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पहले चावल ने ली जान अब आलू ने निकाला ‘दम’!

बेमौसम बारिश से भाव बढ़े, कीमतों में १५ से २० फीसदी तक का इजाफा

देश के प्राय: सभी हिस्सों में सर्दी ने दस्तक दे दी है। सर्दी के मौसम के शुरू होते ही कई इलाकों में बेमौसम बारिश भी आ गई। मैदानी इलाकों में रुक-रुककर हो रही हल्की-पुâल्की बारिश, चावल और आलू के लिए भारी तबाही का काम कर रही है। इसकी वजह से चावल और आलू की खेती में बाधा हो रही है। इस वजह से इनकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। चावल और आलू दोनों ही हिंदुस्थानी थाली का अभिन्न अंग हैं।

बारिश से पैदा हो रही बाधा के चलते आलू और चावल की कीमतों में १५ से २० फीसदी तक का इजाफा देखा गया है। सरकार ने चावल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए देश से गैर-बासमती चावल के निर्यात पर २० जुलाई से प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन बारिश की वजह से चावल के दाम दक्षिण में १५ से २० फीसदी तक बढ़ चुके हैं।

कर्नाटक में रुक-रुक हो रही बारिश ने खरीफ की फसल में चावल की पैदावार को कम किया है। इसकी वजह से दक्षिण में चावल की डिमांड और बढ़ गई है, जबकि अक्टूबर और नवंबर में हुई बारिश की वजह से आलू की फसल बाजार में नहीं आ पाई है। इसकी वजह से पुराने आलू के स्टॉक की कीमतें बढ़ रही हैं। आम तौर पर दिवाली के आसपास बाजार में नया आलू दस्तक दे देता है।

बारिश की वजह से दक्षिण में चावल की सप्लाई में कमी आई है, जिसकी वजह से उन्होंने उत्तर हिंदुस्थान से चावल खरीदना शुरू कर दिया है। दक्षिण भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से चावल की खरीद कर रहे हैं। इसकी वजह से पूरे देश में चावल की कीमतें बढ़ रही हैं। बासमती चावल भी महंगा हो रहा है। पश्चिमी एशियाई यानी खाड़ी देशों में इसकी मांग बढ़ने से देश से इसका एक्सपोर्ट बढ़ा है, जिसकी वजह से बासमती चावलों की कीमत में १० प्रतिशत की तेजी देखी गई है। हिंदुस्थान में सर्दियों के मौसम में हो रही बारिश की बड़ी वजह प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति का बनना है। इसकी वजह से कीमतों में बढ़त का रुझान अगले तीन से चार महीने तक देखे जाने का अनुमान है। अब अप्रैल २०२४ में नई फसल के आने बाद ही इसकी कीमतों के कम होने की संभावना है।

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