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भायंदर के उत्तन, पाली, डोंगरी, भट्टे बंदर और चौक में मछुआरों की बस्ती … ३० फीसदी मछुआरे नहीं कर पाए वोटिंग

३,००० मछुआरे समुद्र से नहीं आ पाए वापस
२१,००० मतदाता हैं पूरे उत्तन क्षेत्र में
सामना संवाददाता / मुंबई
भायंदर के पास उत्तन के कोस्टल क्षेत्र से बड़ी संख्या में मछुआरे अरब सागर में मछली पकड़ने गए, लेकिन पांचवें चरण के लोकसभा चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए समय पर नहीं लौट पाए।
लगभग ३,००० मछुआरों के साथ लगभग ६०० नावें गहरे समुद्र में हैं, क्योंकि मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर प्रतिबंध से पहले मछली पकड़ने के मौसम का अंतिम चरण है। भायंदर के उत्तन, पाली, डोंगरी, भट्टे बंदर और चौक सहित कई मछली पकड़ने वाले गांवों में ९०० से अधिक बड़ी और छोटी नावें हैं। क्योंकि मछली पकड़ना तटीय क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोगों की आजीविका का एकमात्र स्रोत है। तटीय गांव (ठाणे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं) की मतदाता संख्या वर्तमान में लगभग २१,००० है, जिनमें से ५२ प्रतिशत महिला मतदाता हैं। मछुआरा समुदाय के नेता बर्नार्ड डीमेलो ने कहा कि हमने मछुआरों से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की थी। हालांकि, बड़ी संख्या में नावें मछली पकड़ने के लिए समुद्र में उतरी हैं, लेकिन उनमें से ३० फीसदी समय पर वोट डालने के लिए वापस नहीं पहुंच सके।
महाराष्ट्र मच्छीमार कृति समिति का समर्थन
इस बीच मछुआरों के एक संघ अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृति समिति ने अपने समुदाय से महाविकास आघाड़ी (एमवीए) उम्मीदवारों का समर्थन करने का आग्रह किया, क्योंकि यह एकमात्र पार्टी है जिसने दहानू में वाढ़वन बंदरगाह परियोजना को रद्द करने का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने पालघर के बोईसर में अपने हालिया दौरे के दौरान वादा किया था कि अगर इंडिया गठबंधन सत्ता में आता है तो वे इस परियोजना को रद्द कर देंगे। मछुआरा समुदाय वाढ़वन बंदरगाह परियोजना का कड़ा विरोध कर रहा है क्योंकि उन्हें डर है कि इससे उनकी आजीविका पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।

मछली पकड़ने का है समय
मौजूदा समय में लगभग ९०० से अधिक नाव हैं। यहां के अधिकतर मछुआरों की आजीविका मछली पर निर्भर है। मानसून के पहले मछली पकड़ने का समय होता है, जिसकी वजह से वे गहरे समुद्र में उतरते हैं। इस सीजन का यह आखिरी दौर चल रहा है। ऐसे में लोगों को वापस बुलाना उनकी आजीविका को प्रभावित करने जैसा होगा। यही वजह है कि इस बार मछुआरों की वोटिंग में गिरावट आई है।
लीओ कोलाको, कांग्रेस और महाराष्ट्र मछुआरा नेता

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