूत है, ये दिखाने के लिए इमरान ऐसा दावा कर रहे होंगे तब भी उनकी ‘तहरीक-ए-इंसाफ’ पार्टी में ही इमरान के खिलाफ असंतोष बढ़ता दिख रहा है। सेना के समर्थन पर इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की कुर्सी आज तक किसी तरह टिकाए रखी, परंतु रिकॉर्ड ब्रेक महंगाई के कारण पाकिस्तानी जनता में जो असंतोष पैâला है उसका सामना इमरान खान वैâसे करेंगे? महंगाई के मुद्दे पर विपक्षियों द्वारा पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव, इसी मुद्दे पर मीडिया में प्रतिदिन होनेवाली आलोचना तथा पाकिस्तानी जनता का सोशल मीडिया पर दिखनेवाले आक्रोश की वजह से इमरान खान परेशान हो गए हैं। उस पर ‘आलू, टमाटर के दाम देखने के लिए मैं पाकिस्तान का प्रधानमंत्री नहीं बना’ ऐसा गैरजिम्मेदाराना बयान देकर इमरान खान ने अपने खिलाफ दावानल में तेल डालने का ही काम किया है।

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