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तारापुर में दिखा पांच दशक का ‘पावर’! २०३१ तक देश में होंगे ४३ परमाणु बिजली घर

सामना संवाददाता / मुंबई
इस साल हमारा देश आजादी का अमृतोत्सव मना रहा है। इस ७५ वर्ष के स्वर्ण काल के दौरान महाराष्ट्र के तारापुर में स्थापित परमाणु बिजली घर ने भी अपना पांच दशक का पावर दिखाया है। ये पांच दशक का स्वर्ण काल न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के लिए भी किसी उपलब्धि से कम नहीं रहा है। ये पावर प्लांट न सिर्फ हिंदुस्थान बल्कि एशिया का पहला प्लांट है। अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों ने जहां ३० साल बाद ही अपने गर्म पानी के रिएक्टर को बंद कर दिया था वहीं हिंदुस्थान के इस रिएक्टर प्लांट के ६० साल तक चलने की उम्मीद वैज्ञानिकों ने जताई है।
बता दें कि मुंबई से करीब १०० किमी दूर तारापुर में परमाणु रिएक्टर प्लांट की शुरुआत फरवरी १९६९में हुई थी। उस दौरान २१० क्षमतावाले दो न्यूक्लियर पावर प्लांट को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश को समर्पित किया था। करीब १५ साल के सफल परिचालन के बाद दोनों प्लांट की परिचालन क्षमता बढ़ाकर १६० मेगावॉट साल १९८५ में कर दी गई थी। आज प्रत्येक न्यूक्लियर पावर प्लांट रोजाना ५४० मेगावाट बिजली पैदा करते हैं। फिलहाल इस प्लांट को अपग्रेड करने के लिए उसे बंद किया गया है। इसके दोबारा शुरू होते ही ये प्लांट कई दशकों तक सफल परिचालन करेगा। ऐसी उम्मीद टीएपीएस के साइड डायरेक्टर एसएम मूलकलवार ने जताई है। भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्यरत एनपीसीआईएल के देश भर में २२ न्यूक्लियर पावर प्लांट हैं जिसके माध्यम से ६,७८० मेगावाट बिजली का उत्पादन व्यावसायिक रूप से किया जा रहा है। साल २०३१ तक परमाणु बिजली घर की संख्या ४३ तक पहुंच जाएगी। अगले एक दशक में २२४८० मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

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