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‘रामसर स्थल’ पर फ्लाई करेंगे फ्लेमिंगो! मुख्यमंत्री ने पक्षियों के घर के नए नाम के प्रस्ताव को दी मंजूरी

  • ठाणे की खाड़ी में इन पक्षियों का है बसेरा
  • बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं इन्हें देखने

सामना संवाददाता / ठाणे
ठाणे शहर से जुड़ा खाड़ी परिसर पिछले कई वर्षों से फ्लेमिंगो पक्षियों का आश्रय यानी अड्डा बना हुआ है। प्रतिवर्ष यहां फ्लेमिंगो आते हैं। अब फ्लेमिंगो के इसी अड्डे को ‘रामसर स्थल’ का नाम दिया जाएगा। इस नामकरण के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंजूरी दे दी है। ठाणे रामसर स्थल को रामसर साइट का दर्जा मिले इसलिए केंद्र  सरकार के पास प्रशासन की ओर से प्रस्ताव भेजा गया है।
बता दें कि प्रतिवर्ष ठंड के दौरान फ्लेमिंगो पक्षी ठाणे के खाड़ी परिसर में आकर अपना आसरा बनाते हैं। ये पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर कर ठंड से बचने के लिए ठाणे आते हैं। इस क्षेत्र को सुरक्षित रखने और फ्लेमिंगो के आसरे को नष्ट होने से बचाने के लिए पर्यटन विभाग ने ठाणे और नई मुंबई की सीमा पर मौजूद फ्लेमिंगो स्थल यानी उनके घर को ‘रामसर स्थल’ नाम देने का प्रस्ताव तैयार किया था। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक प्लेमिंगो को देखने आते हैं। पिछले वर्ष ९ दिसंबर को पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास भेजा था। गुरुवार के दिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। वहीं ठाणे खाड़ी स्थित इस स्थल को वेटलैंड की मान्यता दिलाने के केंद्र  सरकार के पास प्रस्ताव को भेज दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार वेटलैंड की मान्यता मिलते ही इस स्थल को कोई भी व्यक्ति या अन्य इस स्थल को नष्ट नहीं कर पाएगा। रामसर स्थल नाम देने से अनेक लाभ होनेवाले हैं। आद्र्रभूमि के संरक्षण और उचित उपयोग में सहायता करना, संरक्षण और प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करना, केंद्रीय वित्त पोषण के साथ स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार पैदा करना और साइट के आसपास के उद्योगों और व्यवसायों को वित्त देना। इस प्रकार का अनेक लाभ निश्चित मिलेगा। केंद्र  द्वारा मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर वाले प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद १,६९०.५ हेक्टेयर में फैला  यह स्थल मुंबई महानगरीय क्षेत्र में पहला और महाराष्ट्र में तीसरा होगा। वन अधिकारी ने कहा कि इस क्षेत्र को निकट भविष्य में स्थायी रूप से ‘रामसर साइट’ और ‘महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जल निकाय’ के रूप में नामांकित किया जाएगा और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों पर दर्ज किया जाएगा।

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